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‘खसक्किन्ते इतिहासम’ की दुनिया से लोगों को जोड़ने वाले मजीद अन्नान नहीं रहे

ओ.वी. विजयन के उपन्यास ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ से लोगों को जोड़ने वाले मजीद अन्नान का 70 साल की उम्र में निधन हो गया।

‘खसक्किन्ते इतिहासम’ की दुनिया से लोगों को जोड़ने वाले मजीद अन्नान नहीं रहे
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मजीद अन्नान, वह शख्स जिसने थस्रक आने वाले लोगों के लिए ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ को जिंदा कर दिया था, अब नहीं रहे

मजीद अन्नान, वह शख्स जिसने थस्रक आने वाले लोगों के लिए ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ को जिंदा कर दिया था, अब नहीं रहे

थस्रक के ओ.वी. विजयन मेमोरियल कल्चरल सेंटर में कई साल तक देखरेख करने वाले 70 साल के मजीद का गुरुवार रात निधन हो गया।

जो लोग ओ.वी. विजयन के उपन्यास ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ के बनने की जगह और वहां का माहौल देखने के लिए थस्रक पहुंचे थे, उनके लिए मजीद अन्नान से मिलना उस सफर का एक जरूरी हिस्सा बन गया था।

मजीद लोगों को इस उपन्यास की दुनिया में ले जाने में मदद करते थे। वह उन्हें इसके किरदारों के बारे में बताते थे। बचपन से जिस लेखक को जानते थे, उनकी यादें साझा करते थे। साथ ही, कहानी से जुड़े उन स्थानों की ओर इशारा करते थे, जो आज भी थस्रक में मौजूद हैं।

ओ.वी. विजयन से बचपन का रिश्ता

जब विजयन थस्रक में रहे और उन्होंने यह उपन्यास लिखा, तब मजीद 4 साल के थे।

बचपन में वह अपनी मां के साथ लेखक से मिलने जाया करते थे।

उस उम्र में वह अपने आसपास आकार ले रहे इस काम की अहमियत समझने के लिए बहुत छोटे थे। लेकिन उन्हें विजयन एक ऐसे शांत आदमी के रूप में याद थे, जो अपना काफी समय सोचने और लिखने में बिताते थे।

बाद में यही शुरुआती मुलाकातें उन कहानियों का जरिया बनीं, जिन्हें थस्रक आने वाले पाठकों की कई पीढ़ियां सुनती रहीं। ये पाठक ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ की दुनिया को तलाशते हुए वहां पहुंचते थे।

मजीद के गुजर जाने के बाद गांव ने लेखक और उन लोगों के बीच की एक अहम कड़ी खो दी है, जो उपन्यास की दुनिया को खोजते हुए अब भी इस जगह आते रहते हैं।

उपन्यास से जुड़े स्थानों तक पाठकों को ले जाना

मजीद न तो पढ़ सकते थे और न ही लिख सकते थे। लेकिन वह इस जगह और यहां के लोगों से अपने लंबे परिचय के कारण उपन्यास और उसके किरदारों को अच्छी तरह जानते थे।

जब वह किरदारों, उनकी जिंदगी और कहानी को प्रेरणा देने वाले असली आसपास के माहौल के बारे में बताते थे, तो लोग उनके चारों ओर इकट्ठा हो जाते थे।

वह लोगों को उपन्यास से जुड़े स्थानों पर भी ले जाते थे। इनमें अरबीकुलम, न्जट्टुपुरा और कूमन कावु शामिल थे।

किताब के पन्नों से इन जगहों को जानने वाले पाठकों के लिए मजीद की बातें उपन्यास की कल्पना और उनके सामने मौजूद असली जगह के बीच एक रिश्ता बना देती थीं।

उनका यह ज्ञान किताबों या किसी औपचारिक पढ़ाई से नहीं आया था।

यह ज्ञान उस जगह और उसकी यादों के करीब रहकर मिला था। यह उन लोगों और आसपास के माहौल को जानने से आया था, जिनका रिश्ता विजयन के काम से था।

वह विजयन के बारे में बताते थे। वह यह भी बताते थे कि उपन्यास किन हालात में लिखा गया था। इसके साथ ही, वह इससे जुड़े लोगों और जगहों की बातें भी साझा करते थे।

उन्होंने लेखक की थस्रक की आखिरी यात्रा से जुड़ी यादें भी लोगों को सुनाईं।

सिर्फ देखरेख करने वाले नहीं थे

थस्रक आने वाले लोगों के लिए मजीद सिर्फ उस स्मारक की देखभाल करने वाले व्यक्ति नहीं थे।

जब लोग विजयन की बनाई हुई दुनिया को समझना चाहते थे, तो अक्सर सबसे पहले मजीद के पास ही जाते थे।

उनकी सुनाई कहानियां इस जगह को एक मानवीय रिश्ता देती थीं। सिर्फ स्मारक देखने से लोगों को यह रिश्ता नहीं मिल सकता था।

इसी भूमिका की वजह से मजीद की निजी यादें उस तरीके का हिस्सा बन गईं, जिसके जरिए बहुत से लोगों ने थस्रक और इस उपन्यास को समझा।

पाठक आगे भी ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ को अपने मन में लेकर थस्रक आते रहेंगे। उपन्यास को आकार देने वाली ये जगहें भी उनके मन में बनी रहेंगी।

लेकिन जिन किरदारों की नजर से इन जगहों को देखने में मजीद ने उनकी मदद की, उन जगहों की कहानियां सुनाने के लिए अब वह वहां नहीं होंगे।

मजीद के पीछे उनकी पत्नी और 3 बच्चे हैं।

उन्हें शुक्रवार को थस्रक जुमा मस्जिद के कब्रिस्तान में दफनाया गया।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मजीद अन्नान कौन थे?

मजीद अन्नान ओ.वी. विजयन मेमोरियल कल्चरल सेंटर की कई साल तक देखरेख करने वाले व्यक्ति थे। वह लोगों को ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ की दुनिया और उससे जुड़े स्थानों के बारे में बताते थे।

मजीद अन्नान का निधन कब और कितनी उम्र में हुआ?

70 साल के मजीद अन्नान का गुरुवार रात निधन हो गया।

मजीद अन्नान का ओ.वी. विजयन से क्या रिश्ता था?

मजीद बचपन से ओ.वी. विजयन को जानते थे और अपनी मां के साथ उनसे मिलने जाया करते थे। वह लेखक से जुड़ी अपनी यादें लोगों के साथ साझा करते थे।

मजीद लोगों को किन जगहों पर ले जाते थे?

मजीद लोगों को ‘खसक्किन्ते इतिहासम’ से जुड़े अरबीकुलम, न्जट्टुपुरा और कूमन कावु जैसे स्थानों पर ले जाते थे।

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