उज्जैन में महाकाल की विजयादशमी सवारी निकली, ड्रोन से बरसे 500 किलो फूल
उज्जैन में विजयादशमी महापर्व के अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक सवारी निकाली गई। यह सवारी अपराह्न 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से शुरू हुई।
उज्जैन में विजयादशमी महापर्व के अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक सवारी निकाली गई। यह सवारी अपराह्न 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से शुरू हुई। इसके बाद सवारी नये शहर के अलग-अलग मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंची।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पालकी पहुंचते ही मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल ने पालकी में विराजमान भगवान श्री मनमहेश जी को सलामी दी। इसके बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी।
श्री महाकालेश्वर मंदिर से निकलकर सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुंडा चौराहा और टॉवर मार्ग से होते हुए आगे बढ़ी। इसके बाद सवारी शहीद पार्क, घास मंडी चौराहा, माधवनगर हॉस्पिटल, पुलिस कंट्रोल रूम और एल.आई.सी. ऑफिस के मार्ग से गुजरी। लिनन शोरूम के समीप की गली से होकर पालकी दशहरा मैदान पहुंची।
दशहरा मैदान में भगवान की पालकी का स्वागत किया गया और पूजन संपन्न हुआ। यहां परंपरा के अनुसार भगवान मनमहेश जी तथा शमी वृक्ष का पूजन किया गया। पूजन के बाद भगवान की पालकी की वापसी यात्रा शुरू हुई।
वापसी में सवारी दशहरा मैदान से श्री गंगा होटल मार्ग, देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड, धन्नाल की चाल, लोकनिर्माण विभाग कार्यालय, फ्रीगंज ओवरब्रिज और संख्याराजे धर्मशाला से होकर गुजरी। इसके बाद सवारी देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा, इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ब्रिज, बेगमबाग और कोट मोहल्ला चौराहा होते हुए फिर श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार भगवान की पालकी पर ड्रोन से 500 किलो पुष्पों की वर्षा की गई। संपूर्ण सवारी मार्ग में लगभग 1 लाख स्क्वेयर फीट में रंगोली बनाई गई। इस दौरान लाइव पेंटिंग की गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर बैण्ड और पुलिस बैंड की शानदार प्रस्तुति भी हुई।
सवारी में लगभग 10 आदिवासी जनजाति नृत्य दलों ने प्रस्तुति दी। एल.ई.डी. रथों पर सवारी का प्रसारण किया गया। 10 भजन मंडलियां भी सवारी में सम्मिलित हुईं। 300 वैदिक बटुकों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। इसके साथ ही रजत ढोल का वादन, तोपची कडाबीन, भारत स्काउट गाइड, कांग्रेस सेवा दल और मार्ग उद्घोषक भी सवारी में शामिल हुए।
सवारी मार्ग पर सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश, आपातकालीन चिकित्सा और फायर ब्रिगेड सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं संबंधित विभागों ने सुनिश्चित कीं।
मंदिर के गर्भगृह में संध्या पूजन के बाद श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री होल्कर (मुखारविंद) स्वरूप के दर्शन होंगे। परंपरा के अनुसार इस अवसर पर भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाते हैं। साथ ही मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन भी किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उज्जैन में महाकाल की विजयादशमी सवारी कब शुरू हुई?
महाकाल की विजयादशमी सवारी अपराह्न 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से शुरू हुई।
महाकाल की पालकी पर ड्रोन से कितने फूल बरसाए गए?
भगवान की पालकी पर ड्रोन से 500 किलो फूल बरसाए गए।
महाकाल की सवारी में कितने आदिवासी नृत्य दल शामिल हुए?
सवारी में करीब 10 आदिवासी जनजाति नृत्य दलों ने प्रस्तुति दी।
दशहरा मैदान में महाकाल की पालकी के साथ क्या हुआ?
दशहरा मैदान में पालकी का स्वागत किया गया और भगवान मनमहेश जी व शमी वृक्ष का पूजन हुआ।
महाकाल की सवारी में कितने वैदिक बटुकों ने मंत्रों का उच्चारण किया?
सवारी में 300 वैदिक बटुकों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया।
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