खोड़ा की नव चेतना समिति में गोदाम पर कब्जे का आरोप, पुलिस की मौजूदगी पर उठे सवाल
अरविंद डबास का दावा है कि उनकी जमीन पर बने गोदाम में जबरन सामान रखा गया। पुलिस ने पुराने विवाद और धारा 145 के आदेश का हवाला दिया, जबकि शिकायतकर्ता ने आदेश को दूसरी जमीन से जुड़ा बताया।
गाजियाबाद: खोड़ा क्षेत्र की नव चेतना समिति में जमीन और उस पर बने गोदाम के कब्जे को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता अरविंद डबास ने आरोप लगाया है कि दूसरे पक्ष ने पहले आसपास के कमरों के रास्तों को मिट्टी डालकर बंद किया और फिर गोदाम के भीतर सामान रख दिया। उनका आरोप है कि यह गतिविधि पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन पुलिस ने इसे रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की।
घटनास्थल से मिले वीडियो में एक संकरी गली में ट्रक, ईंटों का ढेर और कई लोगों को निर्माण सामग्री के पास देखा जा सकता है। वीडियो में किसी पुलिसकर्मी की स्पष्ट पहचान नहीं होती और न ही इससे जमीन के मालिकाना हक या कब्जे की वैधता तय की जा सकती है। वीडियो से निकाली गई तस्वीर में मौजूद लोगों के चेहरे गोपनीयता के लिए धुंधले किए गए हैं।
20 साल से किराए पर गोदाम देने का दावा
अरविंद डबास के मुताबिक, विवादित गोदाम उनकी जमीन पर बना है और उन्होंने इसे करीब 20 साल से अजय कुमार नाम के व्यक्ति को किराए पर दे रखा है। अजय कुमार वहां सीमेंट का गोदाम चलाते हैं। डबास ने यह भी कहा कि अजय कुमार भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
डबास ने दूसरे पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति पर लगातार जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया। उनके अनुसार, करीब एक महीने पहले भी गोदाम पर कब्जे की कोशिश हुई थी, लेकिन उस समय पुलिस ने हस्तक्षेप कर दूसरे पक्ष को वहां से हटा दिया था। इस बार कथित तौर पर गोदाम में सामान रखा गया और किराएदार का सामान बाहर निकालने की कोशिश की गई।
थाने पहुंचकर किया विरोध
घटना के बाद शिकायतकर्ता पक्ष के लोग खोड़ा थाने पहुंचे और विरोध जताया। उनका कहना था कि जमीन और गोदाम पर उनका पुराना कब्जा तथा किरायेदारी मौजूद है, इसलिए किसी भी बदलाव से पहले दस्तावेजों और वास्तविक भूखंड की पहचान की जांच होनी चाहिए।
पुलिस ने धारा 145 के आदेश का दिया हवाला
पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी समय से चल रहा है और धारा 145 से जुड़ा आदेश दूसरे पक्ष के पक्ष में है। वहीं अरविंद डबास ने दावा किया कि पुलिस जिस आदेश का हवाला दे रही है, वह इस गोदाम वाली जमीन का नहीं बल्कि किसी अन्य भूखंड का मामला है।
दोनों पक्षों के दावों में जमीन की पहचान और आदेश के दायरे को लेकर सीधा विरोध है। मालिकाना हक, कब्जे और आदेश की लागू जमीन का निर्धारण राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित आदेश और सक्षम प्राधिकारी की जांच से होगा। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने विवाद को पुराना बताते हुए वैधानिक आदेश का हवाला दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खोड़ा की नव चेतना समिति में विवाद किस बात को लेकर है?
जमीन और उस पर बने गोदाम के कब्जे को लेकर विवाद है।
अरविंद डबास ने क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष ने कमरों के रास्ते मिट्टी डालकर बंद किए और गोदाम में सामान रख दिया। उनका दावा है कि यह पुलिस की मौजूदगी में हुआ।
अरविंद डबास के मुताबिक गोदाम किसे किराए पर दिया गया है?
उनके मुताबिक गोदाम करीब 20 साल से अजय कुमार को किराए पर दिया गया है, जो वहां सीमेंट का गोदाम चलाते हैं।
पुलिस ने विवाद पर क्या कहा है?
पुलिस का कहना है कि विवाद काफी समय से चल रहा है और धारा 145 से जुड़ा आदेश दूसरे पक्ष के पक्ष में है।
जमीन और कब्जे की स्थिति कैसे तय होगी?
राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित आदेश और सक्षम प्राधिकारी की जांच से जमीन की पहचान, मालिकाना हक और कब्जे की स्थिति तय होगी।
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