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48वीं CSIT कांग्रेस में IABF अध्यक्ष राकेश मिश्र ने भारत का पक्ष रखा

डेनमार्क के आल्बोर्ग शहर में आयोजित 48वीं CSIT ऑर्डिनरी कांग्रेस तीन दिवसीय बैठकों और विचार-विमर्श के बाद शनिवार को संपन्न हुई।

48वीं CSIT कांग्रेस में IABF अध्यक्ष राकेश मिश्र ने भारत का पक्ष रखा
Image credit: News Darpan Team

डेनमार्क के आल्बोर्ग शहर में आयोजित 48वीं CSIT ऑर्डिनरी कांग्रेस तीन दिवसीय बैठकों और विचार-विमर्श के बाद शनिवार को संपन्न हुई। इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन (IABF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने खेलों के विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, युवा प्रतिभाओं को अवसर देने और खेलों के जरिए विश्व बंधुत्व को मजबूत करने के मुद्दे पर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा।

कांग्रेस के दौरान डॉ. राकेश मिश्र ने खेलों को विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक एकता का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि खेल अलग-अलग देशों, संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने की क्षमता रखते हैं। उनके मुताबिक, खेलों के जरिए आपसी विश्वास, सम्मान, मैत्री और सहयोग की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

अपने संबोधन में डॉ. मिश्र ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विचारधारा “वसुधैव कुटुम्बकम् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है” को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से इस विचार को व्यवहार में उतारा जा सकता है। भारत का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना या पदक जीतना नहीं है, बल्कि खेलों के जरिए मानवता, शांति और विश्व बंधुत्व के मूल्यों को भी आगे बढ़ाना है।

डॉ. राकेश मिश्र ने कहा कि खेलों को केवल प्रतियोगिता और परिणाम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। खेलों की भूमिका युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के मौके देना खेल व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी है।

उन्होंने भारत में खेलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। डॉ. मिश्र ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सामने आए अवसरों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में खेलों को लेकर माहौल बदल रहा है और इस बदलाव को जमीनी स्तर तक पहुंचाना जरूरी है।

डॉ. मिश्र ने खेल एवं युवा मामलों के केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ बड़े शहरों और स्थापित केंद्रों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार, प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी बढ़ाना भारतीय खेलों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस में डॉ. राकेश मिश्र ने भारतीय बॉक्सिंग की संभावनाओं पर भी विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने देश की प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए जरूरी अवसरों पर जोर दिया। उनके मुताबिक, भारत में बॉक्सिंग की अपार संभावनाएं हैं। उचित प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं, पारदर्शी अवसरों और लगातार प्रतिस्पर्धा के जरिए खिलाड़ियों की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बॉक्सिंग का विकास केवल पहले से स्थापित खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में मौजूद प्रतिभाओं को भी आगे आने का समान अवसर मिलना जरूरी है। डॉ. मिश्र ने युवा खिलाड़ियों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिभागियों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने इसे एक मजबूत और समावेशी खेल व्यवस्था के लिए अहम माना।

भारतीय बॉक्सिंग के विकास के संदर्भ में डॉ. मिश्र ने प्रो बॉक्सिंग लीग (PBL) सीजन-1 की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पेशेवर खेल आयोजनों से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच मिलता है। इसके साथ ही उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव हासिल करने और अपनी तैयारी को बेहतर बनाने का अवसर भी मिलता है।

उन्होंने बताया कि प्रो बॉक्सिंग लीग (PBL) सीजन-1 जैसे आयोजन बॉक्सिंग को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों के बीच जुड़ाव बढ़ता है। डॉ. मिश्र ने भारतीय बॉक्सिंग को आगे ले जाने के लिए खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धा, बेहतर प्रशिक्षण और अपनी क्षमता साबित करने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

48वीं CSIT ऑर्डिनरी कांग्रेस के दौरान भारतीय संस्कृति और परंपरा का परिचय भी कराया गया। डॉ. राकेश मिश्र ने CSIT के अध्यक्ष श्री ब्रूनो मोलियो और महासचिव श्री वोल्फगैंग बुर्कहार्ट सहित अंतरराष्ट्रीय पदाधिकारियों का भारतीय अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया। इस पहल के जरिए उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, अतिथि-सत्कार और आपसी सम्मान की परंपरा को सामने रखा।

डॉ. मिश्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल मंच केवल नीतियों और प्रतियोगिताओं पर चर्चा करने की जगह नहीं हैं। ये मंच विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद, मित्रता और सहयोग को मजबूत करने का अवसर भी देते हैं। जब अलग-अलग देशों के खिलाड़ी और खेल संगठनों के प्रतिनिधि एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करते हैं, तो खेलों की भावना और मजबूत होती है।

इस कांग्रेस में विभिन्न 98 देशों के प्रतिनिधियों के बीच खेलों के विकास, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और खेल संगठनों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। डॉ. मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के साथ संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खेलों से जुड़े संगठनों के बीच बेहतर तालमेल से खिलाड़ियों और खेल प्रतिभाओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा सकता है। प्रशिक्षण पद्धतियों में सुधार, युवा खिलाड़ियों के लिए नए अवसर और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अधिक सहभागिता भी इसी सहयोग से सुनिश्चित की जा सकती है। भारत जैसे विशाल युवा आबादी वाले देश के लिए यह जरूरी है कि उसकी खेल प्रतिभाएं वैश्विक मंचों से जुड़ें और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के व्यापक अवसर मिलें।

डॉ. राकेश मिश्र ने अपने संबोधन में खेलों को सिर्फ जीत और हार के नजरिए से देखने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, संघर्ष, धैर्य, निष्पक्षता और प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान का पाठ पढ़ाते हैं। मैदान पर अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन खेल भावना उन्हें करीब लाने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व को आपसी विश्वास, सहयोग और सद्भाव की पहले से अधिक जरूरत है। ऐसे समय में खेल एक साझा भाषा बन सकते हैं। यह भाषा सीमाओं से आगे जाकर अलग-अलग देशों के लोगों को जोड़ती है। भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को खेलों के जरिए व्यवहार में उतारना वैश्विक एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

डॉ. मिश्र ने यह भी रेखांकित किया कि खेलों की असली सफलता केवल पदकों और रिकॉर्डों में नहीं होती। खेलों से बनने वाले संबंध, खिलाड़ियों को मिलने वाले अवसर और समाज तथा विश्व के लिए विकसित होने वाले सकारात्मक मूल्य भी उतने ही अहम हैं। उनके मुताबिक, खेलों को मानवता, शांति और आपसी सम्मान से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

48वीं CSIT ऑर्डिनरी कांग्रेस में डॉ. राकेश मिश्र की भागीदारी से भारतीय बॉक्सिंग, खेल विकास और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखने का अवसर मिला। उनके विचारों में खेलों के विस्तार, प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, युवा सहभागिता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में भारत की ओर से खेलों को विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक एकता का माध्यम बताया गया। डॉ. राकेश मिश्र ने खेलों के जरिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संकल्प को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने भारतीय बॉक्सिंग और देश की युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ खेलों के माध्यम से देशों के बीच सहयोग और विश्व बंधुत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

48वीं CSIT कांग्रेस कहां आयोजित हुई थी?

48वीं CSIT ऑर्डिनरी कांग्रेस डेनमार्क के आल्बोर्ग शहर में आयोजित हुई थी।

कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?

इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन (IABF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।

डॉ. राकेश मिश्र ने खेलों को किसका माध्यम बताया?

उन्होंने खेलों को विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक एकता का सशक्त माध्यम बताया।

डॉ. मिश्र ने भारतीय बॉक्सिंग के विकास के लिए किन बातों पर जोर दिया?

उन्होंने उचित प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं, पारदर्शी अवसरों और लगातार प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया।

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