हांगकांग की घटती जन्म दर पर बहस में भाषा भी अहम
हांगकांग में कम होती जन्म दर पर आर्थिक मदद के साथ भाषा की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। अंग्रेजी और चीनी के व्याकरण का फर्क बना आधार।
हांगकांग में जन्म दर पर बहस में सिर्फ पैसा नहीं, भाषा भी मायने रखती है
हांगकांग में जन्म दर को लेकर चल रही बहस अब सिर्फ खर्च उठा पाने की क्षमता तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें भाषा के इस्तेमाल को भी एक ऐसे कारक के तौर पर पेश किया जा रहा है, जो यह तय करने में भूमिका निभा सकता है कि लोग भविष्य को किस नजर से देखते हैं।
इस तर्क में आर्थिक मदद को खारिज नहीं किया गया है। इसमें कहा गया है कि इन उपायों के साथ-साथ रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली भाषा या भाषाओं की बनावट से जुड़ा एक कम साफ दिखने वाला मुद्दा भी है।
इस चर्चा में आम तौर पर ज्यादा बेबी बोनस, टैक्स में छूट, घर से जुड़ी मदद, सस्ती चाइल्डकेयर और दूसरे आर्थिक उपायों पर ध्यान दिया जाता है।
इन उपायों को जरूरी बताया जाता है, क्योंकि बच्चे की परवरिश का खर्च कम करने से परिवारों के सामने खड़ी असली और तुरंत आने वाली रुकावटें कम होती हैं।
लेकिन टिप्पणी में कहा गया है कि हांगकांग में कम होती जन्म दर की परेशानी सिर्फ खर्च उठा पाने से जुड़ी नहीं है।
डॉ. झिशेंग (एडवर्ड) वेन हांगकांग पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एंड कंटिन्यूइंग एजुकेशन में एसोसिएट डिविजन हेड और वरिष्ठ लेक्चरर हैं।
वह दूसरी भाषा सीखने, ट्रांसलैंग्वेजिंग और कॉग्निटिव साइंस पर रिसर्च करते हैं और पढ़ाते भी हैं।
व्याकरण समय को किस तरह दिखाता है
भाषा पर आधारित वेन की व्याख्या अंग्रेजी और चीनी के बीच के अंतर से शुरू होती है।
अंग्रेजी में उदाहरण हैं: “कल बारिश हुई। अब बारिश हो रही है। कल बारिश होगी।”
चीनी में इन तीनों वाक्यों के लिए व्याकरण के स्तर पर इस तरह के बदलाव की जरूरत नहीं होती।
क्रिया का रूप नहीं बदलता और भविष्य को व्याकरण के स्तर पर वर्तमान से अलग नहीं किया जाता।
इस अंतर को यह समझने के एक तरीके के तौर पर पेश किया गया है कि रोजमर्रा की भाषा की बनावट, आर्थिक हालात के मुकाबले, किस तरह ज्यादा हल्के और बिना सीधे दिखाई दिए असर डाल सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि आर्थिक मदद, घर से जुड़ी सहायता या चाइल्डकेयर सपोर्ट की जरूरत खत्म हो जाती है। इस लेख में इन मददों को जरूरी बताया गया है।
यह सवाल का दायरा बढ़ाता है। बच्चे की परवरिश का खर्च उठाने के साथ-साथ बहस में यह भी देखा जा सकता है कि भाषा का इस्तेमाल भविष्य को लेकर लोगों की सोच को किस तरह आकार देता है।
इससे कोई नया आर्थिक प्रस्ताव सामने नहीं आता। इसके बजाय यह ऐसी बहस को देखने का एक अलग नजरिया देता है, जिस पर आम तौर पर खर्च उठा पाने की क्षमता का मुद्दा हावी रहता है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हांगकांग में जन्म दर पर बहस अब किन मुद्दों तक पहुंच गई है?
बहस अब सिर्फ बच्चे की परवरिश का खर्च उठा पाने तक सीमित नहीं है। इसमें भाषा के इस्तेमाल और भविष्य को लेकर लोगों की सोच पर उसके असर को भी शामिल किया जा रहा है।
जन्म दर बढ़ाने के लिए किन आर्थिक उपायों पर चर्चा हो रही है?
ज्यादा बेबी बोनस, टैक्स में छूट, घर से जुड़ी मदद और सस्ती चाइल्डकेयर जैसे उपायों पर चर्चा हो रही है।
अंग्रेजी और चीनी भाषा में समय दिखाने को लेकर क्या अंतर बताया गया है?
अंग्रेजी में क्रिया का रूप बदलकर बीते, वर्तमान और आने वाले समय को दिखाया जाता है। चीनी में इन तीनों के लिए व्याकरण के स्तर पर ऐसे बदलाव की जरूरत नहीं होती।
इस भाषा संबंधी व्याख्या को किस विशेषज्ञ ने सामने रखा है?
डॉ. झिशेंग (एडवर्ड) वेन ने यह व्याख्या सामने रखी है। वह हांगकांग पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में एसोसिएट डिविजन हेड और वरिष्ठ लेक्चरर हैं।
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