70 हजार शिक्षकों को पुराने सेवा लाभ का रास्ता साफ: हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते में आदेश लागू करने को कहा जबलपुर।
जबलपुर में मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों से जुड़े पुराने सेवा लाभ के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
जबलपुर में मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों से जुड़े पुराने सेवा लाभ के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। यह मामला शिक्षकों की पहली नियुक्ति से सेवा की गणना करने, उसी आधार पर वेतन निर्धारण करने और उससे जुड़े एरियर व दूसरे सेवा लाभ देने से जुड़ा है।
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद इन शिक्षकों के लिए पुराने सेवा लाभ का रास्ता साफ माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, किस शिक्षक को कितना वेतन अंतर मिलेगा और एरियर की राशि कितनी बनेगी, यह सरकार के विभागीय हिसाब-किताब और आदेश के पालन के बाद ही साफ होगा।
मामला 497 शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी पूर्व सेवा अवधि को सही तरीके से नहीं जोड़ा गया। इसी वजह से उन्हें वेतन और अन्य सेवा लाभों में नुकसान हुआ। शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा की गणना पहली नियुक्ति से की जाए, ताकि वेतन निर्धारण और बाकी लाभ उसी हिसाब से तय किए जा सकें।
इस मामले में पहले हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। राज्य सरकार ने उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से दाखिल स्पेशल लीव पिटिशन यानी SLP 24 अगस्त 2026 को खारिज हो गई। इसके बाद शिक्षकों ने आदेश का पालन कराने के लिए फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना याचिका दायर की।
जस्टिस दीपक खोट की एकल पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार ने आदेश के पालन के लिए समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। उस समय यह देखा जाएगा कि सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के पालन की दिशा में क्या कार्रवाई की है।
शिक्षकों के अनुसार, अगर पहली नियुक्ति से सेवा की गणना की जाती है, तो वेतन निर्धारण दोबारा हो सकता है। उनका दावा है कि इससे वर्तमान वेतन में करीब 15 हजार रुपए तक का अंतर आ सकता है। कुछ मामलों में यह अंतर 20 हजार रुपए तक बताया गया है। हालांकि, यह अंतर सभी के लिए एक जैसा होगा, ऐसा नहीं कहा गया है।
वास्तविक बढ़ोतरी हर शिक्षक के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति की तारीख और विभागीय वेतन निर्धारण पर निर्भर करेगी। यानी किसी शिक्षक को कितना फायदा मिलेगा, यह उसके अपने रिकॉर्ड और विभाग की गणना के बाद ही तय होगा। शिक्षक संगठनों की ओर से बताए जा रहे वेतन अंतर को अनुमान के तौर पर देखा जा रहा है।
एरियर को लेकर भी शिक्षकों की ओर से बड़ा दावा किया गया है। शिक्षकों के अनुसार, छठे वेतनमान से जुड़े लाभों में देरी के कारण करीब 10 साल के एरियर का मामला बनता है। शिक्षक संगठनों के मुताबिक प्रति शिक्षक करीब 7 से 8 लाख रुपए तक एरियर की राशि बन सकती है।
इसके अलावा बकाया राशि पर 12% ब्याज की मांग भी की गई है। लेकिन एरियर और ब्याज की वास्तविक राशि अभी तय नहीं है। यह राशि सरकार के विभागीय हिसाब-किताब, सेवा रिकॉर्ड की जांच और आदेश के पालन के बाद ही साफ होगी। इसलिए अभी यह कहा जा रहा है कि दावा अलग है और वास्तविक भुगतान का आकलन बाद में होगा।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, इस मामले का असर तीन श्रेणियों के शिक्षकों पर पड़ेगा। इनमें करीब 35 हजार प्राथमिक शिक्षक, 20 हजार माध्यमिक शिक्षक और 15 हजार उच्च माध्यमिक शिक्षक शामिल हैं। कुल मिलाकर प्रभावित शिक्षकों की संख्या करीब 70 हजार बताई गई है।
प्राथमिक शिक्षकों को लेकर शिक्षक संगठनों का दावा है कि उनका मौजूदा वेतन करीब 80 हजार रुपए है। सेवा लाभ मिलने पर यह करीब 1 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। यह दावा भी अनुमान के तौर पर रखा गया है और अंतिम वेतन लाभ संबंधित शिक्षक के रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा।
माध्यमिक शिक्षकों के मामले में वर्तमान वेतन करीब 95 हजार रुपए बताया गया है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, सेवा लाभ मिलने पर यह बढ़कर करीब 1.10 लाख रुपए तक हो सकता है। यहां भी वास्तविक वेतन निर्धारण विभागीय प्रक्रिया के बाद ही होगा।
उच्च माध्यमिक शिक्षकों को लेकर दावा है कि उनका मौजूदा वेतन करीब 1 लाख रुपए है। सेवा लाभ मिलने पर यह बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। ये आंकड़े शिक्षक संगठनों की ओर से बताए गए अनुमान हैं। इन्हें अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि अंतिम गणना विभाग के स्तर पर होगी।
पुरानी सेवा अवधि जुड़ने का असर केवल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षक संगठनों के अनुसार, इससे वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना पर भी असर पड़ सकता है। अगर सेवा की गणना पहली नियुक्ति से होती है, तो कई शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड में बदलाव आ सकता है। इसी आधार पर आगे के लाभों की गणना की जा सकती है।
हालांकि, सभी शिक्षकों को समान राशि का लाभ मिलेगा, ऐसा जरूरी नहीं है। हर शिक्षक की नियुक्ति की तारीख, सेवा अवधि, सेवा रिकॉर्ड और विभागीय वेतन निर्धारण अलग-अलग हो सकता है। इसलिए लाभ की गणना भी प्रत्येक शिक्षक के आधार पर अलग-अलग होगी।
हाईकोर्ट से चार सप्ताह की समय-सीमा मिलने के बाद अब नजर सरकार की कार्रवाई पर है। शिक्षा विभाग को पुराने आदेश के अनुपालन की दिशा में कदम उठाने होंगे। सरकार की कार्रवाई के बाद ही साफ होगा कि कितने शिक्षकों को कितना वेतन लाभ मिलेगा और कितना एरियर बनेगा।
21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अगली सुनवाई होनी है। उस सुनवाई में आदेश के पालन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि सरकार हाईकोर्ट की ओर से दी गई चार सप्ताह की मोहलत के भीतर क्या कदम उठाती है और पुराने सेवा लाभ से जुड़े आदेश को किस तरह लागू करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाईकोर्ट ने सरकार को क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को शिक्षकों के पुराने सेवा लाभ से जुड़ा आदेश लागू करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है।
यह मामला किन शिक्षकों से जुड़ा है?
यह मामला करीब 70 हजार शिक्षकों से जुड़ा बताया गया है, जिनमें लगभग 35 हजार प्राथमिक, 20 हजार माध्यमिक और 15 हजार उच्च माध्यमिक शिक्षक शामिल हैं।
शिक्षकों की मुख्य मांग क्या है?
शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा की गिनती पहली नियुक्ति से की जाए, ताकि वेतन निर्धारण, एरियर और दूसरे सेवा लाभ उसी आधार पर मिल सकें।
क्या शिक्षकों को कितना फायदा मिलेगा, यह तय हो गया है?
नहीं, अभी वास्तविक फायदा तय नहीं है। यह हर शिक्षक के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति की तारीख और विभागीय गणना के बाद ही साफ होगा।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी, जहां देखा जाएगा कि सरकार ने आदेश लागू करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
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