हाथरस में दो छात्राएं बनीं एक दिन की साइबर थाना प्रभारी
हाथरस में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की दो छात्राओं कु. मोनिका और कु. रागिनी को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
हाथरस में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की दो छात्राओं कु. मोनिका और कु. रागिनी को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दोनों छात्राओं ने थाना साइबर क्राइम पहुंचकर एक दिवसीय थानाध्यक्ष के तौर पर काम किया। उन्होंने साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतें सुनीं और पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत हाथरस पुलिस ने यह पहल की। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को जनसुनवाई, शिकायतों के निस्तारण और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में आयोजित किया गया। इसमें अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी साइबर का पर्यवेक्षण रहा। पुलिस के मुताबिक, छात्राओं को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का उद्देश्य उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और फैसला लेने की क्षमता को बढ़ाना था।
एक दिवसीय थानाध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए मोनिका और रागिनी ने साइबर थाना पहुंचने वाले फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों को समझा और पीड़ितों की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने दोनों छात्राओं को बताया कि शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध की जांच किस तरह की जाती है।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी समझाया कि साइबर ठगी के मामलों में संबंधित बैंक और दूसरी एजेंसियों से किस तरह संपर्क किया जाता है। ठगी की रकम को रोकने और पीड़ितों को धनराशि वापस दिलाने के लिए पुलिस किस प्रक्रिया के तहत काम करती है, इसकी जानकारी भी छात्राओं को दी गई।
मोनिका और रागिनी को डिजिटल साक्ष्यों के महत्व के बारे में बताया गया। उन्हें समझाया गया कि शिकायतों की जांच में डिजिटल साक्ष्य किस तरह मददगार होते हैं और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस किन प्रक्रियाओं को अपनाती है। इस अनुभव के जरिए छात्राओं ने पुलिस की जिम्मेदारियों और पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार की जरूरत को समझा।
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों से बचाव के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। छात्राओं को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी, फर्जी APK फाइल, अनजान लिंक, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया गया।
उन्हें बताया गया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक खाते की जानकारी, PIN या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने अनजान लिंक पर क्लिक करने और संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए डराकर पैसे मांगना साइबर ठगी का एक तरीका हो सकता है। ऐसे मामलों में लोगों को सतर्क रहने और अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देने की जरूरत है।
छात्राओं को यह भी बताया गया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर भी साइबर अपराध की रिपोर्ट करने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान हाथरस साइबर क्राइम पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े दो मामलों में कुल 61,040 रुपये की धनराशि वापस कराने में सफलता हासिल की। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेश के 46,000 रुपये वापस कराए गए। वहीं, निर्मला के परिजन के 15,040 रुपये भी वापस कराए गए।
साइबर ठगी की रकम वापस मिलने से दोनों पीड़ित पक्षों को आर्थिक राहत मिली। उन्होंने हाथरस पुलिस और साइबर क्राइम थाना की टीम के प्रति आभार जताया। पीड़ित पक्षों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना भी की।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी होने के बाद तुरंत शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है। समय रहते सूचना मिलने पर ठगी की रकम को रोकने और उसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से पुलिस ने लोगों से साइबर अपराध की जानकारी मिलने या उसका शिकार होने पर बिना देरी किए शिकायत करने को कहा।
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत हाथरस पुलिस महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रही है। छात्राओं को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना भी इसी अभियान का हिस्सा है।
इस पहल के जरिए छात्राओं को कानून, पुलिस की कार्यप्रणाली और नेतृत्व क्षमता से परिचित होने का मौका मिला। उन्होंने जनसुनवाई की प्रक्रिया को समझा और यह जाना कि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर पुलिस किस तरह कार्रवाई करती है।
कार्यक्रम से छात्राओं को पुलिस की जिम्मेदारियों को समझने के साथ-साथ साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी अवसर मिला। उन्हें पीड़ितों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान में पुलिस की भूमिका के बारे में जानकारी मिली।
हाथरस पुलिस ने मिशन शक्ति अभियान के जरिए महिला सशक्तिकरण, साइबर जागरूकता और जनविश्वास को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पुलिस के मुताबिक, ऐसी पहल से बालिकाओं को जिम्मेदारियों को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और पुलिस व्यवस्था को करीब से जानने का अवसर मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में एक दिन के लिए साइबर थाना प्रभारी किसे बनाया गया?
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं मोनिका और रागिनी को एक दिन के लिए साइबर थाना प्रभारी बनाया गया।
मोनिका और रागिनी ने साइबर थाने में क्या काम किया?
उन्होंने साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतें सुनीं और पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।
छात्राओं को एक दिन की थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य छात्राओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और फैसला लेने की क्षमता बढ़ाना था।
साइबर ठगी की शिकायत कहां की जा सकती है?
साइबर ठगी की शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1930 और आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर की जा सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी?
पुलिस ने OTP, बैंक खाते की जानकारी, PIN या पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करने और अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी।
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