हाथरस में ओवरलोडिंग कार्रवाई पर विवाद, चालकों ने रिश्वत मांगने के आरोप लगाए
हाथरस में ओवरलोडिंग के खिलाफ परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर रविवार को विवाद खड़ा हो गया।
हाथरस में ओवरलोडिंग के खिलाफ परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर रविवार को विवाद खड़ा हो गया। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी यानी एआरटीओ कार्यालय पहुंचे किसानों और वाहन चालकों ने विभागीय टीम पर मनमानी कार्रवाई करने के आरोप लगाए। चालकों का कहना है कि ओवरलोडिंग के मामलों में अगर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाती है तो उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन वैध ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र होने के बावजूद लाइसेंस और फिटनेस से जुड़े चालान किए गए, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
वाहन चालकों और किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि चालान से बचने के लिए उनसे कथित तौर पर पैसे मांगे गए। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, अलग-अलग वाहनों पर 31,500 रुपये से लेकर 47,250 रुपये तक के चालान किए गए हैं। सामने आए मामलों में चालानों की कुल बताई गई रकम एक लाख रुपये से अधिक है। शिकायतकर्ताओं ने कार्रवाई के आधार और कथित तौर पर पैसे मांगने वालों की भूमिका की जांच की मांग की है।
वाहन चालक सौरभ कुमार ने बताया कि वह हाथरस जंक्शन से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सरकारी पंजीरी लेकर जा रहे थे। रास्ते में परिवहन विभाग की टीम ने ओवरलोडिंग का हवाला देते हुए उनका वाहन रोक लिया। सौरभ कुमार का आरोप है कि उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था, इसके बावजूद लाइसेंस से संबंधित चालान भी कर दिया गया।
सौरभ कुमार ने दावा किया कि टीम के साथ मौजूद एक सिपाही ने उनसे 25 हजार रुपये मांगे थे। उनका कहना है कि बाद में उनके वाहन का 33 हजार रुपये का चालान कर दिया गया। सौरभ कुमार के आरोपों के मुताबिक, वाहन को रोकने और चालान की कार्रवाई के दौरान ओवरलोडिंग के साथ लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई भी की गई।
चालक सचिन कुमार ने बताया कि उनकी गाड़ी ओवरलोड थी। उनके मुताबिक, विभागीय टीम ने वाहन को कांटे पर ले जाकर वजन भी कराया था। सचिन कुमार का कहना है कि इस दौरान टीम के साथ गए एक व्यक्ति ने 25 हजार रुपये में मामला निपटाने की बात कही।
सचिन कुमार के मुताबिक, उन्होंने पैसे देने में असमर्थता जताई। इसके बाद वाहन को कार्यालय लाया गया और 33 हजार रुपये का चालान कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होने के बावजूद लाइसेंस से संबंधित पांच हजार रुपये का चालान किया गया। सचिन कुमार का सवाल है कि जब लाइसेंस वैध था, तो उससे जुड़ा चालान किस आधार पर किया गया।
धान लेकर जा रहे वाहन चालक सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उनकी गाड़ी में करीब 160 क्विंटल धान लदा हुआ था। सत्येंद्र सिंह ने ओवरलोडिंग स्वीकार करते हुए कहा कि वह नियमानुसार जुर्माना भरने के लिए तैयार थे। हालांकि, उनका आरोप है कि वाहन की फिटनेस एक वर्ष तक वैध होने के बावजूद पांच हजार रुपये का अतिरिक्त चालान कर दिया गया।
सत्येंद्र सिंह के अनुसार, उनका वाहन शनिवार शाम से खड़ा है। चालान जमा कराकर गाड़ी छुड़ाने में उन्हें परेशानी हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर धान खराब हो गया तो किसान को करीब चार लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है। सत्येंद्र सिंह ने यह रकम अपने अनुमान के तौर पर बताई है।
इस मामले में बुलंदशहर निवासी चालक खालिद ने भी विभागीय कार्रवाई को लेकर शिकायत की। खालिद ने बताया कि वह कैलौरा से आगरा सरिया लेकर जा रहे थे। ओवरलोडिंग के आरोप में उनके वाहन का 47,250 रुपये का चालान किया गया।
खालिद का कहना है कि उनके पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस था। इसके बावजूद लाइसेंस से संबंधित चालान भी कर दिया गया। उन्होंने विभागीय टीम के साथ मौजूद एक कर्मचारी पर 30 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया। खालिद के मुताबिक, ओवरलोडिंग के मामले में कार्रवाई के साथ लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई भी की गई, जबकि उनका लाइसेंस वैध था।
वहीं, किसान पंकज कुमार ने भी 31,500 रुपये का चालान किए जाने की शिकायत की। पंकज कुमार का आरोप है कि उन्हें लाइसेंस दिखाने का अवसर दिए बिना ही कार्रवाई कर दी गई। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले उनके दस्तावेज देखने का मौका नहीं दिया गया।
वाहन चालकों और किसानों की शिकायतों के बाद चालानों की वास्तविक स्थिति और कार्रवाई के आधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अगर उनके ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र वैध थे, तो लाइसेंस और फिटनेस से संबंधित चालान किस आधार पर किए गए। उनका यह भी कहना है कि ओवरलोडिंग के लिए नियमानुसार जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन दूसरे दस्तावेजों को लेकर की गई कार्रवाई की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने कथित तौर पर पैसे मांगने वाले लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच की मांग भी की है। सौरभ कुमार ने एक सिपाही पर 25 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। सचिन कुमार ने टीम के साथ गए एक व्यक्ति पर 25 हजार रुपये में मामला निपटाने की बात कहने का आरोप लगाया। वहीं, खालिद ने टीम के साथ मौजूद एक कर्मचारी पर 30 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले में चालान की प्रतियों, वाहनों के दस्तावेजों और विभागीय कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अलग-अलग वाहनों पर किए गए 31,500 रुपये, 33 हजार रुपये, 47,250 रुपये और पांच हजार रुपये के चालान किस आधार पर किए गए थे। इससे यह भी सामने आ सकेगा कि लाइसेंस और फिटनेस से संबंधित चालान नियमों के मुताबिक किए गए या किसी स्तर पर अनियमितता हुई।
एआरटीओ लक्ष्मण प्रसाद ने वाहन चालकों और किसानों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई है। एआरटीओ ने कथित तौर पर पैसे मांगने और वैध दस्तावेज होने के बावजूद गलत चालान किए जाने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
फिलहाल, रिश्वत मांगने और वैध दस्तावेज होने के बावजूद गलत चालान किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एक तरफ वाहन चालक और किसान चालानों, लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं एआरटीओ लक्ष्मण प्रसाद कार्रवाई को नियमों के मुताबिक बता रहे हैं। अब चालान की वास्तविक स्थिति, संबंधित दस्तावेजों और शिकायतकर्ताओं के आरोपों की जांच के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में विवाद किस बात को लेकर हुआ?
ओवरलोडिंग के खिलाफ परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ। वाहन चालकों और किसानों ने मनमानी कार्रवाई और कथित तौर पर पैसे मांगने के आरोप लगाए।
चालकों और किसानों ने क्या आरोप लगाए?
उनका आरोप है कि वैध ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र होने के बावजूद लाइसेंस और फिटनेस से जुड़े चालान किए गए और चालान से बचने के लिए पैसे मांगे गए।
वाहनों पर कितने रुपये तक के चालान किए गए?
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, अलग-अलग वाहनों पर 31,500 रुपये से 47,250 रुपये तक के चालान किए गए।
सौरभ कुमार ने क्या आरोप लगाया?
सौरभ कुमार का आरोप है कि वैध लाइसेंस होने के बावजूद उनका लाइसेंस से जुड़ा चालान किया गया और एक सिपाही ने उनसे 25 हजार रुपये मांगे। बाद में उनके वाहन का 33 हजार रुपये का चालान हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने क्या मांग की है?
उन्होंने कार्रवाई के आधार और कथित तौर पर पैसे मांगने वालों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
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