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भाई को बचाने 8 किमी दौड़ा सौरभ, ₹800 में क्रेन बुलाई

ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में अपने भाई और बहन को बचाने के लिए सौरभ ने आखिरी वक्त तक कोशिश की। हादसे के दौरान उसने अपनी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा देखा।

भाई को बचाने 8 किमी दौड़ा सौरभ, ₹800 में क्रेन बुलाई
Image credit: News Darpan Team

ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में अपने भाई और बहन को बचाने के लिए सौरभ ने आखिरी वक्त तक कोशिश की। हादसे के दौरान उसने अपनी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा देखा। अपनों को इस हालत में देखकर सौरभ बदहवास हो गया।

उसे जब अपना भाई दिखाई नहीं दिया, तो वह उसकी तलाश और मदद जुटाने के लिए करीब 8 किलोमीटर तक दौड़ता रहा। सौरभ के सामने एक तरफ बहन की तकलीफ थी और दूसरी तरफ भाई को ढूंढकर बचाने की बेचैनी। वह किसी भी तरह अपने अपनों को बचाना चाहता था।

सौरभ के मुताबिक, भाई को बचाने की उम्मीद में उसने ₹800 देकर क्रेन का इंतजाम किया। उसे लगा कि अगर समय रहते क्रेन पहुंच जाए और भाई को बाहर निकाल लिया जाए, तो शायद उसकी जान बच सकेगी। इसी उम्मीद में उसने मदद जुटाई और बचाव की कोशिश जारी रखी।

लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सौरभ अपने भाई को नहीं बचा सका। अपनों को बचाने की उसकी कोशिश नाकाम रही। हादसे के बीच बहन का पैर ट्रक के नीचे दबा देखना, फिर भाई के दिखाई नहीं देने पर करीब 8 किलोमीटर तक दौड़ना और ₹800 देकर क्रेन बुलाना, यह पूरा घटनाक्रम हादसे के दर्दनाक पहलू को सामने लाता है।

एक तरफ बहन की तकलीफ और दूसरी तरफ भाई को तलाशने की बेचैनी ने सौरभ को बुरी तरह झकझोर दिया। वह आखिरी उम्मीद तक हार नहीं मानना चाहता था। हालांकि उसकी कोशिशें उसके भाई की जान नहीं बचा सकीं, लेकिन अपनों के लिए उसकी जद्दोजहद की यह कहानी हर किसी को भावुक कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरभ अपने भाई को बचाने के लिए कितनी दूर दौड़ा?

सौरभ अपने भाई को ढूंढने और मदद जुटाने के लिए करीब 8 किलोमीटर दौड़ा।

सौरभ ने क्रेन क्यों बुलाई?

सौरभ ने भाई को बाहर निकालकर उसकी जान बचाने की उम्मीद में क्रेन बुलाई।

क्रेन बुलाने में सौरभ के कितने रुपये खर्च हुए?

सौरभ ने क्रेन बुलाने के लिए ₹800 दिए।

क्या सौरभ अपने भाई को बचा सका?

नहीं, तमाम कोशिशों के बावजूद सौरभ अपने भाई को नहीं बचा सका।

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