तन्वी की मौत, AIIMS पर सर्जरी में दो साल की देरी का आरोप
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की 1 सितंबर 2026 को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में मौत हो गई।
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की 1 सितंबर 2026 को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में मौत हो गई। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तन्वी लगभग 13-14 साल से AIIMS के चक्कर काट रही थी।
तन्वी के पिता मुकेश परियानी का आरोप है कि 2014 में पैसे और खून जमा कराने के बावजूद सर्जरी कभी नहीं हुई और बार-बार तारीखें टाली जाती रहीं।
तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जटिल जन्मजात हृदय दोष था, जिसमें हृदय से फेफड़ों तक रक्त का सामान्य प्रवाह बाधित या गायब रहता है।
परिवार ने उसे पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS दिल्ली के OPD में लाया था, जब वह लगभग 2 साल की थी। जांचों के बाद 2013 में विस्तृत मूल्यांकन हुआ जिसमें CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन शामिल था।
31 जनवरी 2014 के AIIMS दस्तावेज में "यूनिफोकलाइजेशन एंड कंड्यूट" सर्जरी की सिफारिश की गई थी। इसका अनुमानित खर्च लगभग 1.20-1.25 लाख रुपये था और चार ब्लड डोनर्स का जिक्र किया गया था।
पिता मुकेश परियानी के मुताबिक, डॉ. सचिन तलवार (CTVS विभाग) ने उन्हें पैसे और खून जमा करने को कहा और आश्वासन दिया कि ऑपरेशन हो जाएगा। 4 अप्रैल 2014 को उन्होंने खून और पैसे जमा कर दिए।
इसके बाद OPD विजिट पर ऑपरेशन की तारीख दी गई। 2 सितंबर 2015 को जब वे गए तो बताया गया कि दिवाली के बाद ऑपरेशन होगा। परिवार का कहना है कि बाद में तारीखें टाली जाती रहीं: कभी बेड उपलब्ध न होने, कभी अन्य वजह बताकर।
जनवरी 2016 के बाद बार-बार कहा जाता रहा कि अभी ऑपरेशन नहीं होगा, बाद में आना। परिवार ने 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद अस्पताल से कॉल आया, लेकिन परिवार के मुताबिक बाद में ऑपरेशन से इनकार कर दिया गया या टाला गया।
2018 में दोबारा जांचें हुईं। पिता का आरोप है कि सालों तक सिर्फ जांचें होती रहीं, सर्जरी नहीं। 2025 में फिर शिकायत की गई। जुलाई 2025 में बुलावा आया लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर थे। दवा लिखकर भेज दिया गया।
फरवरी 2026 में फिर शिकायत दर्ज कराई कि टेस्ट चल रहे हैं लेकिन ऑपरेशन नहीं हो रहा।
24 अगस्त 2026 को तन्वी की हालत बिगड़ने पर उसे AIIMS में भर्ती किया गया। हृदय-फेफड़ा प्रत्यारोपण (heart-lung transplant) की संभावना का मूल्यांकन चल रहा था। 31 अगस्त को एंडोस्कोपी हुई।
1 सितंबर सुबह लगभग 2:50 बजे थकान और कमजोरी की शिकायत के बाद ऑक्सीजन सैचुरेशन 48 फीसदी तक गिर गया। हाइपोक्सिक स्पेल के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ। कोशिश के बावजूद 5:06 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
पिता ने भावुक होकर कहा: "वे बस टेस्ट करते रहे, लेकिन ऑपरेशन कभी नहीं हुआ। मेरी बच्ची चली गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अगर 2015, 2016 या 2017 में ऑपरेशन हो जाता तो शायद वह ठीक हो जाती। मुझे जांच और सख्त कार्रवाई चाहिए।"
मां भविका परियानी ने भी लापरवाही का आरोप लगाया और न्याय की मांग की।
AIIMS ने मामले की जांच के लिए आंतरिक समिति बनाई है, जो नैदानिक रिकॉर्ड, जांचें, इलाज, विशेषज्ञ राय और मौत की परिस्थितियों की समीक्षा करेगी।
अस्पताल का कहना है कि 2013 में सर्जरी के लिए मूल्यांकन हुआ था, लेकिन 2017-2018 में हृदय की जटिल एनाटॉमी (प्रमुख रक्त वाहिकाओं की गैरमौजूदगी आदि) के कारण सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं मानी गई। इसके बाद चिकित्सा प्रबंधन (medications) और नियमित फॉलो-अप पर रखा गया।
परिवार ने दूसरी राय भी ली, जहां भी मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी गई। अंतिम भर्ती में ट्रांसप्लांट मूल्यांकन चल रहा था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तन्वी को क्या बीमारी थी?
तन्वी को जन्मजात हृदय रोग था, वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया। इस बीमारी में हृदय से फेफड़ों तक रक्त का सामान्य प्रवाह बाधित या गायब रहता है।
तन्वी के पिता AIIMS पर क्या आरोप लगाते हैं?
पिता मुकेश परियानी का कहना है कि 2014 में पैसे और खून जमा करने के बाद भी सर्जरी कभी नहीं हुई। तारीखें बार-बार टाली जाती रहीं: कभी बेड न होने के बहाने, कभी और वजहें बताकर। सालों तक सिर्फ जांचें होती रहीं, ऑपरेशन नहीं।
तन्वी की मौत कब हुई और क्यों?
तन्वी की मौत 1 सितंबर 2026 को AIIMS दिल्ली में हुई। 24 अगस्त को उसकी हालत बिगड़ी और भर्ती किया गया। 1 सितंबर सुबह ऑक्सीजन सैचुरेशन 48 फीसदी तक गिर गया, हृदय गति रुक गई और 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।
परिवार ने किस तरह मदद मांगी?
परिवार ने 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई। फिर 2025 और फरवरी 2026 में दोबारा शिकायत की। माता-पिता ने कहा कि अगर 2015, 2016 या 2017 में ऑपरेशन हो जाता तो तन्वी बच सकती थी।
AIIMS क्या कहता है?
AIIMS का कहना है कि 2013 में सर्जरी के लिए मूल्यांकन हुआ था, लेकिन 2017-2018 में हृदय की जटिल एनाटॉमी के कारण सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं मानी गई। अस्पताल ने मामले की जांच के लिए एक आंतरिक समिति बनाई है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
बहराइच में महिला की अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल कर पांच लाख रुपये वसूलने वाला …
- 2
भाजपा ने निष्कासित नेता की सपा एंट्री पर अखिलेश यादव को घेरा
- 3
गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले बहराइच में डीएम-एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
- 4
बहराइच: भावुक सुसाइड नोट लिखकर की युवक ने की आत्महत्या
- 5
थाना रुपईडीहा क्षेत्र में शातिर अपराधियों से हुई रूपईडीहा पुलिस की मुठभेड़।
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।