जर्मन राष्ट्रपति स्टाइनमायर की चीन यात्रा की तैयारी, व्यापार पर बर्लिन सख्त
जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर 2018 के बाद पहली बार चीन जाएंगे। व्यापार तनाव के बीच बर्लिन का रुख और सख्त हुआ है।
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर आने वाले हफ्तों में चीन की यात्रा की योजना बना रहे हैं। इस व्यवस्था से वाकिफ कई सूत्रों ने यह जानकारी दी है। यह यात्रा ऐसे समय होगी, जब व्यापार को लेकर जर्मनी और चीन के रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं।
प्रस्तावित यात्रा उस समय होगी, जब बर्लिन चीन को लेकर अपना रुख और सख्त कर रहा है। इसी दौरान चांसलर फ्रेडरिक मर्ज एशिया के दौरे की तैयारी भी कर रहे हैं।
2018 के बाद स्टाइनमायर की पहली यात्रा
यह यात्रा 2018 के बाद चीन की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी। स्टाइनमायर पहले विदेश मंत्री रह चुके हैं। राष्ट्रपति के तौर पर उनका दस साल का कार्यकाल मार्च 2027 में खत्म होगा।
उम्मीद है कि यह यात्रा अक्टूबर खत्म होने से पहले मर्ज की जापान और दक्षिण कोरिया यात्राओं के साथ ही होगी। इस समय-निर्धारण से स्टाइनमायर की चीन से जुड़ी बातचीत और चांसलर की एशिया में चल रही अलग कोशिशें एक ही समय पर सामने आएंगी। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब जर्मनी व्यापार से जुड़ी लगातार बढ़ती मुश्किल चिंताओं को संभाल रहा है।
जर्मनी के राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। वहीं, राजनीतिक ताकत मुख्य रूप से चांसलर और सरकार के पास होती है। इसलिए स्टाइनमायर की भूमिका काफी हद तक औपचारिक है। हालांकि, वह विदेशों में जर्मनी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
व्यापार तनाव के बीच रिश्तों पर नजर
इस यात्रा पर चीन और जर्मनी के रिश्तों में आगे और दरार आने के संकेतों के लिए करीबी नजर रखी जाएगी। हाल के हफ्तों में बर्लिन ने व्यापार के मामले में चीन को लेकर अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। अब वह पहले से ज्यादा सख्त रवैया अपना रहा है।
यह बदलाव इस डर की वजह से हो रहा है कि चीन से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा जर्मनी के मैन्युफैक्चरिंग के गढ़ों को खोखला कर देगी। इसी चिंता के कारण राष्ट्रपति की यात्रा का महत्व उसके काफी हद तक औपचारिक स्वरूप से आगे बढ़ जाता है। खासकर ऐसे समय में, जब व्यापार को लेकर जर्मनी का रुख और कड़ा हो रहा है।
सोमवार को साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसे दस्तावेज पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें नए व्यापारिक हथियार की मांग की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चीन या ऐसे दूसरे व्यापारिक साझेदारों को लगभग तुरंत यूरोपीय संघ के विशाल एकल बाजार से बाहर किया जा सकता है, जिन्हें नियमों का उल्लंघन करने वाला माना जाए।
इसलिए यह प्रस्तावित यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब बर्लिन और पेरिस नियम तोड़ने वाले व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ यूरोप की ओर से ज्यादा मजबूत प्रतिक्रिया की मांग कर रहे हैं। वहीं, स्टाइनमायर चीन में जर्मनी का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर चीन की यात्रा कब कर सकते हैं?
स्टाइनमायर आने वाले हफ्तों में चीन की यात्रा की योजना बना रहे हैं। उम्मीद है कि यह यात्रा अक्टूबर खत्म होने से पहले होगी।
स्टाइनमायर की चीन यात्रा क्यों अहम मानी जा रही है?
यह 2018 के बाद चीन की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी और ऐसे समय हो रही है, जब जर्मनी-चीन के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है।
चीन को लेकर जर्मनी का रुख कैसा हो गया है?
जर्मनी चीन के साथ व्यापार के मामले में पहले से ज्यादा सख्त रवैया अपना रहा है। उसे डर है कि चीन की कड़ी प्रतिस्पर्धा से उसके मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो सकता है।
जर्मनी के राष्ट्रपति की भूमिका क्या होती है?
जर्मनी के राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, लेकिन राजनीतिक ताकत मुख्य रूप से चांसलर और सरकार के पास होती है। राष्ट्रपति विदेशों में जर्मनी का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।