SIR के बाद जांच के लिए LAFC ने पूर्व जजों का पैनल बनाया
LAFC ने SIR की संवैधानिक वैधता, प्रक्रिया और मतदाताओं पर असर की जांच के लिए पूर्व जजों का पांच सदस्यीय स्वतंत्र पैनल बनाया।
प्रस्तावित समीक्षा में यह देखा जाएगा कि चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR संवैधानिक और कानून के हिसाब से वैध थी या नहीं। इसके साथ ही इसकी कार्यप्रणाली और पात्र मतदाताओं पर पड़े इसके कुल असर की भी जांच की जाएगी। इस पैनल का ऐलान नागरिकों की ओर से इस पूरी प्रक्रिया के डिजाइन, इसे लागू करने के तरीके और इसके नतीजों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच किया गया है।
पांच सदस्यों वाला पैनल घोषित
लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन यानी LAFC ने कहा कि इस स्वतंत्र पैनल में पांच सदस्य होंगे। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर करेंगे। पैनल में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस ए.के. पटनायक और जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बदर दुरेज अहमद भी शामिल होंगे। हाई कोर्ट की पूर्व जज रेखा शर्मा और अंजना प्रकाश भी इस पैनल में काम करेंगी।
एसोसिएशन ने शुक्रवार (2 अक्टूबर, 2026) को एक बयान जारी कर यह ऐलान किया। यह बयान LAFC के मीडिया कोऑर्डिनेटर और वकील सुभाष चंद्रन के जरिए जारी किया गया।
पैनल को दिए गए काम के दायरे में कानूनी जांच के साथ-साथ यह आकलन करना भी शामिल है कि SIR की पूरी प्रक्रिया किस तरह चलाई गई और पात्र मतदाताओं पर इसका व्यापक असर क्या रहा। पैनल देशभर में सार्वजनिक सुनवाई करेगा। इसके अलावा, तथ्यों पर आधारित रिसर्च और जमीनी रिसर्च की जाएगी। संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं की कानूनी जांच भी की जाएगी।
रिपोर्ट दिसंबर तक लाने का लक्ष्य
एसोसिएशन के बयान के मुताबिक, पैनल दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखता है। प्रस्तावित सार्वजनिक सुनवाई और जमीनी रिसर्च से पैनल को कानूनी ढांचे की समीक्षा के साथ-साथ इस पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र आकलन करने में मदद मिलेगी।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, सी.यू. सिंह, वृंदा ग्रोवर, राजू रामचंद्रन, प्रशांत भूषण, परिषद फरासत, रेबेका मैमन जॉन और प्रशांतो चंद्र सेन पैनल को रणनीतिक कानूनी सलाह देंगे। एसोसिएशन के ऐलान से साफ है कि इस जांच का फोकस SIR की वैधता, इसके तरीके और इसके असर पर रहेगा। यह जांच सिर्फ संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं होगी।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SIR के बाद जांच के लिए पैनल किसने बनाया है?
लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन यानी LAFC ने SIR के बाद की स्थिति की जांच के लिए पूर्व जजों का स्वतंत्र पैनल बनाया है।
SIR जांच पैनल में कितने सदस्य हैं और इसकी अध्यक्षता कौन कर रहे हैं?
इस पैनल में पांच सदस्य हैं और इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर कर रहे हैं।
पैनल SIR में किन बातों की जांच करेगा?
पैनल SIR की कानूनी वैधता, इसकी कार्यप्रणाली और पात्र मतदाताओं पर पड़े इसके असर की जांच करेगा।
पैनल अपनी रिपोर्ट कब तक लाने का लक्ष्य रखता है?
पैनल दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखता है।
SIR जांच के लिए पैनल क्या तरीके अपनाएगा?
पैनल देशभर में सार्वजनिक सुनवाई, तथ्यों पर आधारित रिसर्च और जमीनी रिसर्च करेगा।
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