दिग्विजय सिंह बोले, कमलनाथ-सिंधिया के ‘अहंकार’ टकराव से गिरी कमलनाथ सरकार
मध्य प्रदेश की राजनीति में मार्च 2020 में हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में मार्च 2020 में हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है। एक निजी अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कमलनाथ सरकार गिरने के पीछे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच ‘अहंकार’ के टकराव, पदों को लेकर खींचतान और आपसी अविश्वास को प्रमुख वजह बताया।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों ने कांग्रेस सरकार की नींव कमजोर कर दी थी। मुख्यमंत्री की कुर्सी से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगले और अफसरों के तबादलों तक, दोनों नेताओं के बीच अलग-अलग मुद्दों पर खींचतान चलती रही। इसी बढ़ते टकराव का नतीजा आखिरकार सत्ता परिवर्तन के रूप में सामने आया।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। हालांकि, कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद कमलनाथ ने सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सिंधिया इसके लिए तैयार नहीं हुए।
दिग्विजय सिंह के अनुसार, सिंधिया अपने समर्थकों को सरकार और संगठन में बड़े पद दिलाना चाहते थे। इसी वजह से पदों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते चले गए। मुख्यमंत्री पद को लेकर बनी असहमति के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बन सकी।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच विवाद केवल मध्य प्रदेश की सरकार और कांग्रेस संगठन तक सीमित नहीं था। दिल्ली स्थित सरकारी बंगले को लेकर भी उनके बीच खींचतान हुई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बने विवाद ने दोनों नेताओं के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा किया।
मध्य प्रदेश की सत्ता और संगठन से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों के साथ-साथ दिल्ली के सरकारी बंगले को लेकर हुई खींचतान ने भी रिश्तों में तल्खी बढ़ाई। दिग्विजय सिंह के बयान के मुताबिक, अलग-अलग मुद्दों पर लगातार बनी असहमति ने दोनों नेताओं के बीच दूरी को कम करने के बजाय और बढ़ाया।
ग्वालियर-चंबल संभाग में कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के तबादलों को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच खींचतान बढ़ने की बात सामने आई। अधिकारियों की नियुक्तियों और तबादलों को लेकर राजनीतिक प्रभाव की लड़ाई ने सरकार के भीतर चल रहे मतभेदों को और उजागर किया।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों की पोस्टिंग और तबादलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन रही थी। इससे सरकार के कामकाज और नेतृत्व के बीच तालमेल प्रभावित हुआ। लगातार बढ़ती खींचतान ने सरकार के भीतर मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया।
मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच नेतृत्व, पदों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद बने रहे। दिग्विजय सिंह ने इन्हीं मतभेदों और आपसी अविश्वास को सरकार गिरने की अहम वजहों में शामिल बताया है।
मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफों से कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई। सरकार के सामने बहुमत बनाए रखने का संकट खड़ा हो गया और मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन गई।
20 मार्च 2020 को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। इस तरह 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी कांग्रेस सरकार मार्च 2020 में गिर गई।
दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के उस सियासी घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है, जिसने राज्य की सत्ता का समीकरण बदल दिया था। उनके मुताबिक, नेतृत्व की महत्वाकांक्षा, पदों को लेकर मतभेद और कमलनाथ तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बढ़ता अविश्वास इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की अहम कड़ियां थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिग्विजय सिंह के मुताबिक कमलनाथ सरकार क्यों गिरी?
दिग्विजय सिंह के मुताबिक कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अहंकार का टकराव, पदों को लेकर खींचतान और आपसी अविश्वास सरकार गिरने की बड़ी वजह थे।
कमलनाथ और सिंधिया के बीच किन मुद्दों पर मतभेद थे?
दोनों नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद, सरकारी बंगले, अफसरों के तबादलों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद थे।
सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने के बाद क्या हुआ?
मार्च 2020 में सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफों से कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई।
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा दिया?
कमलनाथ ने 20 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी।
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