मध्य प्रदेश में आदिवासी फोकस के लिए 90 सीटें क्लस्टर करेगी कांग्रेस
मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने आदिवासी बहुल इलाकों पर अपना फोकस बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने आदिवासी बहुल इलाकों पर अपना फोकस बढ़ाने की रणनीति बनाई है। पार्टी प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों को क्लस्टर में बांटकर संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत कांग्रेस आदिवासी बस्तियों तक पहुंचेगी और बीजेपी को घेरने के लिए गांव-गांव अभियान चलाएगी।
कांग्रेस की इस योजना में अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग के लिए आरक्षित 47 विधानसभा सीटों के साथ 43 अन्य आदिवासी बहुल सीटों को भी शामिल किया गया है। इन 43 क्षेत्रों में आदिवासी आबादी का प्रभाव महत्वपूर्ण है। पार्टी का फोकस सिर्फ आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन विधानसभा क्षेत्रों में भी संगठन को मजबूत किया जाएगा जहां आदिवासी मतदाताओं की भूमिका अहम है।
कांग्रेस की रणनीति का मकसद आदिवासी बस्तियों तक संगठन की पहुंच बढ़ाना, स्थानीय समस्याओं को समझना और जल, जंगल, जमीन से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गांवों में ग्राम चौपाल आयोजित की जाएंगी और अलग-अलग स्तरों पर कार्यशालाएं भी की जाएंगी।
पार्टी की योजना के मुताबिक, विधानसभा क्षेत्रों में फैली बिखरी हुई आदिवासी बसाहटों को आपस में जोड़कर क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। हर क्लस्टर में संबंधित क्षेत्र की मंडलम, सेक्टर और बूथ समितियों के सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इन संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय करते हुए स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की गतिविधियों को गति देने की कोशिश होगी।
क्लस्टर से जुड़े कार्यकर्ताओं को पार्टी पदाधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की योजना है। प्रशिक्षण के दौरान आदिवासी समुदाय से जुड़े अधिकारों, जल-जंगल-जमीन के सवालों और क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस का उद्देश्य है कि कार्यकर्ता इन मुद्दों पर तथ्यों के साथ पार्टी का पक्ष रख सकें। इसके साथ ही वे आदिवासी समुदाय के लोगों से सीधे संवाद कर सकें और स्थानीय समस्याओं को संगठन तक पहुंचा सकें। पार्टी की कार्ययोजना में संगठन को सिर्फ चुनावी समय तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय मुद्दों से लगातार जोड़ने पर जोर दिया गया है।
इस अभियान के तहत गांवों में चौपाल और विभिन्न स्तरों पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में आदिवासी समुदाय की समस्याओं, स्थानीय जरूरतों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों से सीधे जुड़ने और क्षेत्र से जुड़ी जानकारी जुटाने की तैयारी कर रही है।
हर क्लस्टर के लिए एक प्रमुख नियुक्त किया जाएगा। यह प्रमुख अपने क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों और अभियान की प्रगति की रिपोर्ट सीधे प्रदेश कांग्रेस को देगा। इस व्यवस्था के जरिए पार्टी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की स्थिति का नियमित फीडबैक ले सकेगी।
क्लस्टर प्रमुखों की जिम्मेदारी के जरिए अभियान की निगरानी भी की जाएगी। पार्टी को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस क्षेत्र में संगठन सक्रिय है, कहां कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है और किन इलाकों में स्थानीय समस्याओं पर अधिक बातचीत की जरूरत है। हालांकि, इस कार्ययोजना को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं की होगी।
कांग्रेस विधानसभा में अलग-अलग मुद्दों पर सरकार की ओर से दिए गए जवाबों के आधार पर एक पुस्तिका भी तैयार करेगी। पार्टी इस पुस्तिका के जरिए आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े सवालों और सरकारी दावों को तथ्यों के आधार पर जनता के सामने रखने की तैयारी कर रही है।
इस योजना के तहत विधानसभा में उठाए गए मुद्दों और सरकार की ओर से दिए गए जवाबों को भी चुनावी अभियान से जोड़ा जाएगा। कांग्रेस संगठनात्मक नेटवर्क के साथ-साथ विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल आदिवासी क्षेत्रों में अपने पक्ष को सामने रखने के लिए करना चाहती है।
यह पूरी कार्ययोजना विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में गठित समिति ने तैयार की है। समिति ने 2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करने के बाद आदिवासी बहुल सीटों पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई है।
समिति के विश्लेषण के मुताबिक, 2023 के विधानसभा चुनाव में चिह्नित 90 आदिवासी बहुल सीटों में बीजेपी ने 59, कांग्रेस ने 30 और भारत आदिवासी पार्टी ने एक सीट जीती थी। इन आंकड़ों से कांग्रेस ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी स्थिति और संगठन की पकड़ को लेकर सबक लिया है।
आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों के अलावा 38 अनारक्षित आदिवासी बहुल सीटों में बीजेपी ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस अब आरक्षित सीटों के साथ उन सामान्य सीटों पर भी संगठन मजबूत करने की तैयारी कर रही है, जहां आदिवासी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस की रणनीति में बूथ स्तर पर सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व की भागीदारी और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद को प्राथमिकता दी गई है। क्लस्टर व्यवस्था के जरिए पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी तय करेगी और अभियान की प्रगति पर नजर रखेगी।
पार्टी का फोकस जल, जंगल और जमीन जैसे मुद्दों के साथ-साथ आदिवासी अधिकारों, स्थानीय जरूरतों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी रहेगा। कार्यकर्ताओं को इन विषयों पर जानकारी दी जाएगी, ताकि वे जनता के सामने कांग्रेस का पक्ष तथ्यों के साथ रख सकें।
अब कांग्रेस के सामने इस कार्ययोजना को जमीन पर उतारने की चुनौती है। 90 विधानसभा सीटों पर बनाए जाने वाले क्लस्टर कितने प्रभावी ढंग से काम करते हैं और स्थानीय मुद्दों पर पार्टी जनता से कितना जुड़ पाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कांग्रेस मध्य प्रदेश में कितनी विधानसभा सीटों को क्लस्टर करेगी?
कांग्रेस 90 विधानसभा सीटों को क्लस्टर में बांटकर संगठन मजबूत करेगी।
इन 90 सीटों में कौन-कौन सी सीटें शामिल हैं?
इनमें ST वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटें और 43 अन्य आदिवासी बहुल सीटें शामिल हैं।
कांग्रेस इस अभियान के तहत क्या करेगी?
कांग्रेस आदिवासी बस्तियों तक पहुंचेगी, गांवों में चौपाल और कार्यशालाएं आयोजित करेगी और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देगी।
हर क्लस्टर प्रमुख की क्या जिम्मेदारी होगी?
क्लस्टर प्रमुख अपने क्षेत्र की गतिविधियों और अभियान की प्रगति की रिपोर्ट सीधे प्रदेश कांग्रेस को देगा।
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