चीन को आर्कटिक समझौते पर टकराव वाले रुख से थिंक टैंक की चेतावनी
चीनी थिंक टैंक ने अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड सुरक्षा समझौते पर बीजिंग को नपा-तुला रुख अपनाने की सलाह दी है।
आर्कटिक में ‘टकराव वाला रुख’ चीन के लिए क्यों मददगार नहीं होगा
एक चीनी थिंक टैंक ने बीजिंग को अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते पर टकराव वाला रुख अपनाने से चेताया है। थिंक टैंक ने कहा है कि इस तरह की प्रतिक्रिया से चीन उभरती हुई आर्कटिक व्यवस्था को लेकर होने वाली बातचीत और संपर्क से बाहर हो सकता है।
यह चेतावनी शंघाई जियाओतोंग यूनिवर्सिटी के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज (NISS) की ओर से आई है। संस्थान ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया कि इस इलाके में चीन के पास “अभी भी नीतिगत तौर पर काफी गुंजाइश” है। लेकिन रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि उस गुंजाइश को बनाए रखने में बीजिंग का रुख बहुत अहम होगा।
समझौते से क्या मंजूरी मिली
यह समझौता अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने सितंबर 22 को किया था। इसके तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में दो नए सैन्य बेस बनाने की इजाजत मिलती है।
यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड में “संवेदनशील” क्षेत्रों में होने वाले विदेशी निवेश की जांच में अमेरिका को औपचारिक भूमिका भी देता है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। समझौते के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और संसाधनों का खन शामिल हैं, लेकिन यह सूची इन्हीं क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।
चीनी थिंक टैंक ने सावधानी बरतने को क्यों कहा
NISS ने कहा कि इस बात की संभावना कम है कि अमेरिका उत्तरी ध्रुवीय इलाके को अपना “विशेष रणनीतिक पिछवाड़ा” बनाने में कामयाब होगा। संस्थान ने रूस के साथ-साथ अमेरिका के नाटो सहयोगियों का भी जिक्र किया। इनमें कनाडा और यूरोपीय देश शामिल हैं। NISS के मुताबिक, ये ताकतें इस बात पर रोक लगा सकती हैं कि “उत्तर की ओर बढ़ने वाला मुनरो सिद्धांत” कितनी दूर तक जा सकता है।
इसी आकलन के आधार पर रिपोर्ट में टकराव वाला रुख अपनाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। थिंक टैंक के मुताबिक, अगर चीन इस समझौते पर उसी तरह प्रतिक्रिया देता है, तो उसे उभरती हुई आर्कटिक व्यवस्था से जुड़ी चर्चाओं और संपर्क से बाहर किए जाने का जोखिम हो सकता है।
इसलिए रिपोर्ट इस समझौते को ऐसे घटनाक्रम के तौर पर पेश करती है, जिस पर चीन को तुरंत टकराव करने के बजाय नपा-तुला रुख अपनाने की जरूरत है। रिपोर्ट यह संभावना भी खुली छोड़ती है कि NISS की ओर से बताई गई नीतिगत गुंजाइश को देखते हुए बीजिंग इस इलाके में संपर्क और सहयोग की कोशिश जारी रख सकता है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चीनी थिंक टैंक ने बीजिंग को किस बात की चेतावनी दी है?
NISS ने बीजिंग को अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के सुरक्षा समझौते पर टकराव वाला रुख अपनाने से चेताया है।
अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समझौते में क्या मंजूर हुआ है?
समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में दो नए सैन्य बेस बनाने की इजाजत मिली है।
चीन के लिए टकराव वाला रुख नुकसानदेह क्यों हो सकता है?
इससे चीन उभरती हुई आर्कटिक व्यवस्था से जुड़ी बातचीत और संपर्क से बाहर हो सकता है।
NISS ने चीन को किस तरह का रुख अपनाने की सलाह दी है?
NISS ने चीन को तुरंत टकराव करने के बजाय नपा-तुला रुख अपनाने और संपर्क व सहयोग की कोशिश जारी रखने की सलाह दी है।
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