व्हाइट हाउस डिनर में चीनी सीईओ को नहीं मिला न्योता
शी जिनपिंग के सम्मान में हुए व्हाइट हाउस डिनर में पहुंचे चीनी बिजनेस लीडर्स को जगह नहीं मिली। वजह बातचीत और reciprocity पर मतभेद बताए गए।
शी-ट्रंप समिट में चीनी सीईओ पहुंचे। तो फिर उन्हें टेबल पर जगह क्यों नहीं मिली?
राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के सम्मान में व्हाइट हाउस के स्टेट डिनर के लिए अमेरिका की राजधानी पहुंचे चीनी बिजनेस लीडर्स को आखिर में निमंत्रण नहीं मिला, जबकि समिट के आखिरी घंटों तक उनकी भागीदारी पर चर्चा होती रही थी।
डिनर लिस्ट ने चीनी सीईओ को बाहर रखा
शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में रखे गए स्टेट डिनर के लिए अमेरिकी अरबपति पिछले गुरुवार को व्हाइट हाउस में जुटे थे।
लेकिन चीनी बिजनेस लीडर्स का एक ग्रुप, जो इस इवेंट में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन पहुंचा था, पूरी शाम किनारे ही रहा।
व्हाइट हाउस के स्टेट डिनर में कुल 134 मेहमानों में से सिर्फ 19 लोग चीनी डेलिगेशन का हिस्सा थे।
उनके निमंत्रण कभी नहीं आए, जबकि उनकी संभावित भागीदारी पर वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच कई हफ्तों तक गंभीर चर्चा होती रही थी।
उन्हें बाहर क्यों रखा गया
कई सूत्रों ने कहा कि चीनी बिजनेस लीडर्स को इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि दोनों सरकारों के बीच कम्युनिकेशन ठीक नहीं था।
उन्हीं सूत्रों ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच reciprocity को लेकर अलग-अलग राय थी।
कई सूत्रों के मुताबिक, एक और वजह यह थी कि अमेरिका में चीनी निवेश को लेकर व्हाइट हाउस का रुख साफ नहीं था।
यह बाहर रखा जाना अहम था क्योंकि ये एग्जिक्यूटिव अमेरिका की राजधानी इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि वे एक ऐसे स्टेट डिनर में शामिल होंगे, जिसमें अमेरिकी अरबपति मौजूद थे, लेकिन उन्हें कमरे के बाहर ही छोड़ दिया गया।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्हाइट हाउस डिनर में चीनी सीईओ को न्योता मिला था क्या?
नहीं। वे वॉशिंगटन पहुंचे थे, लेकिन आखिरी में उन्हें स्टेट डिनर का निमंत्रण नहीं मिला।
यह डिनर किसके सम्मान में रखा गया था?
यह स्टेट डिनर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में रखा गया था।
डिनर में कितने मेहमान थे और चीनी डेलिगेशन से कितने लोग थे?
डिनर में कुल 134 मेहमान थे। इनमें सिर्फ 19 लोग चीनी डेलिगेशन का हिस्सा थे।
चीनी बिजनेस लीडर्स को बाहर क्यों रखा गया?
सूत्रों के मुताबिक, इसकी वजह दोनों सरकारों के बीच ठीक कम्युनिकेशन न होना, reciprocity पर अलग राय और अमेरिका में चीनी निवेश पर व्हाइट हाउस का साफ रुख न होना था।
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