ट्रंप-शी समिट में अमेरिकी सैनिकों के अवशेष खोजने पर सहमति
चीन और अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में लापता अमेरिकी सैनिकों के अवशेष खोजने में सहयोग जारी रखेंगे। समिट के बाद यह बात सामने आई।
ट्रंप और शी ने द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों के लापता अवशेषों पर समझौता क्यों किया?
द्वितीय विश्व युद्ध के समय से चीन में लापता अमेरिकी सैनिकों के अवशेषों को खोजने की चीन-अमेरिका की लंबे समय से चल रही कोशिश को फिर से आगे बढ़ाया गया है। यह कदम चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई समिट के बाद सामने आया है।
क्या सहमति बनी?
यह कमिटमेंट पिछले हफ्ते शी की तीन दिन की स्टेट विजिट के नतीजों की आठ पॉइंट वाली लिस्ट में शामिल था।
इस लिस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ट्रेड जैसे मुद्दों पर हुए समझौते भी शामिल थे।
समिट के बाद चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि उनकी सेनाएं “चीन में लापता अमेरिकी सर्विस मेंबर्स के अवशेषों की खोज में सहयोग जारी रखेंगी”।
इस भाषा से यह संकेत मिलता है कि यह पूरी तरह कोई नया चैनल शुरू करने के बजाय कई दशकों से चल रही मौजूदा कोशिश को जारी रखने की बात है।
इसे समिट के नतीजों में क्यों शामिल किया गया?
समिट के दौरान शी और ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय अपने देशों के बीच रहे युद्धकालीन गठबंधन का बार-बार जिक्र किया।
यह ऐतिहासिक संदर्भ आज चीन-अमेरिका रिश्तों के बड़े हिस्से को परिभाषित करने वाली रणनीतिक होड़ से अलग तस्वीर पेश करता था।
ऑब्जर्वर्स ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में लापता अवशेषों की खोज पर सहयोग एक ऐसा व्यावहारिक क्षेत्र था, जहां दोनों पक्ष अब भी साथ काम कर सकते थे।
ऑब्जर्वर्स ने इस फिर से आगे बढ़ाई गई कोशिश को बीजिंग और वॉशिंगटन के सहयोग करने के “सबसे कम विवादित” तरीकों में से एक भी बताया।
यह क्यों अहम है?
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि यह आज के सैन्य-से-सैन्य सहयोग को द्वितीय विश्व युद्ध के उस साझा इतिहास से जोड़ता है, जिसका जिक्र दोनों नेताओं ने समिट में किया।
यह यह भी दिखाता है कि बीजिंग और वॉशिंगटन कैसे एक सीमित दायरे वाले मानवीय और ऐतिहासिक काम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ट्रेड जैसे ज्यादा विवादित या जटिल क्षेत्रों के साथ रख सकते हैं।
यह समझौता दोनों देशों के बीच मौजूद व्यापक रणनीतिक होड़ को खत्म नहीं करता, लेकिन यह एक ऐसा क्षेत्र दिखाता है जहां सहयोग अब भी मुमकिन है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ट्रंप-शी समिट में किस बात पर सहमति बनी?
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि उनकी सेनाएं चीन में लापता अमेरिकी सर्विस मेंबर्स के अवशेषों की खोज में सहयोग जारी रखेंगी।
क्या यह कोई नई पहल है?
लेख के मुताबिक, भाषा से संकेत मिलता है कि यह कोई बिल्कुल नया चैनल नहीं है, बल्कि कई दशकों से चल रही कोशिश को आगे जारी रखने की बात है।
इस मुद्दे को समिट के नतीजों में क्यों शामिल किया गया?
समिट में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय दोनों देशों के युद्धकालीन गठबंधन का जिक्र किया। इसी पृष्ठभूमि में यह सहयोग एक व्यावहारिक और कम विवादित क्षेत्र माना गया।
यह समझौता क्यों अहम माना जा रहा है?
यह आज के सैन्य सहयोग को द्वितीय विश्व युद्ध के साझा इतिहास से जोड़ता है और दिखाता है कि चीन और अमेरिका विवादों के बावजूद कुछ सीमित मानवीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर साथ काम कर सकते हैं।
क्या इससे चीन-अमेरिका की रणनीतिक होड़ खत्म हो जाएगी?
नहीं। लेख में कहा गया है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच बड़ी रणनीतिक होड़ को खत्म नहीं करता, लेकिन सहयोग की एक गुंजाइश जरूर दिखाता है।
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