चीन का 2028 तक मंगल का पूरा मैप बनाने का प्लान
चीन 2028 के अंत तक मंगल का एआई-ड्रिवन जियोलॉजिकल मैप बनाने की तैयारी में है, जिसे तियानवेन-3 मिशन से जोड़ा जा रहा है।
चीन 2028 के अंत तक मंगल की पूरी सतह को कवर करने वाला एक जियोलॉजिकल मैप पूरा करने की योजना बना रहा है। इस प्रोजेक्ट को अमेरिका के साथ उसकी बड़ी स्पेस राइवलरी का हिस्सा माना जा रहा है।
मैप को ग्लोबल रेफरेंस के तौर पर बनाने की योजना
चीन के अगले मंगल मिशन, जिसे तियानवेन-3 के नाम से जाना जाता है, के चीफ साइंटिस्ट होउ जेंगकियान ने सोमवार को कहा कि इस मैप का मकसद मंगल के जियोलॉजिकल एजेस के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड बनना होगा।
सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने रिपोर्ट किया कि यह मंगल का पहला एआई-ड्रिवन जियोलॉजिकल मैप होगा।
इस मैप को तियानवेन-3 मिशन की तैयारियों का एक अहम हिस्सा भी बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्लान किया गया यह मैप चुनिंदा इलाकों के बजाय ग्रह की पूरी सतह को कवर करेगा।
झू रोंग की खोजों को शामिल किया जाएगा
होउ ने कहा कि इस मैप में झू रोंग की खोजों को शामिल किया जाएगा। झू रोंग वह पहला रोवर है, जिसे चीन ने मंगल पर भेजा था।
इस शामिल करने से चीन के पहले के मंगल रोवर से जुड़े काम को उसके अगले मिशन, तियानवेन-3, की तैयारियों से जोड़ा जाएगा।
यह प्रोजेक्ट ऐसे समय आ रहा है, जब चीन की अमेरिका के साथ स्पेस राइवलरी में मंगल की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।
बताया गया लक्ष्य 2028 के अंत तक जियोलॉजिकल मैप को पूरा करना है।
अगर शिन्हुआ और होउ के बताए तरीके से यह पूरा होता है, तो यह मैप चीन के मंगल एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के डेटा के साथ एआई-ड्रिवन जियोलॉजिकल मैपिंग को जोड़ेगा।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चीन मंगल का पूरा मैप कब तक बनाना चाहता है?
चीन 2028 के अंत तक मंगल की पूरी सतह का जियोलॉजिकल मैप पूरा करने की योजना बना रहा है।
यह मंगल मैप किस मिशन से जुड़ा है?
यह मैप चीन के अगले मंगल मिशन तियानवेन-3 की तैयारियों का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
इस मैप में क्या खास होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक यह मंगल का पहला AI-driven जियोलॉजिकल मैप होगा और यह चुनिंदा जगहों के बजाय पूरी सतह को कवर करेगा।
क्या इसमें पुराने मंगल मिशन का डेटा भी शामिल होगा?
हां, इसमें चीन के पहले मंगल रोवर झू रोंग की खोजों को शामिल किया जाएगा।
चीन यह मैप क्यों बना रहा है?
इसका मकसद मंगल के जियोलॉजिकल एजेस के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड बनना है, और इसे अमेरिका के साथ चीन की स्पेस राइवलरी से भी जोड़ा जा रहा है।
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