शी-ट्रंप की ज्यादा मुलाकातों से ईरान को मिल सकता है फायदा
चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती बातचीत ईरान के लिए मौके कैसे बना सकती है? जानें परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बदले रुख का असर।
चीन-अमेरिका के बीच करीबी रिश्ते और शी-ट्रंप की ज्यादा शिखर बैठकें ईरान के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती हैं
चीन-अमेरिका के बीच करीबी रिश्ते और शी-ट्रंप की ज्यादा शिखर बैठकें ईरान के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती हैं
सितंबर में वॉशिंगटन में दोनों राष्ट्रपतियों की मुलाकात के बाद चीन और अमेरिका इस बात पर सहमत हुए कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहना होगा।
मई में बीजिंग और सितंबर में वॉशिंगटन में दोनों राष्ट्रपतियों के बीच हुई बैठकों के दौरान ईरान का मुद्दा एजेंडे में था। विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों शिखर बैठकों से पता चला कि ईरान के प्रमुख साझेदार चीन और उसके सबसे बड़े विरोधी अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत में तेहरान अब भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
ईरान पर ज्यादा साफ रुख
मई में हुई शिखर बैठक के बाद चीन की ओर से जारी बयान में तेहरान का सीधा जिक्र नहीं था। हालांकि, सितंबर में हुई बैठक के बाद चीन ने ईरान को लेकर ज्यादा साफ बयान जारी किया।
चीनी बयान में कहा गया कि चीन और अमेरिका इस बात पर सहमत हुए हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहना होगा। दोनों बयानों के बीच का फर्क यह दिखाता है कि वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद चीन ने सार्वजनिक तौर पर अपना रुख ज्यादा साफ किया। हालांकि, यह रुख चीन-अमेरिका कूटनीति के बड़े ढांचे के भीतर ही रहा।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों ताकतें आठ सूत्री सहमति में इस बात पर भी राजी हुईं कि किसी भी देश या संगठन को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर टोल नहीं लगाना चाहिए।
आगे होने वाली शिखर बैठकें क्यों अहम हो सकती हैं
विश्लेषकों ने कहा कि बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच ज्यादा सीधी कूटनीति की संभावना ईरान के लिए कुछ जगह बना सकती है। विश्लेषण के मुताबिक, राष्ट्राध्यक्षों के बीच आगे होने वाली कूटनीति ईरान के पक्ष में काम कर सकती है।
ईरान के एक शोधकर्ता ने कहा कि बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच बेहतर रिश्ते ईरान के लिए खतरों से ज्यादा मौके लेकर आते हैं। यह आकलन इसलिए अहम है क्योंकि चीन को ईरान का प्रमुख साझेदार बताया जाता है, जबकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा विरोधी है। इसलिए इन दोनों ताकतों के बीच बन रहे संपर्क से ईरान की दिलचस्पी इस बात में है कि उनकी बातचीत किस तरह आगे बढ़ती है, खासकर तब जब तेहरान उनके एजेंडे में शामिल हो।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शी और ट्रंप की मुलाकातें ईरान के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती हैं?
चीन और अमेरिका के बीच बेहतर रिश्ते और सीधी कूटनीति ईरान के लिए नए मौके बना सकती है।
सितंबर की बैठक के बाद चीन और अमेरिका ईरान को लेकर किस बात पर सहमत हुए?
दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहना होगा।
चीन-अमेरिका की बैठकों में ईरान का मुद्दा क्यों अहम रहा?
चीन ईरान का प्रमुख साझेदार है और अमेरिका उसका सबसे बड़ा विरोधी, इसलिए दोनों देशों की बातचीत में ईरान अब भी अहम मुद्दा बना हुआ है।
सितंबर की बैठक के बाद चीन के रुख में क्या बदलाव दिखा?
मई की बैठक के बाद जारी बयान में ईरान का सीधा जिक्र नहीं था, जबकि सितंबर के बाद चीन ने ईरान को लेकर ज्यादा साफ बयान दिया।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।