बाणगंगा टैंक में सैकड़ों मछलियां मरने पर बीएमसी बुलाएगी बैठक
मुंबई के बाणगंगा टैंक में सैकड़ों मछलियों की मौत के बाद बीएमसी स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ बचाव के उपायों पर चर्चा करेगी।
बाणगंगा टैंक में मछलियों की मौत को लेकर बीएमसी ने लोगों के साथ बैठक बुलाने की बात कही
बाणगंगा टैंक में मछलियों की मौत को लेकर बीएमसी ने लोगों के साथ बैठक बुलाने की बात कही
मुंबई के वालकेश्वर इलाके में मौजूद ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में सैकड़ों मछलियां मरी हुई मिलने के बाद बीएमसी स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ कुछ कदमों पर चर्चा करने की तैयारी कर रही है। यह बैठक इसी हफ्ते होने की उम्मीद है। इस जलाशय में मछलियों की मौत अब हर साल सामने आने वाली चिंता बन गई है।
बार-बार हो रही मछलियों की मौत पर चर्चा करेगी बीएमसी
बीएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक, बन गंगा टैंक में हर साल लगभग इसी समय मछलियों के मरने की खबर सामने आती है। सोर्स के मुताबिक, यह टैंक ईस्वी सन 1127 में बनाया गया था। बीएमसी की ओर से की जाने वाली इस चर्चा में इस समस्या को दोबारा होने से रोकने के उपायों पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, टैंक में मछलियों को प्रभावित करने वाले कारणों पर भी बात होगी।
बीएमसी के अधिकारी ने कहा, “26 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने वाले लोग पानी में आटे और दूध से बना घोल डालते हैं। इससे मछलियां प्रभावित होती हैं।” अधिकारी ने यह भी कहा कि यह हर साल सामने आने वाली समस्या बन गई है।
पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को खत्म होता है। इस जानकारी में मछलियों के मरने के समय को उस अवधि के दौरान पानी में डाली जाने वाली सामग्री से जोड़ा गया है। वहीं, बीएमसी की जागरूकता से जुड़ी कोशिश में टैंक के पानी में प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी जैसे मुद्दों पर भी बात होने की उम्मीद है।
2025 में भी इसी तरह मछलियों की मौत की खबर
2025 में भी ऐसी ही समस्या सामने आई थी। उस समय विरासत वाले इस जलाशय के किनारे के पास सैकड़ों मछलियां मरी हुई मिली थीं। इस जलाशय का नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के पास है।
उस समय बीएमसी ने मौके से करीब 10,000 किलोग्राम मरी हुई मछलियां और फूलों का कचरा हटाया था। उस सफाई का बड़ा स्तर हर साल दोहराई जा रही समस्या की गंभीरता दिखाता है। हालांकि, सोर्स में यह नहीं बताया गया है कि इस बार मरी हुई मछलियों की संख्या का आकलन किया गया है या नहीं।
जागरूकता पर केंद्रित होगी बैठक
माना जाता है कि बाणगंगा टैंक भगवान राम ने गंगा की एक शाखा के रूप में बनाया था। बताया जाता है कि उन्होंने इस जगह पर जमीन में एक तीर चलाया था। इस टैंक का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी बीएमसी की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत स्थानीय लोगों और पुजारियों को चर्चा में शामिल किया जाना है।
यह बैठक डी वार्ड कार्यालय में होगी। बैठक में पुजारियों को मीठे पानी के जलीय पर्यावरण को बचाने की अहमियत समझाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, इसे बचाने के तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा।
पिछले साल बीएमसी ने मौके पर फूलों के कचरे और खाने की चीजों के लिए जमा करने वाले डिब्बे लगाए थे। इसके अलावा, सफाई अभियान भी शुरू किए गए थे। अब होने वाली बैठक में पहले किए गए इन उपायों के साथ स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ चर्चा भी शामिल की जाएगी।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाणगंगा टैंक में मछलियों की मौत पर बीएमसी क्या करेगी?
बीएमसी स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ बैठक कर मछलियों की मौत रोकने के उपायों पर चर्चा करेगी।
बाणगंगा टैंक में मछलियां क्यों मर रही हैं?
बीएमसी अधिकारी के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान पानी में डाला जाने वाला आटे और दूध का घोल मछलियों को प्रभावित करता है। प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी पर भी चर्चा होगी।
बीएमसी की बैठक कब और कहां होगी?
बैठक इसी हफ्ते डी वार्ड कार्यालय में होने की उम्मीद है।
2025 में बाणगंगा टैंक से कितना कचरा हटाया गया था?
2025 में बीएमसी ने करीब 10,000 किलोग्राम मरी हुई मछलियां और फूलों का कचरा हटाया था।
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