शामली में भाकियू ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर एसआईआर रद्द करने की मांग
शामली में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मताधिकार की रक्षा की आवाज उठाई है।
शामली में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मताधिकार की रक्षा की आवाज उठाई है। संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजकर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को तत्काल रद्द करने की मांग की है। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को किसानों के विरोध मार्च के तहत की गई।
भारतीय किसान यूनियन की ओर से दिए गए ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई गई है। संगठन ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि लोकतंत्र की मजबूती और सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए एसआईआर प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। भारतीय किसान यूनियन ने आरोप लगाया है कि बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से बड़ी संख्या में नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है।
संगठन ने ज्ञापन के जरिए मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि इन नागरिकों को फिर से मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
ज्ञापन में वर्ष 2023 के संबंधित कानून में संशोधन करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ी व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई को शामिल करने की मांग उठाई गई है।
भारतीय किसान यूनियन ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। संगठन के मुताबिक, इस अधिकार की सुरक्षा के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शामली में भाकियू ने राष्ट्रपति को ज्ञापन क्यों भेजा?
भाकियू ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को तुरंत रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा।
भाकियू ने मुख्य चुनाव आयुक्त के बारे में क्या मांग की?
संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की।
भाकियू का मतदाता सूची को लेकर क्या आरोप है?
भाकियू का आरोप है कि बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
ज्ञापन में कितने नागरिकों का मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की गई?
ज्ञापन में कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों का मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की गई।
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