शामली के गांवों में मिलावटी पदार्थों से काला गुड़ बनाने का आरोप
जनपद शामली के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंधित और मिलावटी पदार्थों से गुड़ तैयार किए जाने का मामला सामने आया है।
जनपद शामली के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंधित और मिलावटी पदार्थों से गुड़ तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ मुनाफाखोर व्यापारी चंद रुपयों के लालच में सड़ी-गली चीनी, शीरे और राब का इस्तेमाल कर काला गुड़ तैयार कर रहे हैं। इस मामले को लेकर गुड़ की गुणवत्ता और लोगों की सेहत पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि तैयार किए जा रहे इस काले गुड़ को स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से पानीपत, करनाल, शामली और अन्य क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। हालांकि, इस आपूर्ति के पूरे नेटवर्क की अभी पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के आधार पर मामले की जांच की जरूरत बताई जा रही है।
मिलावटी गुड़ के निर्माण और उसकी आपूर्ति से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। आरोपों के मुताबिक, गुड़ बनाने में ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में इस गुड़ की शुद्धता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जनपद के बंधन क्षेत्र और कांधला क्षेत्र के कुछ ग्रामीण इलाकों में कथित तौर पर इस तरह का गुड़ तैयार किया जा रहा है। लोगों का दावा है कि इन इलाकों में तैयार होने वाले गुड़ को आगे स्थानीय व्यापारियों के जरिए दूसरे क्षेत्रों तक भेजे जाने की आशंका है।
कच्ची शराब बनाने में इस्तेमाल की भी आशंका
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस तरह तैयार किए जाने वाले काले गुड़ का इस्तेमाल कच्ची शराब बनाने में भी किया जा सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की जांच जरूरी है। गुड़ में इस्तेमाल किए गए पदार्थों और उसके संभावित इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति नमूनों की प्रयोगशाला में जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
मिलावटी पदार्थों से तैयार किए गए गुड़ का सेवन इंसानों के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए गुड़ के नमूनों की जांच और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पहचान को अहम माना जा रहा है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
इस कथित अवैध कारोबार को लेकर आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों ने विभागीय कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय कर्मचारियों की भूमिका और पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
जांच में कुछ नाम सामने आने का दावा
स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के दौरान आरिफ, अनिल कुमार, रिफाकत और मुनीम कृष्णपाल के नाम सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि ये लोग कथित तौर पर मिलावटी गुड़ तैयार करने के कारोबार से जुड़े हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों की भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है।
मामले में अभी यह साफ नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए जा रहे कथित मिलावटी गुड़ की मात्रा कितनी है और इसकी आपूर्ति किन-किन जगहों तक हो रही है। पानीपत, करनाल, शामली और अन्य क्षेत्रों में भेजे जाने की आशंका की भी जांच की जानी है।
अब सवाल यह है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह मिलावटी गुड़ तैयार किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों की ओर से इसकी जांच और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग और आबकारी विभाग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच के जरिए गुड़ की गुणवत्ता, उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों और उसकी आपूर्ति के नेटवर्क की वास्तविकता सामने आ सकती है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आरिफ, अनिल कुमार, रिफाकत तथा मुनीम कृष्णपाल की भूमिका क्या है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शामली के ग्रामीण इलाकों में किस तरह का गुड़ बनाने का आरोप है?
आरोप है कि कुछ व्यापारी सड़ी-गली चीनी, शीरे और राब जैसे मिलावटी पदार्थों से काला गुड़ तैयार कर रहे हैं।
कथित मिलावटी गुड़ कहां भेजे जाने की आशंका है?
इसे स्थानीय व्यापारियों के जरिए पानीपत, करनाल, शामली और दूसरे इलाकों में भेजे जाने की आशंका जताई गई है।
मिलावटी गुड़ से क्या खतरा हो सकता है?
ऐसे गुड़ का सेवन इंसानों और पशुओं की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
काले गुड़ के इस्तेमाल को लेकर एक और क्या आशंका जताई गई है?
स्थानीय सूत्रों ने दावा किया है कि इसका इस्तेमाल कच्ची शराब बनाने में भी हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
मामले की सच्चाई कैसे सामने आएगी?
खाद्य सुरक्षा और आबकारी विभाग की जांच के साथ गुड़ और उसमें इस्तेमाल सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
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