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National Press note संभल

संभल के श्री कल्कि धाम में दिव्य मासिक सत्संग का आयोजन किया गया

संभल के श्री कल्कि धाम में मंगलवार को दिव्य मासिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में किया गया।

संभल के श्री कल्कि धाम में दिव्य मासिक सत्संग का आयोजन किया गया
Image credit: News Darpan Team

संभल के श्री कल्कि धाम में मंगलवार को दिव्य मासिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में किया गया। सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

यज्ञ में विश्व कल्याण, मानवता के उत्थान और समस्त प्राणियों के मंगल की कामना की गई। श्री श्री 1008 श्रीमद् जगद्गुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर पूर्णाहुति कराई।

सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि भगवान भक्तों की पुकार पर आते हैं। भगवान के आने का केवल इंतजार करने के बजाय उन्हें सच्चे दिल से पुकारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भक्तों की पुकार पर भगवान आते हैं। पूरी दुनिया पुकारना शुरू कर चुकी है। इस कलियुग में भी भगवान का दर्शन होगा। भगवान का वचन है - मैं आऊंगा, लेकिन मुझे पुकारो तो सही।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने साथ-साथ समाज और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति सभी के कल्याण की भावना रखता है तो उसका अपना कल्याण भी अपने आप होने लगता है। सनातन धर्म की मूल भावना सर्वकल्याण, प्रेम, समरसता और मानवता है।

सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए आचार्य ने कहा कि सनातन में न भेदभाव था, न है और न रहेगा। राजनीतिक स्वार्थों के लिए समाज को जाति और वर्ग के नाम पर बांटने की कोशिशों से बचने की जरूरत है। उन्होंने भक्त मीरा का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षत्रिय कुल में जन्मी मीरा ने संत रविदास को अपना गुरु माना, जो सनातन की व्यापक और समरस परंपरा को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि समर्पण और पूरे विश्वास की अनुभूति है। श्रद्धा जीवन का आधार बन जाए तो अहंकार खत्म होकर आध्यात्मिक रोशनी का रास्ता खुल जाता है।

सत्संग के दौरान धाम का माहौल भक्ति और मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। अंत में विश्व कल्याण की मंगलकामना की गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संभल के श्री कल्कि धाम में मासिक सत्संग में क्या किया गया?

मंगलवार को श्री कल्कि धाम में दिव्य मासिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यज्ञ में विश्व कल्याण, मानवता के उत्थान और सभी प्राणियों के मंगल की कामना की गई।

आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने भगवान के आने के बारे में क्या कहा?

आचार्य ने कहा कि भगवान भक्तों की पुकार पर आते हैं। भगवान के आने का केवल इंतजार करने के बजाय उन्हें सच्चे दिल से पुकारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस कलियुग में भी भगवान का दर्शन होगा और भगवान का वचन है - 'मैं आऊंगा, लेकिन मुझे पुकारो तो सही।'

सनातन धर्म की मूल भावना क्या है?

आचार्य प्रमोद कृष्णम् के अनुसार, सनातन धर्म की मूल भावना सर्वकल्याण, प्रेम, समरसता और मानवता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन में न भेदभाव था, न है और न रहेगा।

श्रद्धा के बारे में आचार्य ने क्या समझाया?

आचार्य ने कहा कि श्रद्धा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि समर्पण और पूरे विश्वास की अनुभूति है। जब श्रद्धा जीवन का आधार बन जाए तो अहंकार खत्म होकर आध्यात्मिक रोशनी का रास्ता खुल जाता है।

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