इंदौर में अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव शुरू, सोलर राउंड टेबल में 20 से ज्यादा निवेशक जुटे
इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 की शुरुआत सोलर राउंड टेबल से हुई। इस बैठक में सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया।
इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 की शुरुआत सोलर राउंड टेबल से हुई। इस बैठक में सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा से जोड़ना, बिजली व्यय को कम करना और नगरीय विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए मॉडल तैयार करना रहा।
बैठक में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए नगरीय विकास को नई दिशा देने पर विचार किया गया। निवेशकों और अधिकारियों के बीच इस बात पर मंथन हुआ कि सौर ऊर्जा का इस्तेमाल नगरीय निकायों की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके खर्च को बेहतर तरीके से संभालने के लिए कैसे किया जा सकता है।
अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं, नगरीय निकायों के वित्तीय सशक्तीकरण और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नवाचार आधारित मॉडल अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, म्युनिसिपल पूल बॉन्ड और प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना से जुड़े नीतिगत पहलुओं के महत्व पर भी विचार रखे।
बैठक में बिरसिंहपुर जलाशय में प्रस्तावित 200 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मंजीत सिंह ने यह प्रस्तुतिकरण दिया। परियोजना के साथ 50 मेगावाट/100 मेगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली यानी BESS भी प्रस्तावित है।
प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1,564 करोड़ रुपये बताई गई। बैठक में परियोजना की संरचना, इसके संभावित इस्तेमाल और इसके वित्तपोषण से जुड़े विकल्पों पर जानकारी दी गई। फ्लोटिंग सोलर परियोजना के जरिए बिरसिंहपुर जलाशय की सतह पर सौर ऊर्जा उत्पादन की योजना है, जबकि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के जरिए तैयार बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने का प्रावधान बताया गया।
परियोजना का उद्देश्य नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण के जरिए शाम के समय पीक डिमांड के दौरान दो घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना है। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि इससे नगरीय निकायों के बिजली व्यय को अनुकूलित करने और ग्रिड पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
परियोजना के वित्तपोषण के लिए कई विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें डेवलपर की भागीदारी, ऋण, नगरीय निकायों की इक्विटी और मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी यानी MPUDC के माध्यम से वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) शामिल हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि वीजीएफ के रूप में निकायों का अंश रहेगा।
वित्तपोषण से जुड़े प्रस्ताव में बिजली की कैप्टिव खपत और दीर्घकालीन संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था भी शामिल है। इस तरह परियोजना की योजना में सिर्फ सौर ऊर्जा उत्पादन और बैटरी भंडारण ही नहीं, बल्कि बिजली के इस्तेमाल तथा लंबे समय तक संचालन से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
बैठक में लगभग 200 नगरीय निकायों के लिए बिजली आपूर्ति के उद्देश्य से पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड की पहल पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल के तहत अलग-अलग नगरीय निकायों की वित्तीय जरूरतों को एक साथ जोड़कर संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए नगरीय निकायों की वित्तीय जरूरतों को साझा ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया। इसे नगरीय आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। बैठक में इस बात पर जोर रहा कि वित्तीय संसाधन जुटाने के नए मॉडल नगरीय विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
प्रस्तुतीकरण में फ्लोटिंग सोलर और बैटरी ऊर्जा भंडारण को एकीकृत करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। इस व्यवस्था से दिन के समय सौर ऊर्जा उत्पादन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही शाम के समय बिजली की मांग को पूरा करने में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की मदद ली जा सकती है।
मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अधीक्षण यंत्री श्री अवनीश शुक्ला ने भी विषय से संबंधित तकनीकी प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने फ्लोटिंग सोलर परियोजना और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली से जुड़े तकनीकी पक्षों की जानकारी दी। बैठक में बिरसिंहपुर परियोजना को नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और नगरीय निकायों के बिजली व्यय के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में रेखांकित किया गया।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने सौर ऊर्जा की उपयोगिता पर बात रखी। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के नगरीय क्षेत्र सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
श्री संकेत भोंडवे ने नगरीय निकायों में सौर ऊर्जा आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करने और ऊर्जा की जरूरतों को टिकाऊ तथा किफायती विकल्पों से पूरा करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं और वित्तीय नवाचारों के बीच बेहतर समन्वय से नगरीय निकायों को दीर्घकालीन लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास सतत नगरीय विकास, ऊर्जा दक्षता और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक होंगे। इस दौरान तकनीकी अधिकारी श्री कमलेश भटनागर ने निवेशकों की जिज्ञासा का समाधान किया और बैठक में उठाए गए तकनीकी विषयों पर जानकारी दी।
कार्यक्रम में अपर आयुक्त श्री शिशिर गेमावत और मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के प्रमुख अभियंता श्री आनंद सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 की शुरुआत किस बैठक से हुई?
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 की शुरुआत सोलर राउंड टेबल से हुई। इसमें सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से ज्यादा निवेशकों ने हिस्सा लिया।
बिरसिंहपुर जलाशय में प्रस्तावित सोलर परियोजना की क्षमता कितनी है?
बिरसिंहपुर जलाशय में 200 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना प्रस्तावित है। इसके साथ 50 मेगावाट/100 मेगावाट-घंटा क्षमता की BESS भी लगाई जाएगी।
इस फ्लोटिंग सोलर परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,564 करोड़ रुपये बताई गई है।
परियोजना से नगरीय निकायों को क्या फायदा होगा?
परियोजना से नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा मिलेगी और बिजली खर्च कम करने में मदद मिलेगी। BESS के जरिए शाम की पीक डिमांड के दौरान दो घंटे तक बिजली देने की योजना है।
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