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पन्ना में उमंग सिंघार ने 42 दिन पुराने चिता आंदोलन को समर्थन दिया

मध्यप्रदेश के पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।

पन्ना में उमंग सिंघार ने 42 दिन पुराने चिता आंदोलन को समर्थन दिया
Image credit: News Darpan Team

मध्यप्रदेश के पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शनिवार को पन्ना पहुंचे और विस्थापन, मुआवजे तथा पुनर्वास की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे आदिवासी किसानों के बीच पहुंचे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के प्रभाव वाले क्षेत्र में सिंघार ने 42 दिनों से जारी ‘चिता आंदोलन’ को समर्थन दिया।

उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। प्रभावित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक जारी रखने की बात भी उन्होंने कही।

इस दौरान आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर ने अपना अनशन खत्म किया। अमित भटनागर 27 दिनों से आमरण अनशन कर रहे थे। उमंग सिंघार के आग्रह पर उन्होंने नारियल पानी पीकर उपवास तोड़ा। इसके बाद सिंघार ‘संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ यात्रा में शामिल हुए।

नेता प्रतिपक्ष आंदोलनकारियों के साथ कलेक्ट्रेट भी पहुंचे। वहां उन्होंने प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। आंदोलनकारियों की मांगों में विस्थापन की समस्या का समाधान, मुआवजे में कथित अनियमितताओं की जांच, उचित पुनर्वास और वन अधिकार कानून के प्रावधानों का पालन शामिल है।

आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आदिवासी, दलित और किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिंघार ने कहा, “आदिवासी, दलित और किसानों को अनाथ समझने वाली सरकार यह याद रखे कि कांग्रेस अभी जिंदा है।”

उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को आदिवासी, दलित और किसानों को अकेला नहीं समझना चाहिए। उन्होंने विकास के नाम पर प्रभावित परिवारों के साथ होने वाले किसी भी अन्याय का विरोध करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन परिवारों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक जारी रहेगी।

सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के दोबारा सर्वे और मुआवजे की जांच को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को आंदोलनकारियों से मुलाकात के बाद उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित परिवारों का दोबारा सर्वे कराने और मुआवजे की जांच के निर्देश दिए थे। सिंघार ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तीन महीने बाद भी कार्रवाई का स्पष्ट ब्योरा सामने क्यों नहीं आया।

उन्होंने सरकार से पूछा कि दोबारा सर्वे की रिपोर्ट कहां है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि अब तक ऐसे कितने परिवारों को मुआवजा मिला है, जो पहले मुआवजे से छूट गए थे। सिंघार ने प्रभावित परिवारों से जुड़े इन सवालों पर सरकार से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।

पन्ना दौरे के दौरान उमंग सिंघार जिला जेल भी पहुंचे। वहां उन्होंने आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार से मुलाकात की। दिव्या अहिरवार पिछले 28 दिनों से जिला जेल में बंद हैं। सिंघार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाया और इन्हें वापस लेने की मांग की।

उन्होंने दिव्या अहिरवार की तत्काल रिहाई की भी मांग की। सिंघार ने कहा कि आंदोलन से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान करने की अपील भी की।

केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान अमित भटनागर के नेतृत्व में आंदोलन पिछले 42 दिनों से जारी है। इस आंदोलन के दौरान ‘चिता आंदोलन’ के जरिए प्रभावित परिवारों से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। आंदोलनकारी विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि मुआवजे में अनियमितताएं हुई हैं। इसी वजह से मुआवजे की जांच की मांग की जा रही है। इसके साथ ही प्रभावित परिवार उचित पुनर्वास और वन अधिकार कानून के प्रावधानों के पालन की मांग भी कर रहे हैं।

पन्ना में उमंग सिंघार के पहुंचने से इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिला है। उन्होंने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर उनकी मांगों का समर्थन किया और सरकार से दोबारा सर्वे, मुआवजे की जांच तथा आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों पर जवाब मांगा।

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का मुद्दा अब केवल विस्थापन और मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया है। यह मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का विषय भी बनता जा रहा है। अब सरकार प्रभावित परिवारों की मांगों और दोबारा सर्वे से जुड़े सवालों पर क्या कदम उठाती है, इस पर नजर रहेगी.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमंग सिंघार ने पन्ना में किस आंदोलन को समर्थन दिया?

उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के 42 दिनों से चल रहे चिता आंदोलन को समर्थन दिया।

प्रभावित परिवारों की मुख्य मांगें क्या हैं?

उनकी मांगों में विस्थापन का समाधान, मुआवजे की अनियमितताओं की जांच, उचित पुनर्वास और वन अधिकार कानून का पालन शामिल है।

आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर ने अनशन कैसे खत्म किया?

उमंग सिंघार के आग्रह पर अमित भटनागर ने नारियल पानी पीकर 27 दिन का आमरण अनशन खत्म किया।

उमंग सिंघार ने सरकार से क्या जवाब मांगा?

उन्होंने दोबारा सर्वे की रिपोर्ट, छूटे परिवारों को मिले मुआवजे और मुख्यमंत्री के निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी।

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