सीतापुर में तबादले के दिन निजी फर्म को ठेका, अधिकारी पर कार्रवाई की संस्तुति
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन समेत कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन समेत कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई है। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने यह संस्तुति गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना के मामले में शासन को भेजी है।
मामला संपत्ति कर वसूली का ठेका एक निजी फर्म को सौंपने से जुड़ा है। आरोप है कि वैभव त्रिपाठी ने अपने तबादले के बाद कार्यमुक्त होने के दिन ही निजी फर्म को यह काम सौंप दिया। यह ठेका लाखों की वसूली से जुड़ा था।
जांच के अनुसार, वैभव त्रिपाठी का तबादला गाजियाबाद के लोनी में हुआ था। एक जून 2026 को कार्यमुक्त होने के दिन ही उन्होंने लखनऊ की निजी फर्म ज्ञान जियोमैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड को सॉफ्टवेयर के माध्यम से संपत्ति कर वसूली का अनुबंध और कार्यादेश जारी कर दिया।
इस अनुबंध के तहत निजी फर्म को वसूली के एवज में 12.5 प्रतिशत भुगतान किया जाना था। यानी संपत्ति कर से होने वाली वसूली पर फर्म को 12.5 प्रतिशत कमीशन दिए जाने की व्यवस्था की गई थी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निजी फर्म को काम सौंपने से पहले नगर पालिका बोर्ड से कोई स्वीकृति या अनुमोदन लिया गया था या नहीं। आरोप है कि इस फैसले से पहले बोर्ड की मंजूरी नहीं ली गई।
वहीं, शासन स्तर पर डेटा संग्रहण के लिए ई-नगर सेवा पोर्टल पहले से संचालित है। ऐसे में बोर्ड की मंजूरी के बिना निजी फर्म को संपत्ति कर वसूली का काम सौंपने के फैसले को नियमों का उल्लंघन और गंभीर प्रशासनिक अनियमितता माना गया है।
जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग और निदेशक, निकाय निदेशालय को पत्र भेजा है। पत्र में वैभव त्रिपाठी के निलंबन समेत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
अब इस मामले में शासन के अगले कदम पर निगाहें टिकी हैं। फिलहाल जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शासन स्तर पर आगे बढ़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीतापुर के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई सुझाई गई है?
वैभव त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन समेत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
वैभव त्रिपाठी पर क्या आरोप है?
आरोप है कि उन्होंने तबादले के बाद कार्यमुक्त होने के दिन ही निजी फर्म को संपत्ति कर वसूली का ठेका दे दिया।
ठेका किस निजी फर्म को और कब दिया गया?
1 जून 2026 को लखनऊ की ज्ञान जियोमैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड को यह ठेका और कार्यादेश दिया गया।
निजी फर्म को कितने प्रतिशत कमीशन मिलना था?
फर्म को संपत्ति कर वसूली की रकम पर 12.5 प्रतिशत कमीशन मिलना था।
इस फैसले में मुख्य नियमों का उल्लंघन क्या माना गया?
आरोप है कि निजी फर्म को काम देने से पहले नगर पालिका बोर्ड से मंजूरी नहीं ली गई।
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