संभल के दीपेंद्र सिंह ने पोलियो के बावजूद जीता विश्व स्वर्ण पदक
संभल जिले के गांव भटपुरा के दीपेंद्र सिंह ने पोलियो को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया।
संभल जिले के गांव भटपुरा के दीपेंद्र सिंह ने पोलियो को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। बचपन से उनके दाहिने पैर में पोलियो है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने निशानेबाजी में ऐसी पहचान बनाई कि आज पूरा देश उन पर गर्व करता है। दीपेंद्र सिंह ने विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित किया है कि हौसला बुलंद हो तो शारीरिक कमी भी कामयाबी के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती।
दीपेंद्र सिंह ने वर्ष 2015 में चंदौसी के राधा गोविंद इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। डिग्री हासिल करने के बाद उनके सामने नौकरी का रास्ता था, लेकिन उनका मन खेल में ज्यादा था। उन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय निशानेबाजी को अपना रास्ता चुना।
इसके बाद दीपेंद्र ने कोच अमित श्योराण के मार्गदर्शन में निशानेबाजी का कड़ा अभ्यास शुरू किया। उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने खेल को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। इसी मेहनत के दम पर उन्होंने आगे चलकर कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और स्वर्ण पदक जीते।
वर्ष 2017 में थाईलैंड विश्व कप में दीपेंद्र सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही टीम वर्ग में भी उनके नाम स्वर्ण पदक रहा। इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में उनकी पहचान मजबूत की।
वर्ष 2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियाई पैरा खेल में भी दीपेंद्र ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7वीं रैंक हासिल की। इसके बाद वर्ष 2019 में सिडनी विश्व चैंपियनशिप और सिडनी कप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इन उपलब्धियों के साथ उन्होंने दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
दीपेंद्र सिंह ने फ्रांस विश्व कप में भी सफलता हासिल की। इस प्रतियोगिता के जरिए उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक के लिए कोटा हासिल किया। वर्ष 2021 के पैरालंपिक में उन्होंने 10वीं रैंक प्राप्त की। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार किए गए उनके प्रदर्शन ने उन्हें दिव्यांग निशानेबाजी के क्षेत्र में खास पहचान दिलाई।
दीपेंद्र सिंह की इन उपलब्धियों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 में उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान 'लक्ष्मण पुरस्कार' से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी खेल यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाता है।
वर्तमान में दीपेंद्र सिंह मुंबई में आयकर विभाग में कार्यरत हैं। इसके बावजूद उनका जुड़ाव अपने गांव भटपुरा से बना हुआ है। अपनी जड़ों से जुड़े रहने और गांव के बच्चों व युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भटपुरा में आरएसए शूटिंग एकेडमी की शुरुआत की है।
रैना स्पोर्ट्स एसोसिएशन के माध्यम से दीपेंद्र सिंह गांव के गरीब बच्चों और युवाओं को मुफ्त में निशानेबाजी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका सपना है कि भटपुरा से भी कई और दीपेंद्र निकलें और ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाएं। इसी वजह से वह आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीपेंद्र सिंह कौन हैं?
दीपेंद्र सिंह संभल जिले के भटपुरा गांव के निशानेबाज हैं, जिन्होंने पोलियो के बावजूद विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है।
दीपेंद्र सिंह ने इंजीनियरिंग के बाद कौन सा रास्ता चुना?
उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी के बजाय निशानेबाजी को अपना करियर चुना।
दीपेंद्र सिंह ने 2017 थाईलैंड विश्व कप में कौन से पदक जीते?
उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के व्यक्तिगत और टीम वर्ग, दोनों में स्वर्ण पदक जीता।
दीपेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश का कौन सा सम्मान मिला?
उन्हें वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च खेल सम्मान 'लक्ष्मण पुरस्कार' मिला।
दीपेंद्र सिंह गांव के बच्चों के लिए क्या कर रहे हैं?
उन्होंने भटपुरा में आरएसए शूटिंग एकेडमी शुरू की है, जहां गरीब बच्चों और युवाओं को मुफ्त निशानेबाजी प्रशिक्षण दिया जाता है।
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