ग्वालियर में राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय ने दिए 67 स्वर्ण पदक, 368 उपाधियां
ग्वालियर में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। यह समारोह राजामाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित किया गया।
ग्वालियर में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। यह समारोह राजामाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित किया गया। समारोह में वर्ष 2024-25 और 2025-26, दो वर्षों के कुल 67 स्वर्ण पदक और 368 उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा अलग-अलग संकायों की कुल 14 शोध उपाधियां भी दी गईं। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका 2026 का मंच से विमोचन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के महामहिम राज्यपाल और विश्वविद्यालय के माननीय कुलाध्यक्ष श्री मंगुभाई पटेल ने की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक और उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और गुरु भी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि कला, संस्कृति, समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कुलाध्यक्ष श्री मंगुभाई पटेल ने विश्वविद्यालयों से कलाकारों के साथ-साथ विलुप्त कलाओं के संरक्षण और संवर्धन पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बदलते समय में आधुनिक तकनीकों को नए प्लेटफॉर्म के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शिक्षा संवेदना से परिपूर्ण होना चाहिए जो आपको समाज और राष्ट्र हित के लिए जीना सिखा सके।”
कुलाध्यक्ष ने यह बात राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। समारोह में दो शैक्षणिक वर्षों से जुड़े छात्रों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान की गईं। यूजी और पीजी की कुल 368 उपाधियां समारोह में दी गईं। इसके साथ ही 14 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं।
शोध उपाधियों में गायन की 5, तबला की 2 और चित्रकला की 7 उपाधियां शामिल रहीं। इस तरह अलग-अलग संकायों में शोध कार्य पूरा करने वाले विद्यार्थियों को भी समारोह के दौरान सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की ओर से दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक, उपाधियां और शोध उपाधियां प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया संपन्न की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्र गीत से हुआ। इसके बाद राष्ट्र गान हुआ। फिर कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे द्वारा रचित और डॉ पारुल दीक्षित द्वारा संयोजित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलगीत पर छात्र-छात्राओं ने भरतनाट्यम का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति का निर्देशन डॉ गौरीप्रिया ने किया।
इसके बाद डॉ अंजना झा के निर्देशन में मां कात्यायनी को समर्पित नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस नृत्य का अद्भुत प्रदर्शन छात्र-छात्राओं ने किया। समारोह में संगीत, नृत्य और कला से जुड़ी इन प्रस्तुतियों के जरिए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
कार्यक्रम से पहले शोभायात्रा निकाली गई। इसमें कुलसचिव, विद्या परिषद, कार्य परिषद और साधारण परिषद के सदस्य शामिल रहे। शोभायात्रा में कुलगुरू, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अन्य अतिथि, माननीय कुलाध्यक्ष महोदय और माननीय राज्यपाल के परिसहाय भी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में यह यात्रा बदले हुए क्रम में रही।
समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, तानसेन सम्मान से अलंकृत और ग्वालियर घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. अजय पोहनकर, पुणे, मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर संस्कृति शिक्षा उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी शामिल हुए। प्रदेश के माननीय संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मंत्री, स्वतंत्र प्रभार, श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को दीक्षोपदेश भी दिलाया। इस दौरान उन्होंने कहा, “आप जीवन के मंगलमय पथ पर अग्रसर होते रहें सत्य का त्याग कभी न करें।” कुलगुरू ने दीक्षांत की शपथ भी छात्र-छात्राओं को दिलाई।
विशिष्ट अतिथि श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह ज्ञान से साधना, साधना से सृजन और सृजन से राष्ट्र की सेवा की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा को जीवन की सार्थकता माना गया है।
श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि संगीत और कला को ऐसा आधार बनाया जाना चाहिए, जिसमें मनुष्य की आत्मा को स्पर्श करने की अद्भुत क्षमता हो। उन्होंने कहा कि जब कला में कौशल के साथ आत्म चेतना समाहित हो जाती है, तब मनुष्य पथ प्रदर्शक बन जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कला को जीवन में साधना के रूप में अपनाएं, अपनी जड़ों से जुड़े रहें और अपनी प्रतिभा से मानवीय मूल्यों का विस्तार करने का प्रयास करें। उनके संबोधन में कला, साधना, सृजन और राष्ट्र सेवा को एक-दूसरे से जुड़ी हुई प्रक्रिया के रूप में सामने रखा गया।
विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कोठारी ने कहा कि हमारे देश में दीक्षांत की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान केवल जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध करके उसे अपने व्यवहार में उतारने की परंपरा रही है।
श्री अतुल कोठारी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे जीवन भर छात्र बने रहें और हमेशा सीखने की भावना से प्रेरित रहें। उन्होंने दीक्षांत समारोह को शिक्षा के साथ-साथ ज्ञान को व्यवहार में उतारने की परंपरा से जोड़कर बताया।
मुख्य अतिथि पं. अजय पोहनकर ने समारोह में हरि भजन की मधुर प्रस्तुति दी। भजन के बोल थे, “गोविन्द जय, गोपाल जय...”। इसके बाद उन्होंने ठुमरी की अद्भुत प्रस्तुति दी। ठुमरी के बोल थे, “कैसी ये बनाई रे कलाई...”। उनकी प्रस्तुतियों से समारोह में मौजूद श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
समारोह में स्व. पं. पीएल गोहदकर की ओर से गायन में सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्र आयुष मिश्र और अक्षत मिश्रा को पं. राजा भैया पूछवाले संगीत परिषद स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। यह स्वर्ण पदक गायन में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को दिया गया।
प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे की ओर से समस्त संकाय में सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्र पुनीत कदवाने को स्व. प. पीएल गोहदकर स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। यह पदक समस्त संकाय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए दिया गया।
विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सदस्य चंद्रप्रताप सिकरवार की ओर से नाट्य एवं रंगमंच में सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्र अमिताभ आचार्य और विकास सिंह गोयल को स्व. श्रीमती शारदा महेंद्र सिंह स्मृति स्वर्ण प्रदान किया गया।
विश्वविद्यालय के विद्या परिषद सदस्य अशोक आनंद की ओर से समर्पित समाजसेवी लाल रामशरण आनंद स्मृति स्वर्ण पदक भी प्रदान किया गया। यह स्वर्ण पदक नाट्य एवं रंगमंच में सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्र रजत सिंह और ऐश्वर्य दुबे को दिया गया।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. आशुतोष खरे, विद्या परिषद सदस्य श्री अशोक आनंद, कार्य परिषद सदस्य श्री चंद्रप्रताप सिकरवार, सुंदरलाल मालवीय, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. अंजना झा, डॉ. संजय सिंह, डॉ. गौरीप्रिया, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. पारूल दीक्षित, डॉ श्याम रस्तोगी, योगेश शर्मा और पीआरओ कुलदीप पाठक मौजूद रहे।
समारोह में विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, संगतकार, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ हिमांशु द्विवेदी ने किया। 16/10/2026 को ग्वालियर में हुए इस दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान करने के साथ कला, संगीत, शोध, साधना, सीखने की भावना और राष्ट्र सेवा से जुड़े संदेश भी दिए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कितने स्वर्ण पदक दिए गए?
समारोह में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कुल 67 स्वर्ण पदक दिए गए।
समारोह में कितनी उपाधियां प्रदान की गईं?
समारोह में यूजी और पीजी की कुल 368 उपाधियां प्रदान की गईं।
कितनी शोध उपाधियां दी गईं और वे किन विषयों में थीं?
कुल 14 शोध उपाधियां दी गईं। इनमें गायन की 5, तबला की 2 और चित्रकला की 7 उपाधियां शामिल थीं।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता किसने की?
समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष श्री मंगुभाई पटेल ने की।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।