चंबल में अवैध रेत खन की आशंका, रातभर चला ऑपरेशन नाइट वॉच
मुरैना में बरसात का सीजन खत्म होते ही चंबल नदी में अवैध रेत उत्खन और परिवहन की आशंका को देखते हुए पुलिस और वन विभाग ने रात की निगरानी बढ़ा दी है।
मुरैना में बरसात का सीजन खत्म होते ही चंबल नदी में अवैध रेत उत्खन और परिवहन की आशंका को देखते हुए पुलिस और वन विभाग ने रात की निगरानी बढ़ा दी है। चंबल में चल रही इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन नाइट वॉच’ नाम दिया गया है। इसके तहत पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम संवेदनशील घाटों पर रातभर निगरानी कर रही है।
रविवार देर शाम एसपी धर्मराज मीना और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल पुलिस एवं वन विभाग की टीम के साथ चंबल के घाटों पर पहुंचे। दोनों अधिकारी देर रात तक मौके पर मौजूद रहे। टीम ने घाटों पर रेत उत्खन और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखी।
संयुक्त टीम ने राजघाट, रहू घाट, गडौरा, रिठौरा, कुठियाना और चिन्नानी सहित चंबल से जुड़े कई संवेदनशील घाटों का निरीक्षण किया। राजघाट पर निगरानी को खास महत्व दिया गया, क्योंकि यह नेशनल हाईवे-44 से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां से रेत के परिवहन की संभावना बनी रहती है।
रात के निरीक्षण के दौरान टीम का खास फोकस उन जगहों पर रहा, जहां से रेत के अवैध उत्खन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियां नदी तक पहुंच सकती हैं। पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने देर रात तक मौके पर रहकर वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी।
अधिकारियों की मौजूदगी के बीच रातभर रेत उत्खन के लिए कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली घाट तक नहीं पहुंची। टीम को मौके पर अवैध उत्खन की कोई स्पष्ट गतिविधि नहीं मिली। ताजा उत्खन के निशान भी नहीं मिले।
हालांकि, घाटों पर ताजा उत्खन नहीं मिलने के बाद जांच का एक दूसरा सवाल सामने आया है। शहर में लगातार पहुंच रही रेत आखिर कहां से आ रही है। इसी सवाल को ध्यान में रखते हुए अब टास्क फोर्स की निगरानी सिर्फ चंबल नदी के घाटों तक सीमित नहीं रहेगी।
टास्क फोर्स रेत के डंपिंग एरिया और शहर तक आने वाले परिवहन मार्गों पर भी नजर रखेगी। अब जांच में उन रास्तों और जगहों को देखा जाएगा, जहां से रेत शहर तक पहुंच रही है। घाटों पर रात की निगरानी के साथ-साथ शहर की ओर आने वाले वाहनों की आवाजाही पर भी ध्यान दिया जाएगा।
डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल के मुताबिक, चंबल के संवेदनशील घाटों पर निगरानी को और मजबूत करने के लिए 16 नई वन चौकियों का निर्माण कराया जा रहा है। इन चौकियों पर वन विभाग के कर्मचारियों के साथ एसएएफ का सशस्त्र बल भी तैनात रहेगा।
इन चौकियों पर 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था होगी। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और जीपीएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। विभाग के अनुसार, चौकियों का निर्माण जल्द पूरा कराया जाएगा। इसके बाद संवेदनशील घाटों पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
एसपी धर्मराज मीना ने अधिकारियों को चंबल क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संदिग्ध वाहनों की लगातार जांच करने को कहा है। किसी वाहन में अवैध रेत मिलने या किसी गैरकानूनी गतिविधि की जानकारी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
एसपी धर्मराज मीना ने स्पष्ट किया कि चंबल नदी से अवैध रेत उत्खन की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस और वन विभाग की टीमें इसी निर्देश के तहत घाटों और उनसे जुड़े रास्तों पर निगरानी कर रही हैं।
चंबल में अवैध रेत उत्खन रोकने के लिए पुलिस और वन विभाग की संयुक्त सक्रियता लगातार दूसरे दिन भी दिखाई दी। एसपी और डीएफओ के रात में अचानक घाटों पर पहुंचने से निगरानी व्यवस्था कड़ी हुई है। अधिकारियों की मौजूदगी में घाटों पर सन्नाटा रहा और रेत उत्खन के लिए कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं आई।
अब कार्रवाई का अगला फोकस घाटों से ज्यादा उन रास्तों और डंपिंग प्वाइंट्स की पहचान करना है, जहां से रेत शहर तक पहुंच रही है। अगर घाटों पर उत्खन नहीं हो रहा है और फिर भी रेत का परिवहन जारी है, तो टास्क फोर्स इसी कड़ी को जोड़ने की कोशिश करेगी। इसके लिए डंपिंग एरिया, परिवहन मार्ग और संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर नजर रखी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंबल में चल रही कार्रवाई का नाम क्या है?
चंबल नदी में अवैध रेत उत्खन और परिवहन रोकने के लिए चल रही कार्रवाई को ‘ऑपरेशन नाइट वॉच’ नाम दिया गया है।
रात की निगरानी किन विभागों की टीम कर रही है?
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम संवेदनशील घाटों पर रातभर निगरानी कर रही है।
रात के निरीक्षण में टीम को क्या मिला?
टीम को अवैध उत्खन की कोई साफ गतिविधि या ताजा उत्खन के निशान नहीं मिले। रातभर कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली भी घाट तक नहीं पहुंची।
रेत की जांच अब किन जगहों पर की जाएगी?
टास्क फोर्स रेत के डंपिंग एरिया और शहर तक आने वाले परिवहन मार्गों पर भी निगरानी करेगी।
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