नल तरंग कलाकार ज्योति चौधरी बनीं मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता की निर्णायक
नल तरंग वादक ज्योति चौधरी ने भारत विकास परिषद की मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई। इस प्रतियोगिता का आयोजन भारत विकास परिषद की स्वामी विवेकानंद शाखा, शहडोल ने किया।
नल तरंग वादक ज्योति चौधरी ने भारत विकास परिषद की मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई। इस प्रतियोगिता का आयोजन भारत विकास परिषद की स्वामी विवेकानंद शाखा, शहडोल ने किया। भारतीय संगीत के अनूठे वाद्ययंत्र नल तरंग की कलाकार ज्योति चौधरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
ज्योति चौधरी ने समूहगान प्रतियोगिता में निर्णायक के तौर पर हिस्सा लिया। उनके जुड़ने से इस आयोजन को खास महत्व मिला, क्योंकि वह नल तरंग वादन जैसी दुर्लभ संगीत परंपरा से जुड़ी हुई हैं। समूहगान और नल तरंग, दोनों भारतीय संगीत की अलग-अलग खूबियों को सामने लाते हैं।
नल तरंग एक अनोखा वाद्ययंत्र है। इसमें अलग-अलग लंबाई की धातु की नलियों से संगीत के स्वर निकाले जाते हैं। इन नलियों को सुरों के हिसाब से व्यवस्थित किया जाता है। इसके बाद उन पर एक खास तरीके से आघात करके मधुर धुनें बजाई जाती हैं।
नल तरंग की सबसे खास बात यह है कि इसमें बंदूक की नलियों का इस्तेमाल करके संगीत प्रस्तुत किया जाता है। इसी वजह से यह वाद्ययंत्र आम वाद्ययंत्रों से अलग दिखाई देता है और भारतीय संगीत की अनोखी प्रयोगधर्मिता को सामने लाता है।
नल तरंग का संबंध मध्य प्रदेश के मैहर की प्रसिद्ध संगीत परंपरा से है। महान संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब ने संगीत के क्षेत्र में कई प्रयोग किए थे। उन्होंने मैहर की संगीत परंपरा को खास पहचान दिलाई। नल तरंग भी इसी अनूठी संगीत विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ज्योति चौधरी वर्ष 2023 में जी-20 से जुड़े कार्यक्रम में नल तरंग वादन की प्रस्तुति दे चुकी हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया था। इसके अलावा, 9 नवंबर 2023 को सतना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के दौरान भी उन्होंने नल तरंग बजाया था।
उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण से पहले खुद ज्योति चौधरी से नल तरंग वादन प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था। उनकी प्रस्तुति के बाद प्रधानमंत्री ने उनकी सराहना भी की थी। इस कार्यक्रम का वीडियो भी उपलब्ध है।
ज्योति चौधरी को नल तरंग की विश्व में एकमात्र वादक के रूप में भी बताया जाता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसके बावजूद नल तरंग के प्रति उनकी साधना और अलग-अलग मंचों पर दी गई प्रस्तुतियों ने उन्हें खास पहचान दिलाई है।
भारत में ऐसे कई पारंपरिक वाद्ययंत्र हैं, जिनके बारे में नई पीढ़ी बहुत कम जानती है। नल तरंग भी ऐसे ही वाद्ययंत्रों में शामिल है। इस तरह के वाद्ययंत्रों को पहचान दिलाना और लोगों को इनके बारे में जानकारी देना भारतीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता में ज्योति चौधरी की निर्णायक के रूप में सहभागिता ने दुर्लभ संगीत विरासत को भी सामने रखा। समूहगान देशभक्ति और सामूहिकता की भावना को मजबूत करता है। वहीं, नल तरंग जैसे वाद्ययंत्र भारतीय संगीत की विविधता और समृद्ध विरासत से लोगों को परिचित कराते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता में ज्योति चौधरी की क्या भूमिका रही?
ज्योति चौधरी ने भारत विकास परिषद की मध्य क्षेत्रीय समूहगान प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई।
इस प्रतियोगिता का आयोजन किसने किया था?
प्रतियोगिता का आयोजन भारत विकास परिषद की स्वामी विवेकानंद शाखा, शहडोल ने किया था।
नल तरंग वाद्ययंत्र की खासियत क्या है?
नल तरंग में अलग-अलग लंबाई की धातु की नलियों से सुर निकाले जाते हैं। इसमें बंदूक की नलियों का इस्तेमाल भी किया जाता है।
ज्योति चौधरी किन खास कार्यक्रमों में नल तरंग बजा चुकी हैं?
उन्होंने वर्ष 2023 में जी-20 से जुड़े कार्यक्रम में और 9 नवंबर 2023 को सतना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के दौरान नल तरंग बजाया था।
नल तरंग का संबंध किस संगीत परंपरा से है?
नल तरंग का संबंध मध्य प्रदेश के मैहर की प्रसिद्ध संगीत परंपरा से है।
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