श्रावस्ती में दुर्गा पूजा के दूसरे दिन प्रतिमा के नेत्र खुले
श्रावस्ती के अमवा स्थित इटवरिया चौराहा पर नवदुर्गा पूजा महोत्सव समिति की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर मां दुर्गा की प्रतिमा के नेत्र खोले गए।
श्रावस्ती के अमवा स्थित इटवरिया चौराहा पर नवदुर्गा पूजा महोत्सव समिति की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर मां दुर्गा की प्रतिमा के नेत्र खोले गए। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजन की यह प्रक्रिया संपन्न हुई। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडाल पहुंचे और मां दुर्गा के दर्शन-पूजन किए।
पूजन के दौरान भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन भी हुआ। इससे पूरा पूजा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया। श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की और आयोजन में भाग लिया।
पंडित पंकज पाण्डेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। मुख्य यजमान अनोखीलाल ने सपत्नीक पूजा-अर्चना की। पूजा महोत्सव के आयोजन की व्यवस्थाएं समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने संभालीं।
समिति के संरक्षक हृदयराम यादव के मार्गदर्शन में अध्यक्ष अतुल पाण्डेय, व्यवस्थापक अंकुर पाण्डेय सहित समिति के पदाधिकारी और सदस्य पूरे आयोजन में व्यवस्थाओं को देखते रहे। श्रद्धालुओं के लिए पूजा और दर्शन की व्यवस्था बनाए रखने पर भी समिति का ध्यान रहा।
समिति अध्यक्ष अतुल पाण्डेय ने कहा कि मां दुर्गा का यह महोत्सव सभी ग्रामवासियों, माताओं-बहनों और श्रद्धालुओं के सहयोग एवं आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास है कि सभी भक्तों को शांतिपूर्ण माहौल में मां के दर्शन का अवसर मिले।
अतुल पाण्डेय ने आयोजन में सहयोग के लिए समस्त ग्रामवासियों, समिति के सदस्यों और सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद स्थानीय पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया। स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी और श्रद्धालुओं के सहयोग से द्वितीय दिवस का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती में दुर्गा पूजा के दूसरे दिन क्या हुआ?
अमवा के इटवरिया चौराहा स्थित पूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा के नेत्र खोले गए।
प्रतिमा के नेत्र खोलने की पूजा कैसे संपन्न हुई?
वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न हुई।
पूजा के दौरान और कौन-कौन से कार्यक्रम हुए?
भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन हुआ, जिससे पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया।
पूजन किसने कराया और मुख्य यजमान कौन रहे?
पंडित पंकज पाण्डेय ने पूजन कराया और मुख्य यजमान अनोखीलाल ने सपत्नीक पूजा-अर्चना की।
दूसरे दिन का कार्यक्रम कैसा रहा?
स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी और श्रद्धालुओं के सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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