बरई गांव की मुख्य गली में घुटनों तक गंदा पानी, ग्रामीण परेशान
संभल/चंदौसी के ब्लॉक बनियाखेड़ा स्थित ग्राम बरई में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है। गांव की मुख्य गली में नाली का गंदा पानी भर गया है। इससे इंटरलॉकिंग सड़क तालाब में तब्दील हो गई है।
संभल/चंदौसी के ब्लॉक बनियाखेड़ा स्थित ग्राम बरई में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है। गांव की मुख्य गली में नाली का गंदा पानी भर गया है। इससे इंटरलॉकिंग सड़क तालाब में तब्दील हो गई है। गंदगी और जलभराव के कारण ग्रामीणों के लिए गली से गुजरना भी मुश्किल हो गया है।
उपलब्ध तस्वीर में गली के अंदर घुटनों तक गंदा पानी भरा दिखाई दे रहा है। नालियों की सफाई नहीं होने के कारण पानी सड़क पर बह रहा है। कई जगह इंटरलॉकिंग सड़क टूट गई है। सड़क पर कीचड़ भी जमा है। इससे पहले से खराब स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य गली में लंबे समय से गंदा पानी जमा है। नालियों की सफाई नहीं होने से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों के चलने-फिरने के लिए यही रास्ता इस्तेमाल होता है, लेकिन जलभराव के कारण उन्हें गंदे पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है।
गंदे पानी के जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बच्चों की सेहत को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बच्चे इसी गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। इससे डेंगू, मलेरिया और चर्म रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। तस्वीर में कुछ बच्चे गंदगी के पास ही बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर रोष है। उनका आरोप है कि सफाई व्यवस्था को लेकर कई बार ग्राम प्रधान और सचिव से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के मुताबिक सफाई कर्मचारी भी गांव में नियमित रूप से नहीं आते। इस वजह से नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है और गंदा पानी सड़क पर जमा हो रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल नालियों की सफाई कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जल निकासी की व्यवस्था को भी दुरुस्त कराया जाए, ताकि गली में जमा गंदा पानी हट सके और ग्रामीणों को आने-जाने में हो रही परेशानी खत्म हो।
गांव में जलभराव के साथ महिला स्वच्छता परिसर की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। शासन गांव-गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए काम कर रहा है और महिलाओं के लिए स्वच्छता परिसर बनवा रहा है। लेकिन ब्लॉक बनियाखेड़ा की ग्राम पंचायत बरई में ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया महिला स्वच्छता परिसर बनने के बाद से ही ताले में बंद पड़ा है।
स्वच्छता परिसर के चारों ओर गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। तस्वीर में परिसर के गेट पर बड़ा ताला लटका साफ दिखाई दे रहा है। भवन के सामने और आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आई है। जगह-जगह कूड़ा-कचरा भी पड़ा हुआ है। परिसर के आसपास की स्थिति से साफ है कि यहां रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
भवन की दीवारों पर स्वच्छता से जुड़े नारे लिखे हुए हैं। इनमें “शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं” और “स्वच्छता की ओर एक कदम” जैसे नारे शामिल हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जमीन पर स्थिति इन नारों से बिल्कुल अलग है। परिसर बंद है और महिलाएं आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
परिसर पर केयरटेकर का नाम और उसके खुलने का समय भी लिखा हुआ है। वहां सुबह 5 से 10 बजे और शाम 4 से 8 बजे तक खुलने का समय दर्ज है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि परिसर कभी खुलता ही नहीं है। इसी वजह से ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि केयरटेकर की व्यवस्था सिर्फ कागजों में चल रही है या नहीं।
ग्रामीणों ने बताया कि लाखों की लागत से बने इस परिसर का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। देखरेख नहीं होने के कारण भवन जर्जर हो रहा है। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ने लगा है। परिसर के चारों तरफ झाड़ियां, घास और कूड़ा जमा है, जबकि इसका निर्माण महिलाओं की सुविधा के लिए किया गया था।
स्वच्छता परिसर की दीवार पर ग्राम प्रधान और सचिव का नाम भी लिखा हुआ है। इसको लेकर ग्रामीणों का सवाल है कि जब शौचालय को बंद ही रखना था तो लाखों रुपये क्यों खर्च किए गए। ग्रामीण यह भी पूछ रहे हैं कि स्वच्छ भारत मिशन का पैसा आखिर कहां जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संभल से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने महिला स्वच्छता परिसर को तत्काल चालू कराने और मामले में दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सफाई व्यवस्था और बंद पड़े परिसर, दोनों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बरई गांव की मुख्य गली की स्थिति कैसी है?
मुख्य गली में घुटनों तक नाली का गंदा पानी भरा है और इंटरलॉकिंग सड़क तालाब जैसी हो गई है।
जलभराव से ग्रामीणों को क्या परेशानी हो रही है?
ग्रामीणों को आने-जाने के लिए गंदे पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
गंदे पानी से कौन-कौन सी बीमारियों का खतरा है?
गंदे पानी के कारण डेंगू, मलेरिया और चर्म रोग फैलने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने नालियों की तुरंत सफाई और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
महिला स्वच्छता परिसर की स्थिति क्या है?
महिला स्वच्छता परिसर बनने के बाद से बंद है। उसके आसपास गंदगी और झाड़ियां हैं, जिससे महिलाएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
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