News Darpan भारत का डिजिटल दर्पण
ताज़ा
Uttar Pradesh General कानपुर नगर

कानपुर के मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को मिट्टी से बनाने की अपील कर रहे हैं

कानपुर में गणेश चतुर्थी से पहले भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंज रहे हैं और मूर्तिकारों ने इस बार गणेश जी की प्रतिमाओं को अनोखा और आकर्षक रूप

कानपुर के मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को मिट्टी से बनाने की अपील कर रहे हैं
Image credit: News Darpan Team

कानपुर में गणेश चतुर्थी से पहले भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंज रहे हैं और मूर्तिकारों ने इस बार गणेश जी की प्रतिमाओं को अनोखा और आकर्षक रूप दिया है।

कोई मूर्तिकार 18 फीट की विशाल प्रतिमा बना रहा है तो कोई पंचगव्य और अनाज से ईको-फ्रेंडली मूर्ति तैयार कर रहा है। कई प्रतिमाओं में चार धाम की गुफा, बाल लीलाओं और स्वचालित झांकियों का रूप दिया गया है। ये सभी लोगों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

शहर के वरिष्ठ मूर्तिकारों ने लोगों से अपील की है कि वे पीओपी यानी प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय सिर्फ मिट्टी की प्रतिमा की ही स्थापना और पूजा करें।

मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी की प्रतिमा ही शुद्ध और सनातनी परंपरा के अनुसार है। मिट्टी से बनी मूर्ति पानी में पूरी तरह घुल जाती है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती। उन्होंने बताया कि वे खुद मूर्ति में गोबर, पंचगव्य और अनाज मिलाते हैं ताकि विसर्जन के बाद वह खाद और जलीय जीवों का भोजन बन सके।

मूर्तिकारों ने हाल के वर्षों में विसर्जन के दौरान देखने को मिल रही लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सड़कों पर मूर्तियां खंडित अवस्था में पड़ी मिलती हैं। ट्रकों में एक के ऊपर एक लादकर मूर्तियों को ले जाया जाता है। नाले-नालियों में विसर्जन कर दिया जाता है।

एक मूर्तिकार ने कहा कि यह सनातन धर्म का अपमान है। उन्होंने कहा कि वे महीनों मेहनत से भगवान का रूप बनाते हैं और लोग फैशन के तौर पर डीजे पर नाचते हुए मूर्ति को अपमानजनक तरीके से विसर्जित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। विसर्जन श्रद्धा से और विधि-विधान से होना चाहिए, दिखावे से नहीं।

मूर्तिकारों ने प्रशासन से भी मांग की है। उन्होंने कहा कि तालाबों और गंगा में पीओपी मूर्तियों के विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगे। सिर्फ मिट्टी की प्रतिमाओं को ही अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे आस्था और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सकेगी।

शहर में इस बार की तैयारियां पिछले सालों से अलग और खास नजर आ रही हैं। मूर्तिकारों की यह अपील भक्तों और प्रशासन दोनों के लिए एक संदेश बनकर सामने आई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर के मूर्तिकार गणेश की मूर्तियों के लिए क्या अपील कर रहे हैं?

मूर्तिकार लोगों से कह रहे हैं कि POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस) की बजाय सिर्फ मिट्टी की गणेश प्रतिमा ही स्थापित करें। मिट्टी की मूर्ति पानी में पूरी तरह घुल जाती है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती।

मूर्तिकार मिट्टी में क्या-क्या मिलाते हैं?

मूर्तिकार मूर्ति में गोबर, पंचगव्य और अनाज मिलाते हैं ताकि विसर्जन के बाद वह खाद बन सके और जलीय जीवों का भोजन बन सके।

इस बार कानपुर में गणेश मूर्तियों में क्या खास बात है?

इस बार मूर्तिकारों ने कई खास चीजें की हैं - कोई 18 फीट की विशाल प्रतिमा बना रहा है, कोई ईको-फ्रेंडली मूर्ति बना रहा है, और कई प्रतिमाओं में चार धाम की गुफा, बाल लीलाएं और स्वचालित झांकियां बनाई गई हैं।

मूर्तिकारों को विसर्जन के तरीके पर क्या शिकायत है?

मूर्तिकार कहते हैं कि हाल के सालों में विसर्जन में लापरवाही बढ़ी है - मूर्तियां सड़कों पर खंडित पड़ी रहती हैं, ट्रकों में लादकर ले जाई जाती हैं और नाले-नालियों में विसर्जित कर दी जाती हैं। वे कहते हैं कि विसर्जन श्रद्धा से होना चाहिए, न कि दिखावे से।

#environment#ganesh chaturthi#कानपुर#मिट्टी की मूर्ति#मूर्तिकार

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

  1. 1

    बहराइच में महिला की अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल कर पांच लाख रुपये वसूलने वाला …

  2. 2

    भाजपा ने निष्कासित नेता की सपा एंट्री पर अखिलेश यादव को घेरा

  3. 3

    गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले बहराइच में डीएम-एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

  4. 4

    बहराइच: भावुक सुसाइड नोट लिखकर की युवक ने की आत्महत्या

  5. 5

    थाना रुपईडीहा क्षेत्र में शातिर अपराधियों से हुई रूपईडीहा पुलिस की मुठभेड़।

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।

टिप्पणियाँ समीक्षा के बाद प्रकाशित होती हैं।