कालाकुंड में पहाड़ी नदी पर 4 ब्रिजों के निर्माण की तैयारी तेज
इंदौर, 12 अक्टूबर 2026 इंदौर से 20 किमी दूर स्थित कालाकुंड अब वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो रहा है।
इंदौर, 12 अक्टूबर 2026
इंदौर से 20 किमी दूर स्थित कालाकुंड अब वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो रहा है। प्राकृतिक वादियों, शांत आदिवासी गांवों और अपनी अनोखी मिठाई कलाकंद के लिए प्रसिद्ध यह इलाका आदर्श पर्यटन ग्राम के तौर पर तैयार किया जा रहा है। यहां घने जंगल और वन औषधियों को बचाते हुए पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
कालाकुंड में मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण यानी एमपीआरडीए ने लगभग 10 किमी की बारहमासी सड़क का काम पूरा कर लिया है। सड़क का निर्माण वर्ष 2024 में पूरा हुआ था। इससे इलाके तक पहुंच आसान हुई है, लेकिन पहाड़ी नदी पर ब्रिज नहीं होने की वजह से बारिश के समय आवागमन में परेशानी बनी हुई है।
बताया गया है कि पहाड़ी नदी के कारण यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसी वजह से पर्यटक भी इस क्षेत्र में आने से बचते हैं। नदी पर ब्रिज बनने के बाद कालाकुंड और आसपास के गांवों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। एक नदी पर 4 ब्रिजों के निर्माण की तैयारी की जा रही है और इसका काम इसी वर्ष शुरू होने की स्थिति तक पहुंच गया है।
एमपीआरडीए के महाप्रबंधक श्री लोकेंद्र मंडलोई ने बताया कि वन औषधियों से भरपूर इस क्षेत्र के घने जंगल को बचाते हुए सड़क का निर्माण किया गया है। उनका कहना है कि सड़क का काम वर्ष 2024 में पूरा हो चुका है। अब ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
30 मई को इसी गांव में कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने रात्रि चौपाल लगाई थी। रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने नदी पर ब्रिज निर्माण की मांग रखी थी। ग्रामीणों की पहली और सबसे अहम मांग ब्रिज बनाने की थी। इस मांग को पूरा करने के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। विभाग के अनुसार, अब 4 ब्रिजों के निर्माण के लिए निविदाओं की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और इसी वर्ष निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
विंध्यांचल पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों के बीच बसे 7 से अधिक आदिवासी गांवों में 20 से अधिक होम स्टे बने हुए हैं। इन गांवों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटक यहां ग्रामीण परिवेश और जीवनशैली का अनुभव करते हैं। स्थानीय माहौल, पहाड़ी क्षेत्र और जंगल के बीच रहने का अनुभव लेने के लिए लोग इन होम स्टे में ठहरते हैं।
कालाकुंड पहुंचने के लिए पर्यटकों के पास पातालपानी से हेरिटेज ट्रेन का विकल्प पहले से मौजूद है। हालांकि, जो पर्यटक अपने निजी चार पहिया या दो पहिया वाहन से यहां आना चाहते हैं, वे ब्रिज नहीं होने के कारण बारिश के समय कई बार पहुंच नहीं पाते। बारिश में नदी का रास्ता बाधित होने से निजी वाहनों की आवाजाही रुक जाती है।
ब्रिज नहीं होने का असर सिर्फ पर्यटकों पर नहीं पड़ता। बारिश के दौरान ग्रामीण आदिवासियों का शहर से संपर्क भी कट जाता है। ऐसे में 4 ब्रिज बनने के बाद ग्रामीणों और पर्यटकों, दोनों को आवागमन का एक और विकल्प मिल सकेगा। इससे बड़ी आबादी इस सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर पाएगी।
कालाकुंड गांव में कई गाय और भैंस पालक कलाकंद बनाने में जुटे हैं। गाय और भैंस के शुद्ध दूध तथा कम शक्कर से पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली दानेदार कलाकंद यहां का खास आकर्षण है। यह मिठाई मुंह में घुल जाने वाली मिठाई के रूप में प्रसिद्ध है। गांव की पहचान इस पारंपरिक मिठाई से भी जुड़ी हुई है।
कालाकुंड को आदर्श पर्यटन ग्राम बनाने की दिशा में शासन और प्रशासन की ओर से लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के तहत घने जंगल और वनौषधियों को बचाते हुए बारह मासी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है। अब नदी पर ब्रिज बनने से सड़क संपर्क और बेहतर होने की उम्मीद है।
4 ब्रिज बनने से पहाड़ियों में बसे 8 गांवों के ग्रामीणों की पहुंच स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ियों और राशन दुकानों तक आसान हो सकेगी। पहाड़ी नदी चोरल बारिश होने पर कभी भी मार्ग अवरुद्ध कर देती है। इसके कारण हर समय आवागमन बाधित होता रहा है। ब्रिज बनने के बाद इन गांवों के लोगों को जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
कालाकुंड में एक संभागीय स्काउट गाइड का कैंपिंग केंद्र भी बना हुआ है। ब्रिज और सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद इस केंद्र का समुचित उपयोग भी संभावित है। विभाग के महाप्रबंधक श्री मंडलोई ने बताया कि 4 ब्रिजों के निर्माण के लिए निविदाओं की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कालाकुंड कहां स्थित है?
कालाकुंड इंदौर से करीब 20 किमी दूर स्थित है।
कालाकुंड में कितने ब्रिज बनाए जाएंगे?
पहाड़ी नदी पर 4 ब्रिज बनाए जाएंगे।
ब्रिज निर्माण का काम कब शुरू होने की उम्मीद है?
विभाग के अनुसार, 4 ब्रिजों का निर्माण इसी वर्ष शुरू किया जाएगा।
ब्रिज बनने से किसे फायदा होगा?
ब्रिज बनने से ग्रामीणों और पर्यटकों, दोनों के लिए कालाकुंड और आसपास के गांवों तक पहुंच आसान होगी।
बारिश के समय कालाकुंड पहुंचने में क्या परेशानी होती है?
बारिश में नदी का रास्ता बाधित होने से निजी वाहनों की आवाजाही रुक जाती है और ग्रामीणों का शहर से संपर्क भी कट जाता है।
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