हिमाचल में स्थानीय निधि लेखा समिति ने लंबित ऑडिट पैराओं की समीक्षा की
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक आज बचत भवन, बिलासपुर में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति संजय रत्न ने की।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक आज बचत भवन, बिलासपुर में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति संजय रत्न ने की। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े लंबे समय से लंबित ऑडिट पैरों के समयबद्ध निपटारे पर जोर दिया गया। सभापति ने अधिकारियों को समिति के सवालों के सही और तथ्यात्मक जवाब समय पर देने के निर्देश दिए।
बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायक डॉ. हंसराज, इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन, कुलदीप राठौर और विवेक शर्मा मौजूद रहे। उपायुक्त राहुल कुमार ने समिति का स्वागत किया। बैठक में उपायुक्त राहुल कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान, अतिरिक्त उपायुक्त रूपिंदर कौर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान राज्य लेखा परीक्षा विभाग की ओर से विभिन्न विभागों से संबंधित अब तक के लंबित ऑडिट पैरों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने इन मामलों में विभागों की ओर से दिए जाने वाले जवाब, लंबित स्थिति और निपटारे की प्रक्रिया की समीक्षा की।
इसके अलावा पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय के अनुमानों की भी समीक्षा की गई। इस अवधि में करवाए गए विकास कार्यों पर भी समिति ने चर्चा की। पंचायती राज विभाग और शहरी विकास विभाग से संबंधित ऑडिट पैरों को बैठक में विशेष रूप से विस्तार से उठाया गया।
सभापति संजय रत्तन ने कहा कि स्थानीय निधि लेखा समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की विभिन्न परियोजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि परियोजनाएं शहरी निकायों से जुड़ी हों, पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित हों या किसी अन्य विभाग से जुड़ी हों, सभी काम समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के साथ-साथ सरकारी धन का उचित और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी जरूरी है। सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसका नियमित और सही ऑडिट होना आवश्यक है। ऑडिट के जरिए मामलों की स्थिति और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जानकारी सामने आती है।
सभापति ने कहा कि कई मामलों में समिति को संबंधित विभागों से वर्षों तक जवाब नहीं मिलते हैं। जवाब नहीं मिलने के कारण ऑडिट पैरे लंबे समय तक लंबित रहते हैं। इस बीच कई अधिकारी स्थानांतरित हो जाते हैं या सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इसके बावजूद लंबित पैरों का समयबद्ध निपटारा नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से अटके ऐसे मामलों का निपटारा करना समिति की प्राथमिकताओं में शामिल है। संजय रत्तन ने कहा कि ऑडिट पैरों से जुड़े जवाब हासिल करने में अनावश्यक देरी के कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। फील्ड स्तर से जवाब मांगे जाने के बाद भी कई बार संबंधित अधिकारी समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं करवाते।
उन्होंने कहा कि फील्ड स्तर पर जवाब नहीं मिलने का असर सचिवालय स्तर पर भी पड़ता है और वहां भी जवाब लंबित रहते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए समिति ने फील्ड में जाकर अधिकारियों से सीधे संवाद करने का फैसला किया है। समिति लंबे समय से लंबित मामलों को मौके पर समझने और उनके निपटारे की दिशा में काम करेगी।
सभापति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति के सामने पूछे जाने वाले सवालों के सही और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने कहा कि गलत तथ्य पेश करना सदन की अवमानना का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
उन्होंने साफ किया कि जवाब देने के लिए तय समय का पालन करना जरूरी है। इसके लिए समय सीमा तय की जा सकती है, लेकिन जवाब देने में वर्षों तक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को समिति के सामने मामलों की सही स्थिति रखनी होगी, ताकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित फैसला लिया जा सके।
संजय रत्तन ने कहा कि सरकार लोगों की सुविधा के लिए अलग-अलग योजनाएं और कार्यक्रम चलाती है। इन योजनाओं और कार्यक्रमों को आमजन तक पहुंचाने में अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने अधिकारियों से अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ पालन करने का आह्वान किया।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे कार्यालयीन काम को केवल औपचारिकता न समझें। अधिकारियों को इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व मानकर काम करना चाहिए और विकास कार्यों को गति देने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। समिति ने अधिकारियों से लंबित ऑडिट पैरों पर समय पर जवाब देने और मामलों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर करने को कहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक कहां हुई?
बैठक आज बचत भवन, बिलासपुर में हुई।
बैठक की अध्यक्षता किसने की?
बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति संजय रत्तन ने की।
बैठक में किन मामलों की समीक्षा की गई?
विभागों से जुड़े लंबे समय से लंबित ऑडिट पैरों, पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय अनुमानों और विकास कार्यों की समीक्षा की गई।
सभापति ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
उन्होंने अधिकारियों से समिति के सवालों के सही और तथ्यात्मक जवाब समय पर देने को कहा।
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