हाथरस अस्पताल पर शव वाहन न देने का आरोप, ई-रिक्शा से पहुंचाया शव
हाथरस जिला अस्पताल में बुधवार दोपहर शव वाहन उपलब्ध नहीं होने का आरोप सामने आया। करीब 40 वर्षीय यासीन की मौत के बाद उनके परिजनों को शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला।
हाथरस जिला अस्पताल में बुधवार दोपहर शव वाहन उपलब्ध नहीं होने का आरोप सामने आया। करीब 40 वर्षीय यासीन की मौत के बाद उनके परिजनों को शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला। परिजनों का आरोप है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल की ओर से वाहन की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
इसके बाद परिजनों को निजी खर्च पर ई-रिक्शा किराए पर मंगाना पड़ा। उसी ई-रिक्शा में शव रखकर उन्हें घर ले जाना पड़ा। इस पूरी घटना के दौरान परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, मृतक यासीन सासनी बिजली घर क्षेत्र के रहने वाले थे। उनके परिजन रमजानी ने बताया कि यासीन की उम्र करीब 40 वर्ष थी और वह पहले से बीमार चल रहे थे। रमजानी के मुताबिक, कुर्सी से गिरने के बाद यासीन की मौत हो गई।
यासीन की मौत के बाद परिजन शव को घर ले जाने के लिए जिला अस्पताल में वाहन की व्यवस्था कराने की कोशिश करने लगे। उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग की।
रमजानी का आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों से कई बार वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने संबंधित अधिकारी से मिलने की भी कोशिश की, ताकि शव को घर ले जाने के लिए मदद मिल सके।
हालांकि, परिजनों के मुताबिक संबंधित अधिकारी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। कर्मचारियों से वाहन उपलब्ध कराने की बात कहने पर उन्हें खुद ही वाहन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। इसके बाद परिजनों के सामने शव को घर ले जाने के लिए निजी स्तर पर इंतजाम करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
काफी कोशिश के बाद परिजनों ने निजी खर्च पर ई-रिक्शा किराए पर मंगाया। फिर शव को ई-रिक्शा में रखकर घर ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल से वाहन नहीं मिलने के कारण उन्हें इस तरह शव ले जाना पड़ा।
इस घटना के बाद जिला अस्पताल में जरूरतमंद परिवारों के लिए शव वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आपात स्थिति में परिजनों को मिलने वाली सहायता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
हालांकि, इस मामले में जिला अस्पताल प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वाहन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति क्यों बनी और परिजनों को ई-रिक्शा से शव ले जाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस जिला अस्पताल में क्या आरोप सामने आया?
आरोप है कि यासीन की मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिजनों ने शव घर कैसे पहुंचाया?
परिजनों ने निजी खर्च पर ई-रिक्शा किराए पर लिया और उसी में शव रखकर घर ले गए।
मृतक यासीन की मौत कैसे हुई?
परिजन रमजानी के मुताबिक, कुर्सी से गिरने के बाद यासीन की मौत हो गई।
इस मामले में जिला अस्पताल प्रशासन का क्या कहना है?
अभी अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।
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