हाथरस में दिव्यांगजनों को 367 सहायक उपकरण बांटे गए
हाथरस में दिव्यांगजनों को 352 सहायक उपकरण वितरित किए गए। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के तत्वावधान में सोमवार को जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम, हाथरस में कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम
हाथरस में दिव्यांगजनों को 352 सहायक उपकरण वितरित किए गए। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के तत्वावधान में सोमवार को जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम, हाथरस में कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सदर विधायक एवं महिला एवं बाल विकास संबंधी संयुक्त समिति की सभापति अंजुला सिंह माहौर ने की।
कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण दिए गए। वितरित किए गए उपकरणों में हस्तचालित ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कान की मशीन, ब्लाइंड स्टिक, बैसाखी, एमआर किट और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल शामिल रहे। इन उपकरणों के मिलने से लाभार्थियों को आवागमन, रोजमर्रा के काम और अन्य जरूरी गतिविधियों में सहूलियत मिलेगी। विभाग के अनुसार, इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में 140 हस्तचालित ट्राईसाइकिल, 21 व्हीलचेयर, 38 कान की मशीन, दो ब्लाइंड स्टिक, 128 बैसाखी, 23 एमआर किट और 15 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित किए गए। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए एमआर किट दी गई। बैटरी से चलने वाली ट्राईसाइकिल, श्रवण यंत्र और दूसरे सहायक उपकरण भी लाभार्थियों को उपलब्ध कराए गए।
कार्यक्रम में सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राणा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा, राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह, जिलाधिकारी सत्य प्रकाश पटेल और मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का बुके भेंटकर तथा पटका पहनाकर स्वागत किया गया।
सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर ने लाभार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को आसान बनाने और रोजमर्रा की मुश्किलें कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके मुताबिक, शारीरिक अक्षमता किसी व्यक्ति की योग्यता, प्रतिभा और आगे बढ़ने की क्षमता का आकलन नहीं कर सकती।
अंजुला सिंह माहौर ने सूरदास जी और महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने उन दिव्यांगजनों से पंजीकरण कराने की अपील की, जिन्हें अभी तक सहायक उपकरण नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के बाद उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राणा ने कहा कि दिव्यांगजनों को सहयोग देना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है और हर व्यक्ति को आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
वीरेंद्र सिंह राणा ने अधिकारियों से जनपद के प्रत्येक गांव में सर्वे कराने और दिव्यांगजनों की सूची तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने दिव्यांगजनों से भी आग्रह किया कि पंजीकरण या योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा और राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से दिव्यांगजनों को सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग तरह के सहायक उपकरण दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन उपकरणों में बैटरी चालित ट्राईसाइकिल, श्रवण यंत्र और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एमआर किट सहित अन्य उपकरण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं से दिव्यांगजनों को रोजमर्रा के जीवन में सहूलियत मिलेगी। साथ ही वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। कार्यक्रम में दिए गए उपकरणों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की जरूरतों के अनुसार उन्हें सहायता उपलब्ध कराना रहा।
जिलाधिकारी सत्य प्रकाश पटेल ने कहा कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और जरूरतों के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी विशेषताएं और क्षमताएं होती हैं। इसलिए दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग का भाव रखना चाहिए। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए चल रही योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी साझा की।
सत्य प्रकाश पटेल ने बताया कि दिव्यांगजनों को पेंशन सहित अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, देखभाल, पुनर्वास और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
जिलाधिकारी ने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के माध्यम से बचपन डे-केयर जैसी सुविधाएं संचालित की जाती हैं। इन सुविधाओं में छोटे बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल, शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जनपद में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय स्थापित करने की जरूरत सामने आती है, तो जनप्रतिनिधियों के सहयोग से शासन स्तर पर इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी विशाल कुमार ने कहा कि सहायक उपकरण वितरण का उद्देश्य दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन को आसान बनाना, उनकी कार्यक्षमता में सुधार करना और उन्हें सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि एमआर किट विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा और अध्ययन संबंधी गतिविधियों में सहायक होगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई में सर्वे कराने के बाद दिसंबर में करीब 400 लाभार्थियों को सहायक उपकरण वितरित किए गए थे। इसी क्रम में इस वर्ष जून में भी लगभग 400 लाभार्थियों को उपकरण उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को सहायता उपलब्ध कराने की इस पहल को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिला स्पोर्ट्स अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में दिव्यांगजनों को कितने सहायक उपकरण बांटे गए?
कार्यक्रम में कुल 367 सहायक उपकरण बांटे गए।
सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
कार्यक्रम जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम, हाथरस में आयोजित हुआ।
दिव्यांगजनों को कौन-कौन से उपकरण दिए गए?
हस्तचालित ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कान की मशीन, ब्लाइंड स्टिक, बैसाखी, एमआर किट और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल दी गईं।
विशेष जरूरत वाले बच्चों को क्या दिया गया?
विशेष जरूरत वाले बच्चों को एमआर किट दी गई।
जिन दिव्यांगजनों को अभी तक उपकरण नहीं मिले हैं, वे क्या करें?
उन्हें पंजीकरण कराना चाहिए, ताकि जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
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