गाजियाबाद के सोशल एक्टिविस्ट तनुज गंभीर एमएलसी शिक्षक, मेरठ सहारनपुर मंडल से उतरे मैदान में
तनुज गंभीर ने एमएलसी शिक्षक मेरठ-सहारनपुर खंड से नामांकन किया है। उनका कहना है कि यह चुनाव पार्टी का नहीं, शिक्षकों के हित का है।
गाजियाबाद के सोशल एक्टिविस्ट और समाजसेवी तनुज गंभीर एमएलसी शिक्षक, मेरठ-सहारनपुर खंड के चुनाव मैदान में उतर गए हैं। उन्होंने 30 सितंबर को नामांकन पत्र (पर्चा) लिया और 6 अक्टूबर को पर्चा भरा। तनुज गंभीर के मुताबिक उनका पर्चा स्वीकृत हो चुका है।
तनुज गंभीर पिछले 9 वर्षों से समाजसेवा से जुड़े हैं और इस दौरान गाजियाबाद पुलिस और प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करते हुए उन्होंने कई बार देखा कि शिक्षक वर्ग पर बहुत ज्यादा वर्क ओवरलोड है और शिक्षक कई तरह की समस्याओं से गुजर रहे हैं।

तनुज गंभीर का कहना है कि शिक्षकों की बात सुनने वाला कोई नहीं है। शिक्षक अपनी समस्याएं कहां रखें, इसके लिए न तो कोई पोर्टल है और न ही कोई स्पष्ट नीति बनाई गई है। इसी को देखते हुए उन्होंने एमएलसी शिक्षक मेरठ-सहारनपुर खंड से चुनाव लड़ने का फैसला किया।
उनके समर्थकों का दावा है कि गाजियाबाद और आसपास के अन्य जिलों में तनुज गंभीर की मजबूत जमीनी पकड़ है और बड़ी संख्या में शिक्षकों से उनका अच्छा संपर्क है। समर्थकों का कहना है कि अपने व्यवहार के दम पर वे मौजूदा एमएलसी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।
तनुज गंभीर ने बताया कि यह चुनाव किसी पार्टी से संबंधित नहीं है। उनके अनुसार यह चुनाव वास्तव में शिक्षकों के हित के लिए है और इसे वे शिक्षकों की जीत का चुनाव मानते हैं।
एमएलसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में शिक्षक ही मतदाता होते हैं। मेरठ-सहारनपुर खंड में गाजियाबाद समेत कई जिले आते हैं, ऐसे में शिक्षकों से जुड़े मुद्दे इस चुनाव में अहम रहने वाले हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तनुज गंभीर ने किस चुनाव के लिए नामांकन किया है?
तनुज गंभीर ने एमएलसी शिक्षक, मेरठ-सहारनपुर खंड के चुनाव के लिए नामांकन किया है।
तनुज गंभीर ने नामांकन पत्र कब लिया और कब भरा?
उन्होंने 30 सितंबर को नामांकन पत्र लिया और 6 अक्टूबर को पर्चा भरा।
तनुज गंभीर कितने समय से समाजसेवा से जुड़े हैं?
तनुज गंभीर पिछले 9 वर्षों से समाजसेवा से जुड़े हैं।
एमएलसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदाता कौन होते हैं?
इस चुनाव में सिर्फ शिक्षक मतदाता होते हैं।
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