गाजियाबाद के संस्कार उपवन में कन्या पूजन, 231 कन्याओं ने लिया प्रसाद
शारदीय नवरात्र पर संस्कार उपवन में कन्या पूजन और भोज हुआ। आयोजकों के अनुसार, 231 कन्याओं में 90 प्रतिशत की आयु 10 वर्ष या उससे कम थी।
गाजियाबाद के संस्कार उपवन में शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में कन्या पूजन और भोज का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार, उत्सव में 231 कन्याओं ने भाग लिया और भोजन प्रसाद ग्रहण किया। इनमें 90 प्रतिशत कन्याएं 10 वर्ष या उससे कम आयु की थीं। कार्यक्रम में श्रद्धेय गुरुजी श्री नवनीतप्रिय दास जी का सान्निध्य रहा। संस्कार उपवन परिवार के सभी सदस्यों ने आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई।

आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में क्रम से संकीर्तन, चुनरी समर्पण, चरण प्रक्षालन, भोजन और आरती हुई। इस तरह कन्या पूजन के साथ भोजन प्रसाद का क्रम भी आयोजन का हिस्सा रहा। उपलब्ध तस्वीरों में हरे लॉन पर लाल रंग की छोटी, डिजाइनदार चटाइयों पर बैठे बच्चे दिखाई देते हैं। उनके आसपास वयस्क खड़े हैं और पीछे गुलाबी तथा सफेद कपड़े की सजावट नजर आती है।

एक अन्य तस्वीर में गुलाबी और सफेद छतरी के नीचे वयस्क बच्चों के सामने खड़े दिखाई देते हैं। कुछ लोगों ने पीले या लाल रंग के अंगवस्त्र पहने हैं और एक व्यक्ति के हाथ में धातु की थाली है। चरण प्रक्षालन की तस्वीर में लाल कुर्सी पर बैठे बच्चे के पैरों के नीचे धातु का पात्र रखा है। पास में घुटनों के बल बैठे व्यक्ति के हाथ में छोटा धातु का बर्तन दिखाई देता है।

भोज की तस्वीर में बच्चे लॉन पर बिछी चटाइयों पर बैठकर खानों वाली धातु की थालियों से भोजन करते नजर आते हैं। उनके आगे पानी के गिलास रखे हैं और वयस्क पंक्तियों के बीच उपस्थित हैं। कई बच्चों ने लाल और सुनहरे रंग के सजावटी हेडबैंड पहने हैं। तस्वीर में पीछे पौधे, पेड़ और गुलाबी-सफेद छतरी भी दिखाई देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कन्या पूजन और भोज का आयोजन कहां किया गया?
कन्या पूजन और भोज का आयोजन गाजियाबाद के संस्कार उपवन में किया गया।
कार्यक्रम में कितनी कन्याओं ने हिस्सा लिया?
कार्यक्रम में 231 कन्याओं ने हिस्सा लिया और भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में शामिल ज्यादातर कन्याओं की उम्र कितनी थी?
कार्यक्रम में शामिल 90 प्रतिशत कन्याएं 10 साल या उससे कम उम्र की थीं।
कार्यक्रम में कौन-कौन से आयोजन हुए?
कार्यक्रम में क्रम से संकीर्तन, चुनरी समर्पण, चरण प्रक्षालन, भोजन और आरती हुई।
कार्यक्रम में किसका सान्निध्य रहा?
कार्यक्रम में श्रद्धेय गुरुजी श्री नवनीतप्रिय दास जी का सान्निध्य रहा।
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