उज्जैन में जलते मकान से कूदे परिवार के तीन सदस्य बचाए गए
एमपी के उज्जैन के नागदा में आग से घिरे दो मंजिला मकान से दूसरी मंजिल पर फंसे पति-पत्नी और उनके बेटे की जान बच गई।
एमपी के उज्जैन के नागदा में आग से घिरे दो मंजिला मकान से दूसरी मंजिल पर फंसे पति-पत्नी और उनके बेटे की जान बच गई। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने पुलिस टीम और ग्रामीणों की मदद से तीनों को सुरक्षित बचाया। घटना गुरुवार रात करीब एक बजे की है।
बताया गया है कि थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान हाईवे स्थित कारतूस ढाबे के पास एक मकान में आग लगी दिखाई दी। आग की लपटों से मकान घिरा हुआ था। थाना प्रभारी ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर बचाव की कोशिश शुरू की।
इस मकान के नीचे ग्रीस और ऑयल की दुकान थी। वहीं, मकान की दूसरी मंजिल पर गैस के दो सिलेंडर रखे थे। आग तेजी से फैल रही थी और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया था। ऐसे हालात में दूसरी मंजिल पर फंसे पदम सिंह, उनकी पत्नी नेहा कुंवर और बेटे युजीत सिंह को अपनी जान बचाने के लिए नीचे कूदना पड़ा।
मकान के नीचे थाना प्रभारी, पुलिसकर्मी और ग्रामीण मौजूद थे। उन्होंने तीनों को सुरक्षित संभाल लिया। इस तरह आग के बीच दूसरी मंजिल से कूदे परिवार के तीनों सदस्यों की जान बच गई और जनहानि टल गई।
इस बचाव अभियान में एएसआई प्रभुलाल मुनिया, डायल 112 की टीम और नगर रक्षा समिति के सदस्य राजेश मोरवाल सहित अन्य लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। थाना प्रभारी और पूरी टीम की सूझबूझ और साहस से परिवार के तीनों सदस्यों को सुरक्षित बचाया जा सका।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उज्जैन में मकान में आग कब लगी?
यह घटना गुरुवार रात करीब एक बजे नागदा में हुई।
आग लगे मकान में कौन फंसे थे?
दूसरी मंजिल पर पदम सिंह, उनकी पत्नी नेहा कुंवर और बेटा युजीत सिंह फंसे थे।
परिवार के तीनों सदस्यों की जान कैसे बची?
बाहर निकलने का रास्ता बंद होने पर वे दूसरी मंजिल से नीचे कूदे, जहां पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित संभाल लिया।
बचाव अभियान में किसने मदद की?
थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी, पुलिस टीम, डायल 112 की टीम और नगर रक्षा समिति के सदस्यों ने मदद की।
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