चंदौसी में शुरू हो रहा गणेश चौथ मेले का 62वां आयोजन, सर्वधर्म समभाव की मिसाल
चंदौसी में विश्व प्रसिद्ध गणेश चौथ मेले का आज से शुरू हो रहा है 62वां आयोजन, सर्वधर्म समभाव की मिसाल बनता है यह उत्सव चंदौसी।
चंदौसी। चंदौसी नगर में पिछले 62 साल से हर साल लोगों को गणेश चौथ मेला शुरू होने का इंतजार रहता है। नगर के प्रथम एमबीबीएस डॉक्टर स्व. गिरराज किशोर गुप्ता ने इस मेले की शुरुआत कभी छोटे से स्थान से शुरू की थी। जो समय के साथ साथ भव्य रूप लेता चला गया।
लंबे समय से मेला गणेश चौथ का आयोजन गणेश मैदान में किया जाता आ रहा है। मेला लगने के लिए नगरवासियों समेत आसपास के जिले के लोग भी हर साल उत्सुक नजर आते हैं। लाखों की संख्या में लोग हर साल इस मेले को और नगर में निकलने वाली विशाल रथयात्रा को देखने पहुंचते हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ इस मेले में 145 फीट ऊंची गणेश मूर्ति का अनावरण कर चुके हैं। शनिवार को इस भव्य मेले का शुभारंभ विधि विधान से किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष की भांति सबसे पहले प्रभु श्री गणेश की पालकी नगर में भ्रमण करेगी और उसके बाद गणेश मंदिर पर उसे विराजमान किया जाएगा।
उसके बाद शाम को पांचों धर्मों के प्रतिनिधि फीता काटकर मेले का शुभारंभ कर सर्वधर्म समभाव का सुंदर उदाहरण पेश करेंगे। हर साल लगने वाले इस मेले में सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारा निभाते हुए प्रतिभाग करते हैं। मुस्लिम समाज सहित अन्य धर्मों के लोग गणेश वंदना में शामिल होते हैं।
वहीं दूसरी ओर हिंदू धर्म के लोग गणेश मेले ग्राउंड में बनी मजार पर चादर पोशी कर सर्वधर्म एकता का संदेश देते हैं। यह परंपरा इस मेले की खूबसूरती को चार चांद लगा देती है। सभी धर्मों के लोगों की यह साझा भागीदारी इस मेले को खास बनाती है।
मेले के संस्थापक स्व. डॉ. गिरराज किशोर गुप्ता के पुत्र मनोज कुमार मीनू बताते हैं कि 62 वर्ष पूर्व गणेश मंदिर के स्थान पर एक हाथी का बच्चा कहीं से आकर बैठ गया था। काफी प्रयास के बाद भी वह वहां से नहीं हटा। उसे हटाने की जब हर कोशिश असफल हो गई तब उनके पिता ने उस स्थान पर गणेश मंदिर बनाने का वचन दिया।
जिसके बाद वह हाथी का बच्चा उठकर चला गया। दिए गए वचन के अनुसार उनके पिता गिरराज किशोर गुप्ता ने गणेश मंदिर की नींव रखी और एक छोटे से मेले से इसकी शुरुआत की। यह घटना इस मेले की स्थापना के पीछे की अनोखी कहानी है।
मीनू गुप्ता बताते हैं कि उनके पिता आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का मुफ्त इलाज करते थे। जो कुछ भी वह कमाते थे, उसमें से थोड़े थोड़े रुपए इकट्ठा करके अपनी जेब से हर साल मेले का आयोजन करते थे। उनकी यह मेहनत और लगन धीरे धीरे रंग लाई।
धीरे धीरे आसपास समेत दूर दराज से हजारों की संख्या में लोग मेला देखने पहुंचने लगे। मेले में उमड़ती भीड़ को देखते हुए बाद में गणेश मेला ग्राउंड में मेले का आयोजन शुरू किया गया। छोटे से शुरू हुआ यह मेला आज विश्व प्रसिद्ध बन चुका है।
मनोज कुमार मीनू बताते हैं कि पहले जब यातायात की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और यात्रा करने के साधन भी नहीं थे तब भी हजारों की संख्या में लोग काफी दूरी तय करके पैदल, घोड़ा गाड़ी, बैलगाड़ी आदि से परिवार सहित मेला देखने आते थे। रात भर मेले में भीड़ जुटी रहती थी। लोगों का यह उत्साह और श्रद्धा आज भी बरकरार है।
स्व. गिरराज किशोर गुप्ता भले ही आज हमारे बीच न हों लेकिन उनकी स्मृतियां आज भी सभी के बीच मौजूद हैं और हमेशा रहेंगी। वहीं उन्हीं के आशीर्वाद से हर साल मेले का सफल आयोजन होता हुआ आ रहा है। यह रिपोर्ट राजत मल्होत्रा ने दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चौथ मेला कितने साल से लगता आ रहा है?
गणेश चौथ मेला चंदौसी में पिछले 62 साल से लगता आ रहा है। इसकी शुरुआत नगर के पहले MBBS डॉक्टर स्व. गिरराज किशोर गुप्ता ने एक छोटे से स्थान से की थी, जो अब एक विश्व प्रसिद्ध मेला बन गया है।
इस मेले की स्थापना के पीछे क्या कहानी है?
गणेश मंदिर के स्थान पर एक हाथी का बच्चा कहीं से आकर बैठ गया था। इसे हटाने की सभी कोशिशें नाकाम हो गईं। तब डॉ. गिरराज किशोर गुप्ता ने उस स्थान पर गणेश मंदिर बनाने का वचन दिया, जिसके बाद हाथी का बच्चा चला गया।
गणेश चौथ मेला सर्वधर्म समभाव की मिसाल कैसे है?
इस मेले में सभी धर्मों के लोग एक साथ भाग लेते हैं। पांचों धर्मों के प्रतिनिधि फीता काटकर मेले का शुभारंभ करते हैं। मुस्लिम समाज गणेश वंदना में शामिल होता है और हिंदू लोग गणेश मेला ग्राउंड में बनी मजार पर चादर पोशी करते हैं।
इस बार मेले में कौन सी खास बात है?
इस बार मेले में CM योगी आदित्यनाथ द्वारा अनावरण की गई 145 फीट ऊंची गणेश मूर्ति है। शनिवार को प्रभु श्री गणेश की पालकी नगर में भ्रमण करेगी और फिर गणेश मंदिर पर विराजमान की जाएगी।
हर साल लोग इस मेले को देखने क्यों आते हैं?
लाखों लोग इस मेले को देखने आते हैं क्योंकि यह एक अद्भुत सांस्कृतिक आयोजन है जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ भाईचारे का संदेश देते हैं। इसके अलावा नगर में निकलने वाली विशाल रथयात्रा भी लोगों को आकर्षित करती है।
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