शिवराज-मोहन यादव के बीच दूरी को लेकर अटकलें फिर तेज
मध्यप्रदेश की सियासत में कभी ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय रहे शिवराज सिंह चौहान को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में ‘फुफा’ वाली चर्चा हो रही है।
मध्यप्रदेश की सियासत में कभी ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय रहे शिवराज सिंह चौहान को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में ‘फुफा’ वाली चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच सियासी दूरी और तालमेल को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। सोमवार को सीएम हाउस में हुई बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी और बैठने की व्यवस्था ने इन चर्चाओं को हवा दे दी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में यह बैठक आयोजित की गई थी। इसमें प्रदेश प्रभारी विप्लव देव और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। बैठक का मकसद संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। हालांकि, बैठक की तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक नजरें नेताओं की आपसी केमिस्ट्री और उनके बीच की दूरी पर टिक गईं।
बैठक की तस्वीर में प्रदेश प्रभारी विप्लव देव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए। तस्वीर में विप्लव देव के पास शिवराज सिंह चौहान बैठे थे, जबकि हेमंत खंडेलवाल के पास मुख्यमंत्री मोहन यादव बैठे दिखाई दिए। दोनों नेताओं के बीच कुछ पदाधिकारियों की दूरी नजर आई।
बैठने की इस व्यवस्था को राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे दोनों नेताओं के बीच सियासी दूरी से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, केवल बैठने की जगह या बैठक की तस्वीर के आधार पर शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच नाराजगी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव सरकार के बीच मतभेदों की चर्चा को आदिवासियों के मकान तोड़े जाने वाले घटनाक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वन विभाग की कार्रवाई में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में शिवराज सिंह चौहान प्रभावित लोगों के समर्थन में खड़े हुए थे।
शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे पर धरना दिया था। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रभावित परिवारों के पक्ष में आवाज उठाई। पूर्व मुख्यमंत्री के इस रुख को राजनीतिक हलकों में अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ असहज स्थिति के तौर पर देखा गया।
आदिवासियों के मकान तोड़े जाने का मामला प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चा में रहा। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच किसी औपचारिक नाराजगी की स्थिति है या नहीं।
कोर ग्रुप की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान की तस्वीरों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। तस्वीर में नेताओं की बैठने की जगह और उनके हावभाव पर राजनीतिक नजरें गईं। राजनीतिक विश्लेषक ऐसे मौकों पर नेताओं के हावभाव और आपसी संवाद को राजनीतिक संकेतों के रूप में देखते हैं।
हालांकि, तस्वीर में किसी नेता की मुस्कान या गंभीर मुद्रा को सीधे नाराजगी का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मुस्कान और शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी को लेकर अलग-अलग तरह की बातें की जा रही हैं, लेकिन तस्वीर अपने आप में दोनों नेताओं के बीच किसी ताजा विवाद की पुष्टि नहीं करती।
मध्यप्रदेश बीजेपी में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से शिवराज सिंह चौहान की भूमिका और मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनके राजनीतिक तालमेल पर नजर रखी जाती रही है। शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। अब मोहन यादव के नेतृत्व में पार्टी और सरकार का मौजूदा समीकरण आगे बढ़ रहा है।
इसी बदलाव के बीच यह सवाल भी उठता रहा है कि शिवराज सिंह चौहान की भूमिका किस तरह बनी हुई है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनका राजनीतिक तालमेल किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। आदिवासियों के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान का मुखर रुख और उसके बाद कोर ग्रुप की बैठक की तस्वीर ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
बीजेपी की इस बैठक ने एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान की भूमिका और मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनके संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बैठक में दोनों नेता मौजूद थे, लेकिन तस्वीर में उनके बीच नजर आई दूरी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
फिलहाल, दोनों नेताओं के बीच किसी ताजा टकराव या व्यक्तिगत नाराजगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। इसलिए बैठक की तस्वीर को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और पार्टी के अगले कदमों पर नजर रखना जरूरी होगा।
मध्यप्रदेश बीजेपी की राजनीति में अब सवाल यही है कि क्या शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच तालमेल कायम है, या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों नेताओं की भूमिकाएं नए सिरे से तय हो रही हैं। इसी सवाल के बीच ‘मामा’ से ‘फुफा’ तक की चर्चा ने बीजेपी की अंदरूनी सियासत को लेकर अटकलों को फिर तेज कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच दूरी की चर्चा क्यों हो रही है?
बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में दोनों नेताओं की बैठने की जगह और तस्वीर सामने आने के बाद सियासी दूरी को लेकर अटकलें तेज हुईं।
बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में क्या हुआ?
सीएम हाउस में हुई बैठक में संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी विप्लव देव और पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
क्या शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच नाराजगी की पुष्टि हुई है?
नहीं, सिर्फ बैठक की तस्वीर या बैठने की जगह के आधार पर दोनों नेताओं के बीच नाराजगी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले में शिवराज सिंह चौहान ने क्या किया था?
शिवराज सिंह चौहान प्रभावित लोगों के समर्थन में खड़े हुए थे। उन्होंने धरना दिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए।
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