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Uttar Pradesh General बहराइच

बहराइच: सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर टीपी शुक्ला का निधन, जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

मोहल्ला नौवागढ़ी के रहने वाले सेवानिवृत्त सेना अफसर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़े और श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ अभियान में शामिल रहे। बेटे डॉ. पीके शुक्ला ने मुखाग्नि दी।

बहराइच के श्मशान परिसर में तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर पर गेंदे की माला चढ़ाई जा रही है, वर्दीधारी जवान सलामी की मुद्रा में खड़े हैं
बहराइच के श्मशान परिसर से मिली तस्वीर: वर्दीधारी जवान सलामी की मुद्रा में, एक गार्ड टुकड़ी और तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर, जिस पर गेंदे की माला और गुलाब की पंखुड़ियां हैं। तस्वीर में मौजूद किसी व्यक्ति की शिनाख्त यहां नहीं की गई है। · Image credit: News Darpan Team

बहराइच शहर के मोहल्ला नौवागढ़ी में रहने वाले सेवानिवृत्त सेना अफसर ब्रिगेडियर टीपी शुक्ला का सोमवार को निधन हो गया। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मोर्चा लेने और श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ चले अभियान में हिस्सा लेने वाले इस अफसर को अंतिम विदाई के वक्त अयोध्या से आए जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

कश्मीर से श्रीलंका तक की तैनाती

ब्रिगेडियर शुक्ला की गिनती अच्छे अफसरों में होती थी। जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान वह आतंकियों से सीधे लोहा लेने वाली टीम का हिस्सा रहे। इसके बाद उन्हें श्रीलंका भेजा गया, जहां लिट्टे के आतंकियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में उन्हें कामयाबी मिली।

राष्ट्रपति की ओर से विशिष्ट सेवा मेडल

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ उनके काम को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया था। विशिष्ट सेवा मेडल भारतीय सशस्त्र बलों का वह सम्मान है, जो असाधारण ड्यूटी और उल्लेखनीय सेवा के लिए अफसरों और जवानों को दिया जाता है। यह वीरता पुरस्कार नहीं, बल्कि सेवा के दौरान निभाई गई जिम्मेदारी और नेतृत्व को मान्यता देने वाला मेडल है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी से दिया जाता है।

अंतिम विदाई पर सैन्य सम्मान

निधन की खबर मिलते ही अयोध्या से सेना के जवान बहराइच पहुंचे और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल महेश ध्यानी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को बेटे डॉक्टर पीके शुक्ला ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, परिजन और मोहल्ले के लोग मौजूद रहे।

जिला सैनिक कल्याण कार्यालय की भूमिका

हर जिले में बना सैनिक कल्याण कार्यालय पूर्व सैनिकों, उनकी पत्नियों और परिवारों के काम देखता है: पेंशन से जुड़े मामले, कैंटीन और मेडिकल सुविधाओं के कागजात, पहचान पत्र और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना इसी दफ्तर के जिम्मे होता है। किसी पूर्व सैनिक या सेवानिवृत्त अफसर के निधन पर सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर का इंतजाम भी यही कार्यालय नजदीकी सैन्य यूनिट के साथ मिलकर कराता है। बहराइच में अयोध्या से जवानों के पहुंचने की वजह यही व्यवस्था है, क्योंकि जिले में सेना की अपनी कोई बड़ी यूनिट नहीं है।

बहराइच के लिए क्या मायने

बहराइच नेपाल सीमा से लगा जिला है और यहां के गांव-मोहल्लों से बड़ी संख्या में नौजवान सेना और अर्धसैनिक बलों में जाते हैं। ब्रिगेडियर के पद तक पहुंचे अफसर का जाना जिले के पूर्व सैनिकों के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद ऐसे अफसर नई भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं और पेंशन-कल्याण के मामलों में परिवारों का सहारा बनते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिगेडियर टीपी शुक्ला कौन थे और उन्होंने कहां सेवा की?

ब्रिगेडियर टीपी शुक्ला सेवानिवृत्त सेना अफसर थे जो बहराइच के नौवागढ़ी मोहल्ले में रहते थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध चलाए गए अभियान में भी हिस्सा लिया।

ब्रिगेडियर शुक्ला को कौन से सम्मान मिले?

राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ उनके काम के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया। यह मेडल असाधारण ड्यूटी और उल्लेखनीय सेवा के लिए सशस्त्र बलों के अफसरों और जवानों को दिया जाता है।

अयोध्या से जवान बहराइच क्यों पहुंचे?

बहराइच जिले में सेना की अपनी बड़ी यूनिट नहीं है, इसलिए जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने नजदीकी सैन्य यूनिट अयोध्या से जवानों को बुलवाया ताकि ब्रिगेडियर शुक्ला को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा सके।

जिला सैनिक कल्याण कार्यालय का क्या काम है?

यह कार्यालय पूर्व सैनिकों, उनकी पत्नियों और परिवारों की देखभाल करता है। इसके जिम्मे पेंशन के मामले, मेडिकल सुविधाएं, पहचान पत्र और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना होता है। पूर्व सैनिकों के अंतिम संस्कार पर सैन्य सम्मान का इंतजाम भी इसी कार्यालय की जिम्मेदारी है।

बहराइच के लिए ब्रिगेडियर शुक्ला का निधन क्यों महत्वपूर्ण नुकसान है?

बहराइच नेपाल सीमा से लगा जिला है जहां से बड़ी संख्या में नौजवान सेना में जाते हैं। ब्रिगेडियर के पद तक पहुंचे अफसर रिटायरमेंट के बाद नई भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं और पेंशन-कल्याण के मामलों में परिवारों का सहारा बनते हैं, इसलिए उनका जाना जिले के लिए बड़ी हानि है।

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