तीन महीने बाद मिला 16 वर्षीय अनुज, माता-पिता को सौंपा गया; चुप्पी बरकरार
मथुरा के बरसाना से बरामद किए गए 16 वर्षीय अनुज चौधरी को तीन महीने बाद उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
मथुरा के बरसाना से बरामद किए गए 16 वर्षीय अनुज चौधरी को तीन महीने बाद उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। सोमवार को बाल कल्याण समिति ने अनुज को फिलहाल 10 दिन के लिए उसकी इच्छा के अनुसार माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी। इससे पहले पुलिस ने उसे सादाबाद के एसीजेएम न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय के आदेश के बाद अनुज को हाथरस बाल कल्याण समिति के सामने लाया गया।
अनुज की समिति के सामने पेशी के दौरान उससे पूरे मामले को लेकर जानकारी लेने की कोशिश की गई। हालांकि, अनुज ने किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया। उसने यह नहीं बताया कि वह पिछले करीब तीन महीने से कहां था और इस दौरान किन परिस्थितियों में रहा।
समिति की कार्रवाई के बाद अनुज को उसके माता-पिता के साथ भेज दिया गया। अब परिवार के लोग घर पहुंचने के बाद उससे बातचीत करेंगे। परिवार का कहना है कि अनुज से बातचीत के बाद ही यह पता चल सकेगा कि वह तीन महीने तक कहां रहा और उसके साथ क्या हुआ।
अनुज के चाचा जितेंद्र ने बताया कि उनका भतीजा बरसाना से मिला है। उन्होंने कहा कि तीन महीने के दौरान अनुज कहां रहा और किन परिस्थितियों में रहा, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। परिवार पहले अनुज से बात करेगा। इसके बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।
अनुज सादाबाद क्षेत्र के खेड़ा बरामई गांव निवासी राजवीर सिंह का 16 वर्षीय बेटा है। वह इंटरमीडिएट का छात्र है। परिवार के अनुसार, अनुज 25 जून को प्रेमानंद महाराज के आश्रम गया था। वहां से वह दीक्षा लेकर वापस लौटा था।
परिवार का कहना है कि आश्रम से लौटने के बाद अनुज ने बताया था कि उसका झुकाव अब आध्यात्म की ओर हो गया है। इसके बाद 3 जुलाई को वह कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकला था। लेकिन वह वापस नहीं लौटा।
अनुज के घर नहीं लौटने के बाद परिवार के लोगों ने उसकी काफी तलाश की। अलग-अलग जगहों पर तलाश करने के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने सादाबाद थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस भी अनुज की तलाश में जुटी थी।
परिवार अनुज का पता लगाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा था। काफी समय तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने पर तीन दिन पहले परिजनों ने वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर धरना दिया था। परिवार ने आशंका जताई थी कि अनुज आश्रम के अंदर हो सकता है।
धरने के दौरान परिवार ने अनुज के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद जताई थी। मथुरा पुलिस के आश्वासन के बाद परिजन धरने से लौट आए थे। इसके बाद पुलिस ने अनुज की तलाश तेज कर दी।
शनिवार शाम पुलिस ने अनुज को मथुरा के बरसाना से बरामद कर लिया। बरामदगी के बाद पुलिस ने उसकी परिवार के लोगों से मुलाकात भी कराई थी। हालांकि, उस समय भी तीन महीने के दौरान उसके रहने की जगह और परिस्थितियों को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई।
इसके बाद सोमवार को पुलिस अनुज को सादाबाद एसीजेएम न्यायालय में लेकर पहुंची। वहां पेशी के बाद न्यायालय के आदेश पर उसे हाथरस बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने पूरे मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अनुज को फिलहाल 10 दिन के लिए उसकी मर्जी से माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी।
अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अनुज 3 जुलाई को घर से निकलने के बाद पिछले करीब तीन महीने तक कहां रहा। परिवार यह भी जानना चाहता है कि इस दौरान वह किन परिस्थितियों में रहा। लेकिन अनुज ने फिलहाल इस बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि घर पहुंचने के बाद उससे बातचीत की जाएगी और उसके बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
16 वर्षीय अनुज कितने समय बाद मिला?
अनुज करीब तीन महीने बाद मथुरा के बरसाना से मिला।
अनुज को किसके साथ रहने की अनुमति मिली?
बाल कल्याण समिति ने उसे फिलहाल 10 दिन के लिए उसकी इच्छा के अनुसार माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी।
अनुज ने तीन महीने के दौरान की जानकारी क्यों नहीं दी?
अनुज ने समिति के सामने इस बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया।
अनुज घर से कब और किस बहाने निकला था?
अनुज 3 जुलाई कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा।
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