डेयरी और टोफू वेस्ट से कार्बन कैप्चर करना मुमकिन, स्विस वैज्ञानिकों ने खोज की डेयरी और टोफू प्रोडक्शन से निकलने वाले प्रोटीन-युक्त वेस्ट को कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ये दावा ETH Zurich के रिसर्चर्स ने किया है।
उन्होंने एक तरीका विकसित किया है जिसमें इन बायप्रोडक्ट्स से प्रोटीन निकाला जाता है और उसे पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ मिलाकर छिद्रयुक्त बीड्स बनाए जाते हैं, जो CO2 को ट्रैप कर सकते हैं।
डेयरी और टोफू प्रोडक्शन में बड़ी मात्रा में प्रोटीन-युक्त लिक्विड वेस्ट निकलता है, जिसे अक्सर फूड मैन्युफैक्चरिंग में दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता।
हवा से कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की प्रक्रिया, जिसे डायरेक्ट एयर कैप्चर (DAC) कहते हैं, ग्लोबल क्लाइमेट प्रयासों का अहम हिस्सा रही है।
ETH Zurich के वैज्ञानिक, जिनका नेतृत्व मटीरियल साइंटिस्ट राफाएल मेज़ेंगा कर रहे हैं, ने अपनी स्टडी *Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS)* जर्नल में प्रकाशित की है।
स्टडी में पता चला कि कार्बन कैप्चरिंग बीड्स ने लैब टेस्ट में मौजूदा DAC टेक्नोलॉजी से बेहतर प्रदर्शन किया।
ये बीड्स एक केमिकल रिएक्शन पर काम करते हैं: जब इन्हें हवा में रखा जाता है, तो इनके अंदर मौजूद पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड के साथ रिएक्ट करता है और उसे हाइड्रोजन कार्बोनेट में बदल देता है। इससे CO2 को वातावरण से हटाया जा सकता है।
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