वैज्ञानिकों ने खोजा प्लास्टिक खाने वाला बैक्टीरिया, जो रिसाइकिल में सबसे मुश्किल PVC को तोड़ सकता है पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), जिसे पाइप, केबल और मेडिकल इक्विपमेंट जैसी चीज़ों में इस्तेमाल किया जाता है, रिसाइकिल करने में सबसे मुश्किल प्लास्टिक में से एक है।
इसकी ताकत और टूटने के खिलाफ रेज़िस्टेंस इसे मैन्युफैक्चरिंग में तो उपयोगी बनाते हैं, लेकिन यही गुण इसे पर्यावरण में लंबे समय तक टिकाऊ भी बनाते हैं। ये कचरा प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती है।
इस समस्या का हल खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक रूप से मौजूद माइक्रोऑर्गेनिज़्म की तरफ रुख किया। उन्होंने देखा कि क्या ये सूक्ष्म जीव PVC जैसे जिद्दी प्लास्टिक को तोड़ सकते हैं।
*माइक्रोबियल सेल फैक्ट्रीज़* जर्नल में छपी एक नई स्टडी में यह पता चला है कि कुछ बैक्टीरिया PVC माइक्रोप्लास्टिक को लैब में कंट्रोल्ड कंडीशन्स में तोड़ सकते हैं। रिसर्च की शुरुआत उन मिट्टी के सैंपल से हुई, जो लंबे समय से प्लास्टिक प्रदूषण के संपर्क में थीं।
इन जगहों पर माइक्रोब्स पहले से ही सिंथेटिक कचरे के साथ एडजस्ट हो चुके थे। इन सैंपल्स से बैक्टीरिया को अलग किया गया और लैब में टेस्ट किया गया कि वे PVC को तोड़ने में कितने सक्षम हैं।
स्टडी, जो *नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन* में भी प्रकाशित हुई है, ने इन मिट्टी के सैंपल से बैक्टीरिया के स्ट्रेन को अलग किया। इनमें *स्टुट्ज़ेरीमोनस स्पीशीज़ NH2* सबसे असरदार साबित हुआ। इसने PVC माइक्रोप्लास्टिक के वजन को 23% तक घटा दिया।
एक और स्ट्रेन, *ग्लूटामिसिबैक्टर निकोटिनाए NH27*, ने भी कुछ हद तक PVC को तोड़ा, लेकिन इसका असर कम था। जब इन दोनों स्ट्रेन को मिलाया गया, तो इनकी क्षमता बढ़ गई और इन्होंने PVC के वजन को लगभग 27% तक कम कर दिया।
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