भारत में हाईवे का तेज विकास, कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था को

भारत में पिछले 12 सालों में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त विकास हुआ है। भारतमाला परियोजना के तहत मार्च 2026 तक 22,590 किलोमीटर हाईवे बनाए गए हैं। इस योजना का लक्ष्य 34,800 किलोमीटर कॉरिडोर विकसित करना है, जिसमें ₹5.35 लाख करोड़ का खर्च अनुमानित है।

यह विकास देशभर में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को बदल रहा है। 2017 में शुरू हुई भारतमाला परियोजना का फोकस आर्थिक कॉरिडोर, फीडर रूट्स, बॉर्डर रोड्स और एक्सप्रेसवे पर है।

इसने दूरदराज के इलाकों तक पहुंच आसान बनाई है और लॉजिस्टिक्स खर्च कम किया है, जिससे आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिला है। 2014 से भारत का नेशनल हाईवे नेटवर्क 61% बढ़कर 2025-26 तक 1,46,572 किलोमीटर हो गया है।

हाईवे निर्माण की गति भी बढ़ी है, जो 2013-14 में 11.6 किलोमीटर प्रतिदिन थी और 2025 में 34 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने यात्रा समय घटाया और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दिया।

अप्रैल 2026 में उद्घाटित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर ने दोनों शहरों के बीच यात्रा समय 6 घंटे से घटाकर 2.5 घंटे कर दिया। ये प्रोजेक्ट्स सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं।

द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स शहरी और क्षेत्रीय मोबिलिटी में नए मानक स्थापित कर रहे हैं। मुख्य बातें - भारतमाला परियोजना का लक्ष्य 34,800 किलोमीटर हाईवे बनाना है, ₹5.35 लाख करोड़ खर्च अनुमानित है।

- 2014 से 2025-26 तक नेशनल हाईवे नेटवर्क 61% बढ़ा। - हाईवे निर्माण की गति 2025 में 34 किलोमीटर प्रतिदिन हुई, जो 2013-14 में 11.6 किलोमीटर थी। - दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर ने यात्रा समय 6 घंटे से घटाकर 2.5 घंटे किया।

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