रोनाल्डो को आखिर हुआ क्या: मेजर टूर्नामेंट में पुर्तगाल के सबसे बड़े सिरदर्द कैसे बने CR7? आंकड़े चौंकाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो, जिन्हें कभी मैच का रुख बदलने वाला खिलाड़ी माना जाता था, अब पुर्तगाल के लिए उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
41 साल के स्ट्राइकर, जो अपने रिकॉर्ड छठे फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं, पुर्तगाल के पहले मैच में डीआर कांगो के खिलाफ कोई खास असर नहीं डाल सके। यह मैच 1-1 के निराशाजनक ड्रॉ पर खत्म हुआ।
पूरे 90 मिनट मैदान पर रहने के बावजूद रोनाल्डो न तो गोल कर पाए और न ही खेल पर कोई बड़ा प्रभाव डाल सके। आंकड़ों में गिरावट रोनाल्डो का हालिया प्रदर्शन बड़े टूर्नामेंट्स में सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 10 मैचों से वह ऐसे टूर्नामेंट्स में गोल नहीं कर पाए हैं।
फुटबॉल के सबसे बड़े गोल-स्कोरर के लिए यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। इस गोल सूखे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वह अब भी पुर्तगाल के लिए उतने अहम हैं जितने पहले थे। उम्र और बदलती भूमिका रोनाल्डो का खेलने का अंदाज समय के साथ बदल गया है।
पहले उनकी पहचान स्पीड, ड्रिब्लिंग और एथलेटिसिज्म से होती थी, लेकिन अब वह ज्यादातर बॉक्स के अंदर स्ट्राइकर की भूमिका निभाते हैं। पहले की तरह वह अब पीछे जाकर खेल बनाने या डिफेंस में योगदान नहीं देते।
उनकी भूमिका अब लगभग पूरी तरह से गोल करने तक सीमित हो गई है, जो तब मुश्किल हो जाती है जब गोल न आए। रोनाल्डो बनाम मेसी रोनाल्डो और लियोनेल मेसी की तुलना फुटबॉल में हमेशा से चर्चा का विषय रही है।
दोनों अपने करियर के आखिरी दौर में हैं, लेकिन मेसी ने अपने खेल को बदलकर टीम के लिए प्रभावशाली बने रहना सीखा है। वह अब पीछे खेलते हैं, अपने साथियों के लिए मौके बनाते हैं और अटैक को दिशा देते हैं।
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