जेनेलिया डिसूजा ने मेनोपॉज पर तोड़ी चुप्पी, महिलाओं को दिया सशक्त संदेश
Genelia D’Souza shares a powerful message on menopause, urging women to embrace aging and break the stigma surrounding this natural transition.
"40 की उम्र में मैं ज्यादा कूल हूं": जेनेलिया डिसूजा का मेनोपॉज पर दमदार मैसेज, जो हर महिला को सुनना चाहिए
मेनोपॉज महिलाओं की जिंदगी का एक नेचुरल हिस्सा है, लेकिन इस पर बात करना आज भी बहुत कम होता है। करियर, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और फिटनेस जैसे मुद्दों पर तो खुलकर चर्चा होती है, लेकिन मेनोपॉज को अक्सर डर, शर्म या असहजता की वजह से नजरअंदाज कर दिया जाता है। एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा ने हाल ही में *SheThePeople* को दिए एक इंटरव्यू में इस चुप्पी को तोड़ा और मेनोपॉज और उम्र बढ़ने पर अपनी सोच को खुलकर शेयर किया।
उनकी बातों ने खासकर उन महिलाओं को छुआ है, जो करियर, फैमिली और पर्सनल ग्रोथ के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही हैं। जेनेलिया ने कहा कि मेनोपॉज कोई समस्या नहीं है, बल्कि एक नेचुरल ट्रांजिशन है। इसमें शारीरिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं, जैसे हॉट फ्लशेस, मूड स्विंग्स, नींद में परेशानी और हार्मोनल बदलाव। लेकिन कई महिलाएं दबाव महसूस करती हैं कि वो ऐसे दिखें जैसे कुछ बदला ही न हो।
जेनेलिया ने मेनोपॉज से जुड़े स्टिग्मा को चुनौती दी और महिलाओं से इसे डरने या छिपाने की बजाय जिंदगी के नए रिदम के तौर पर देखने की बात कही। उन्होंने एक बातचीत का जिक्र किया, जहां किसी ने उनसे कहा कि मेनोपॉज के बाद वो बूढ़ी लगेंगी। "मुझे ये बातें सुनकर बुरा लगता है," उन्होंने कहा। साथ ही ये भी जोड़ा कि उम्र बढ़ना ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए महिलाओं को माफी मांगनी पड़े।
हमारी सोसाइटी में यंग दिखने और ब्यूटी स्टैंडर्ड्स को लेकर जो जुनून है, वो उम्र बढ़ने को स्वीकार करना मुश्किल बना देता है। जेनेलिया ने बताया कि कई महिलाएं मेनोपॉज पर बात करने से बचती हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि लोग उन्हें बूढ़ा समझेंगे। खासकर वर्किंग महिलाओं के लिए ये प्रेशर और ज्यादा होता है, क्योंकि उन्हें प्रोफेशनल और पर्सनल जिम्मेदारियों के साथ-साथ मेनोपॉज के बदलावों को भी संभालना पड़ता है।
एंटी-एजिंग प्रोडक्ट्स पर फोकस करने वाली इस दुनिया में जेनेलिया का नजरिया ताजगी भरा है। उन्होंने कहा, "उम्र बढ़ना खूबसूरत है, इसे सही नजरिए से देखिए।" उन्होंने महिलाओं को उम्र के साथ आने वाले अनुभव, समझ और मजबूती को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के चेहरे की लाइन्स उनकी मेहनत, मदरहुड, पार की गई चुनौतियों और पूरे किए गए सपनों की कहानियां बताती हैं।
अपनी जर्नी पर बात करते हुए जेनेलिया ने बताया कि 40 की उम्र को लेकर वो कैसा महसूस करती हैं। "बदलाव तो होना ही है। मैं कभी 20 की उम्र में वापस नहीं जाना चाहूंगी। 40 की उम्र में मैं खुद को ज्यादा कूल महसूस करती हूं," उन्होंने कहा। उनकी ये बात इस बात को दिखाती है कि जिंदगी के हर स्टेज की अपनी ताकत होती है। जहां जवानी कुछ फायदे लाती है, वहीं मैच्योरिटी आत्मविश्वास, खुद को बेहतर समझने और इमोशनल बैलेंस लाती है।
40 की उम्र में कई महिलाओं के लिए ये वक्त खुद को बेहतर समझने, अपनी प्राथमिकताओं को साफ करने और अपनी सीमाएं तय करने का होता है। जेनेलिया का मैसेज भारतीय वर्किंग महिलाओं के दिल को छूता है, जो अक्सर कई भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को संभालती हैं। वो याद दिलाती हैं कि मेनोपॉज कमजोरी या वैल्यू खोने का नाम नहीं है, बल्कि एक और चैप्टर है, जो ग्रोथ और ट्रांसफॉर्मेशन से भरा है।
मेनोपॉज पर खुलकर बात करके जेनेलिया इस मुद्दे को नॉर्मल बनाने और महिलाओं को ईमानदारी, सहानुभूति और सपोर्ट के लिए प्रेरित कर रही हैं। जैसा कि उन्होंने खूबसूरती से कहा, उम्र बढ़ना डरने की चीज नहीं है, इसे अपनाना चाहिए। और अगर उनकी बातों पर यकीन करें, तो 40 की उम्र जिंदगी का सबसे कूल, समझदार और सशक्त दौर हो सकता है।
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