15 साल की उम्र में शुरू किया काम, 19 की उम्र में बेच दिया स्टार्टअप, जानिए आयुष सिंह की कहानी
आज के दौर में सफलता के लिए सिर्फ बड़ी डिग्री या मोटी पूंजी ही जरूरी नहीं है। अगर आपके पास नया आइडिया, सीखने की लगन और मेहनत करने का जज्बा है, तो कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। इसका एक उदाहरण हैं आयुष सिंह
आज के दौर में सफलता के लिए सिर्फ बड़ी डिग्री या मोटी पूंजी ही जरूरी नहीं है। अगर आपके पास नया आइडिया, सीखने की लगन और मेहनत करने का जज्बा है, तो कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। इसका एक उदाहरण हैं आयुष सिंह, जिन्होंने महज 19 साल की उम्र में अपना स्टार्टअप बेचकर युवा उद्यमियों के लिए नई मिसाल पेश की है।
आयुष सिंह वरिष्ठ पत्रकार और भड़ास4मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह के बेटे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई है। तकनीक और इंटरनेट में रुचि रखने वाले आयुष ने बहुत कम उम्र से ही ऑनलाइन दुनिया को समझना शुरू कर दिया था।
15 साल की उम्र में हुई पहली कमाई
जब ज्यादातर बच्चे स्कूल और दोस्तों के बीच अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं, तब आयुष इंटरनेट और वेब डेवलपमेंट सीख रहे थे। उनकी मेहनत रंग लाई और 15 साल की उम्र में उन्हें Google AdSense से पहली ऑनलाइन कमाई हुई।
इसके बाद उन्हें अपना पहला प्रोफेशनल वेब डेवलपमेंट प्रोजेक्ट मिला। यहीं से उन्होंने समझ लिया कि तकनीक सिर्फ शौक नहीं, बल्कि करियर और बिजनेस का बड़ा मौका भी बन सकती है।
कई बार मिले झटके, लेकिन नहीं मानी हार
आयुष का सफर आसान नहीं था। उन्होंने कई डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम किया, लेकिन हर प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ। कभी सर्वर का खर्च बढ़ गया तो कभी सही यूजर्स तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
इन असफलताओं से उन्हें आर्थिक नुकसान भी हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार सीखते और नए प्रयोग करते रहे। इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा डिजिटल प्रोडक्ट तैयार किया, जिसे बाद में करीब 10,000 डॉलर यानी लगभग 8 लाख रुपये से ज्यादा में बेचने में सफलता मिली।
यह उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इससे उन्हें भरोसा मिला कि सही दिशा में की गई मेहनत बड़ा परिणाम दे सकती है।
इंजीनियरिंग नहीं, दर्शनशास्त्र चुना
टेक स्टार्टअप्स की दुनिया में अक्सर इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले लोग नजर आते हैं, लेकिन आयुष ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने दर्शनशास्त्र (Philosophy) की पढ़ाई की और साथ ही समाजशास्त्र व मनोविज्ञान जैसे विषयों को भी समझने की कोशिश की।
उनका मानना है कि भविष्य सिर्फ कोडिंग जानने वालों का नहीं होगा, बल्कि उन लोगों का होगा जो इंसानों की सोच, व्यवहार और समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।
अब शुरू किया है CosmoQuick
अपने अनुभव और सीख के आधार पर आयुष ने CosmoQuick नाम से नया वेंचर शुरू किया है। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो नौकरी ढूंढने वालों, कंपनियों और रिक्रूटमेंट एजेंसियों को एक साथ जोड़ने का काम करता है।
इसका उद्देश्य भर्ती की प्रक्रिया को आसान, तेज और बेहतर बनाना है, ताकि सही उम्मीदवार और सही कंपनी एक-दूसरे तक आसानी से पहुंच सकें।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आयुष सिंह की कहानी बताती है कि सफलता की शुरुआत हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं होती। कई बार एक छोटी जिज्ञासा, सीखने की चाह और लगातार मेहनत ही बड़ी मंजिल तक पहुंचा देती है।
कम उम्र में स्टार्टअप बनाना और उसे बेचना आसान काम नहीं है। लेकिन आयुष ने यह साबित किया है कि अगर सोच बड़ी हो और मेहनत लगातार की जाए, तो उम्र सफलता के रास्ते में कभी बाधा नहीं बनती।
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